शिक्षा सेवा संस्कार का त्रिवेणी संगम.. अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा


एक पीठ,एक प्रेरणा,एक उद्देश्य: राष्ट्र निर्माण में समर्पित बनोरा


पीड़ित मानवता की सेवा ही पूजा पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम का जीवन संदेश

33 वर्षों से जल रही सेवा की अंखड ज्योत बनोरा बना मानवता की पाठशाला
रायगढ़:- 33 बरस पहले सन 1993 में आज के ही दिन पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम के अनन्य प्रिय शिष्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने रायगढ़ पूर्वांचल के ग्राम बनोरा में चौदह सूत्रीय उद्देश्यों को लेकर पीड़ित मानव की सेवा का जो बीज रोपित किया वह तीन दशकों में आज वट वृक्ष बन गया । इस विशाल वट वृक्ष की शाखाएं छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण, डभरा, चिरमिरी, अंबिकापुर सहित अन्य प्रांत उत्तरप्रदेश के रेणुकोट, बिहार के कैमुर जिले के जिगना, झारखण्ड के आदर एवं रांची तक विस्तारित हो गई है। आश्रम की सभी शाखाओ में पीड़ित मानव की सेवा का कार्य अनवरत जारी है। ट्रस्ट स्थापना के मूलभूत उद्देश्यों को सार्थक कर रहा है। अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा प्रदेश वासियों के लिए अनमोल धरोहर बन गया है। अंचल के लिए सबसे बड़ी इस आध्यात्मिक पाठशाला में पीड़ित मानव की सेवा के साथ-साथ आम जनमानस के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करने एवम मनुष्य को मोक्ष की राह बताने का कार्य भी बखूबी से किया जाता है। संस्था मानव मात्र के अंदर मौजूद असिमित शक्तियों को जागृत करने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील है।अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान अघोर पंथ का बीजारोपण करने वाले वाले महान संत पूज्य अघोरेश्वर के शिष्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने सही मायने में पूरे छत्तीसगढ़ में अघोर पंथ की पावन परंपरा का विस्तार किया। बनोरा आश्रम की अध्यात्मिक शिक्षा ने मानव समाज को इस बात से अवगत कराया कि समस्याओ का समाधान बाहर नही है अपितु मानव के मन मस्तिष्क के अंदर मौजूद है। आश्रम ने बताया कि पत्थर को पूजने से लाभ है तो फिर पहाड़ को पूजा जाए। यह संस्था मानव जीवन के लिए आवश्यक सनातन परम्परा आस्था और विश्वास के महत्व को परिभाषित करने में सफल रही है। अंतिम पंक्ति में खड़े बेसहारा लोगों को जीवन की मूलभूत आवश्यकता चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना बनोरा ट्रस्ट का प्रथम उद्दश्य है। राजनीति दलों सहित समाजिक धार्मिक व्यापारिक संस्थाएं अघोरपंथ के नैतिक मूल्यों को आत्मसात करते हुये राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज करा रहे है। वनांचल में स्थापित इस आश्रम ने ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले सामान्य व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण में मददगार भूमिका निभाने के लिए तैयार किया। मोह माया के दल दल में फंसे मानव समाज को इस ट्रस्ट ने बखूबी से बाहर निकाला। त्रिकालदर्शी अघोरेश्वर महाप्रभु ने सबल राष्ट्र की कल्पना को साकार करने के लिए चित्र निर्माण की बजाय चरित्र निर्माण को महत्व दिया। ऐसी पाठशाला जहां चरित्र निर्माण आसानी से हो सके । सही मायने में बनोरा आश्रम मानव जाति के लिये ऐसे चरित्र की ऐसी पाठशाला है जहां मनुष्य स्वयं को सहजता से बदल सकता है।अघोरश्वर महाप्रभु ने श्मशान से समाज की ओर अवधारणा का श्रीगणेश तो कर दिया लेकिन इस दिशा में बहुत सारे कार्य किये जाने शेष थे। अघोरेश्वर के प्रियतम शिष्य बाबा प्रियदर्शी राम अघोरेश्वर के शेष अधूरे कार्यो को बखूबी से पूरा कर रहे है। बनोरा ट्रस्ट की हर गतिविधिया समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े साधन विहीन बेबश बेसहारा लोगो के लिए समर्पित है। सम्पन्न समाज का बड़ा तबका संस्था द्वारा बताए गए मार्ग का अनुशरण कर रहा है। साथ ही समाज के संपन्न वर्ग को जीवन के उद्देश्य कला और संस्कारों के महत्व का भी अनवरत बोध करा रहा है। गरीब व अमीर के मध्य वैमनस्यता की खाई बढ़ रही है। इसे मिटाने की दिशा में भी संस्था ने बहुत काम किया। बेसहारा साधन विहीन लोगों के आंसू पोछने के साधन इस विकसित अर्थव्यवस्था में कम ही है। अघोर गुरूपीठ ट्रस्ट बनोरा सभी शाखाओं में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों के जरिए अनवरत् चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में सफल रहा। आधुनिक मनोवृत्तियों से घिरा मानव बुराईयों की दल दल में फंस गया है। संस्कारों की कमी से सामाजिक चेतना शून्य हो रही है। बढ़ती नशाखोरी समाज की जड़ो को खोखला कर रही है। व्यवसायिक शिक्षा परेशानियों का मुख्य कारण है। ऐसी विषम परिस्थितियों में आश्रम से परम पूज्य प्रियदर्शी राम के निरंतर आर्शीवाचन समाज को दिशा दिखाने में पथ-प्रदर्शक साबित हो रहे है। जिन उद्देश्यों को लेकर इस ट्रस्ट की स्थापना की गई इस ट्रस्ट ने आशातीत सफलता पाई है।
*अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा की स्थापना के उद्देश्य*
राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए मानव मात्र को भाई समझना, नारी के लिए मातृभाव रखना,बालक-बालिकाओं के बहुमुखी विकास के लिए शिक्षोन्मुखी वातावरण निर्मित करना, असहाय व उपेक्षित लोगों की सेवा तथा उनके लिए समाज में मर्यादित भाव जागृत करना, अंधविश्वास, नशाखोरी, तिलक-दहेज, के उन्मूलन हेतु सफल प्रयास करना, मानव धर्म की मूल भावनाओं के विचार विनिमय के लिए मंच प्रदान करना इस संस्था के मूल उद्देश्यों के शामिल है। जिन्हें पूरा करने हेतु विभिन्न गतिविधियां निरंतर संचालित है। 33 वर्ष पूर्व जब पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के चरण इस पावन धरती पर पड़े थे, तब यहां चारों तरफ अज्ञानता का अंधकार था। साधन विहीन क्षेत्र में जन-जागृति का अभाव था । रूढ़िवादी परम्पराये हावी थी। अज्ञानता के इस गहन अंधेरे को मिटाने के लिए पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के संकल्पों से अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का बीज रोपित किया गया। शिक्षा का यह मंदिर क्षेत्र की शिक्षा की रीढ़ बन चुका है। पूज्य बाबा जी ने सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा की बुनियाद रखी।गांव का विकास तभी होगा जब गांव का बच्चा पढ़ेगा। इसी सोच के साथ शुरू हुए इस विद्यालय ने धीरे-धीरे चुनौतियों को हराया और ग्रामीण जनजीवन बदल दिया। अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर का निर्माण कराया गया जहां शौचालय, खेल मैदान, पेयजल व्यवस्था, स्नानागार की सुविधा, शिक्षकों के लिए शिक्षक सदन, प्रधानाध्यापक के लिए स्वतंत्र कक्ष, लिपिक कक्ष, स्टोर रूम, सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं विद्यालय परिसर में मौजूद है। स्थापना काल से वर्ष 2026 तक 14,103 विद्यार्थी न्यूनतम शुल्क में शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं जिसमें 1,052 विद्यार्थियों को बिल्कुल मुफ्त पढ़ाया गया । राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति के अतिरिक्त दोनों ही विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु अघोरेश्वर भगवान राम शिक्षण समिति द्वारा स्व. लक्ष्मण शुक्ल मेघा छात्रावृत्ति प्रदाय की जाती है। कन्या प्रोत्साहन छात्रवृत्ति भी शिक्षण समिति प्रदान करती है। स्थापना काल से अब तक 377 बच्चों को निशुल्क किताब-कॉपी और यूनिफॉर्म दी गई। छात्र वृत्ति 362 विद्यार्थी चयनित किए गए जिसमें 185 छात्र और 177 छात्राएं शामिल हैं।बच्चों को सिर्फ पास कराना नहीं, आगे बढ़ाना है इस सोच के साथ यहां हर साल 45 दिवसीय विशेष ग्रीष्मकालीन कोचिंग लगाई जाती है। जिसमें 2024 में 10वीं के 84 और 12वीं के 66 विद्यार्थी वर्ष 2025 में 10वीं के 82 और 12वीं के 60 विद्यार्थी वर्ष 2026 में 10वीं के 95 और 12वीं के 29 विद्यार्थीयो को कोचिंग का लाभ मिला।इस कोचिंग ने कई ग्रामीण बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में खड़ा कर दिया।
समय के साथ जब उच्च पदों पर पहुंचे बच्चों को अंग्रेजी की जरूरत महसूस हुई, इसलिए पूज्य बाबा जी ने सीबीएससी कोर्स के तहत अंग्रेजी मीडियम स्कूल की नींव रखी।
यह सर्वसुविधा युक्त स्कूल निर्माणाधीन है और जल्द ही आम जनता को समर्पित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के जीवन में ये स्कूल मील का पत्थर साबित होगा। अज्ञानता के अंधकार से शुरू हुई ये यात्रा आज शिक्षा के उजाले तक पहुंची है। और ये सफर अभी जारी है। रायगढ़ में ट्रस्ट की स्थापना के बाद 1994 के दौरान जशपुर जिले के मनोरा में अघोरेश्वर भगवान राम की स्मृति में स्कूल की स्थापना की गई । दूर सुदर के बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए चार बस की व्यवस्था भी है। शिक्षण व्यवस्था के लिए विद्यालय शिक्षण समिति गठित की गई है जो समय समय पर शिक्षा से जुड़े पहलुओं पर नजर रखती है। यह शिक्षण समिति साक्षरता विकास कार्य के अलावा पर्यावरण रक्षा के लिए भारतीय संस्कृति पर आधारित अनुसंधान का कार्य भी करती है। आश्रम द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई स्थानों पर नियमित स्कूलों का संचालन किया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्र में अधिक बालक-बालिकायें साक्षर बने।विद्यालय के आश्रमवासी छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक छात्रावास का निर्माण भी कराया गया है। छात्रावास में एक विशाल बरामदा है। एक कक्ष में दस छात्र सहजता से रह सकते है। छात्र-संख्या अधिक होनें पर भी छात्र अनुशासन की डोर से बंधे होते है। घासीदास *अमृतलाल एवं नंदलाल द्वारा दान दी गई जमीन पर हुआ ट्रस्ट का निर्माण*
सदैव हरियाली से आच्छादित रहने वाले इस अघोर गुरूपीठ का निर्माण घासीदास अमृतलाल एवं नंदलाल के द्वारा दान स्वरूप दी गई साढ़े तीन एकड़ जमीन में किया गया है। दान को परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए संस्था हर वर्ष परिवार जनों का आभार व्यक्त करती है।
*अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा की बनावट*
परम पूज्य प्रियदर्शी बाबा का नवनिर्मित कक्ष आगंतुकों को आकर्षित किए बिना नहीं रहता। इस निवास कक्ष में ही शिष्यो को अपने गुरू दर्शन का लाभ मिलता है। श्रद्धालुओं, भक्तों की व्यथा बड़े ही मनोयोग से सुनी जाती है और उनके निराकरण कर हर संभव आध्यात्मिक उपाय बताया जाता है। इस निवास के अग्र भाग में हरी घास से अच्छादित दो सुंदर क्यारियां एवं हरे घास का मैदान है जिनमें हमेशा रंग-बिरंगे फूलों की छटा सदैव बिखरी होती है। आश्रम का चप्पा-चप्पा हरियाली से आच्छादित है। शहरों में जिस हरियाली को देखने आंखे तरसती है जबकि इस आश्रम में जिधर नजर जाती है उधर हरियाली मन को प्रसन्न किए बिना नही रहती।
मुख्य द्वार से आगेे बढऩे पर संगमरमर से निर्मित विशाल उपासना स्थल है। जहां श्री यंत्र,परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम की विशाल प्रतिमा चरण-पादुका एवं अस्थि कलश स्थापित है। सर्व प्रथम आगंतुक उपासना स्थल में भगवान अघोरेश्वर राम के दर्शन कर मन में शांति का अनुभव करते है। अघोर भभूत माथे पर लगाने की परंपरा भी है। प्रतिदिन प्रात: प्रियदर्शी राम जी पूजा संपन्न करते है,संध्या बेला में आरती तथा भजन-कीर्तन यहां की दिनचर्या में शामिल है जिसमे सभी शामिल हो सकते है। यह आश्रम मानव की आंतरिक शांति की बाहरी अभिव्यक्ति है। आकर्षक हंस के जोड़े से निर्मित मुख्य द्वार की परिधि में प्रवेश करते ही आगंतुकों को सदा हंस के जोड़ो की तरह नीर-क्षीर विवेकी होनें का आभाष होता है। आश्रम परिसर में अघोरेश्वर के जीवन से जुड़े ग्रंथ, लाकेट,फोटो एवं साहित्यों का अनुपम संग्रह केंद्र है। आश्रम परिसर में पूज्य अघोरेश्वर की विशालकाय प्रतिमा उपासना स्थल में मौजूद है। पूज्य बाबा प्रियदर्शी के मार्गदर्शन लेने के पहले पूज्य अघोरेश्वर की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाए जाने की परम्परा है। आश्रम परिसर में रोग निवारण केन्द्र औषधालय में प्रियदर्शी बाबा राम के दुवाओ का असर दवाओं से कही अधिक है। प्रतिदिन दवा वितरण के अलावा प्रति सप्ताह बुधवार को होम्योपैथिक चिकित्सा रोगियों को नि:शुल्क दवा दी जाती है। श्वास संबंधी बीमारी की दवा प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा में दी जाती है। मिर्गी के रोगी एवं सफेद दाग के रोगी आश्रम परिसर में स्थित औषधालय से पूर्णतया छुटकारा पा सकते है। यहां दर्द निवारण फिजियोथेरेपी कक्ष की पृथक व्यवस्था है।
चिकित्सा के क्षेत्र में अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट का योगदान
मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में चिकित्सा की सुविधा सबसे प्रमुख मानी जाती है। आश्रम से जुड़ी विभिन्न शाखाओं में नियमित होने वाले नि:शुल्क शिविरों के आयोजन से ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत जनता को विशेष लाभ मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनोरा आश्रम के तत्वाधान में आयोजित होने वाले शिविर वरदान साबित हो रहे है। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन में सभी शाखाओं में किसी ना किसी रूप में इन शिविरों का आयोजन किया जाता है यह इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों के जरिए किया जाता है । ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली जनता पर इलाज के नाम पर आर्थिक भार ना पड़े इसलिए जांच के साथ साथ दवाई भी नि:शुल्क मुहैया कराई जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत 31 मार्च 2026 तक एलोपैथिक शिविरों से कुल अब तक 1 लाख 26 हजार 440 मरीजों को लाभ मिला। जिसमे अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा में 38 हजार 456, अघोर आश्रम-डभरा में 62हजार 871, अघोर आश्रम (काली मंदिर)-शिवरीनारायण में 6 हजार 471, आत्म अनुसंधान केंद्र-आदर में 6 हजार 700, अघोर सेवा आश्रम-कोइलिजोर में 11 हजार 049 एवं अवधूत कुटी-जौनपुर में 893 मरीज शामिल है। एलोपैथिक पद्धति से जांच के अलावा ट्रस्ट द्वारा होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति से इलाज पर विशेष जोर दिया जाता है। नि:शुल्क होम्योपैथिक शिविरों के जरिए स्थापना से लेकर मार्च 2026 तक कुल 1 लाख 08 हजार 588 मरीजों को लाभ मिला जिसमे अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा में 54 हजार 445, अघोर आश्रम-डभरा में 2 हजार 122, अघोर आश्रम (काली मंदिर)-शिवरीनारायण में 4 हजार 494, अभेद आश्रम-सरभोका में 1 हजार 236, क्रिया कुटी खाड़पाथर आश्रम-रेणुकूट में 4 हजार 483, औघड़ की मड़ई-जिगना में 41 हजार 808 मरीज शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क नेत्र शिविर का विशेष लाभ जनता को मिल रहा है। नि:शुल्क नेत्र आपरेशन शिविर से 12 हजार 698 मरीजों को लाभ मिला। जिसमें अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा के 7 हजार 185, अघोर आश्रम-डभरा के 3 हजार 112, अघोर आश्रम (काली मंदिर)-शिवरीनारायण में 2 हजार 326, एवं आत्म अनुसंधान केंद्र-आदर के 75 मरीज शामिल है। हाइड्रोसील ऑपरेशन में अब तक 920 मरीज लाभान्वित हुए हैं जिनमे अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा के तत्वाधान में हुए आपरेशन के जरिए 811 एवं अघोर आश्रम (काली मंदिर)-शिवरीनारायण के तत्वाधान में 109 मरीज शामिल हैं। नि:शुल्क नेत्र जांच शिविरों के जरिए अब तक 20हजार 956 लोगों लाभान्वित हुए जांच के दौरान मरीजों को आवश्यकतानुसार आई ड्रॉप, और नि:शुल्क चश्मा बनाकर वितरीत किया गया । अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट-बनोरा में 4 हजार 332 एवं औघड़ की मड़ई-जिगना में 16 हजार 624 लोग लाभान्वित हुए मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को उचित परामर्श देकर आगे ईलाज की पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाती हॉब। अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा में कैलिपर्स शिविर का आयोजन भी होता था।, इस शिविर के जरिए 881 लोगों को चयनित किया गया था तथा 976 कृत्रिम अंग वितरीत किये गए। चिकित्सीय सुविधाएं देने हेतु रायगढ़, खरसिया, लैलूंगा, जांजगीर, बिलासपुर, कोरबा के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी नि:शुल्क सेवाएं देने हेतु सदैव तत्पर रहते है।बनोरा, डभरा, शिवरीनारायण, अम्बिकापुर रेनुकोट आदर में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविर से मरीजो को निरंतर लाभ हासिल हो रहा है। नि:शुल्क शिविरों में मरीजों की जांच हेतु एक्स- रे,ईसीजी,डायबिटिक न्यूरोपेथी टेस्ट (एरीस्टो टी एफ) यूरिक एसीड टेस्ट (अलवर्ड डेविड)बोन डेंसिटी टेस्ट (मेयरबीटा बायोटिक्स) एक्सपायरो मेट्री अस्थमा टेस्ट (शिप्ला) जैसी उच्च स्तरीय सुविधायें भी मौजुद रहती हैं। धनवंतरी पैथोलेब खरसियां, श्री पैथोलेब डभरा, श्री पैथोलेब रायगढ़ द्वारा पैथोलॉजी जांच मुहैया कराई जाती है। शिविरों में वितरित की जाने वाली नि:शुल्क दवा वितरण कार्य मेडिकल प्रतिनिधी एसोशियेशन के सदस्यों के द्वारा किया जाता है।बनोरा आश्रम से जुडी सभी शाखाओं में नि:शुल्क होम्योपैथी चिकित्सा के जरिये उपचार किया जाता है।जिसके तहत बनोरा आश्रम रायगढ़ में डा. सुबोध पंडा, डा. सुशील गुप्ता, शिविरी नारायण आश्रम में डा. रवि शंकर दीक्षित, डभरा में नवीन पटेल,सरभोगा आश्रम में डा. रविकांत द्विवेदी तथा रेनुकोट में डा. अमरेन्द्र सिंह नि:स्वार्थ सेवाएं प्रदान कर रहे है।
सामाजिक कुरीतियों सहित खर्चीले विवाह पर रोक लगाने में ट्रस्ट की भूमिका सराहनीय
खर्चीली शादी पर रोक लगाने के लिए आश्रम में विवाह का आयोजन किया जाता है दोनों पक्षों की ओर से स्थितियों की संख्या समिति रखी जाती है। बिना दहेज शादियों के लिये आश्रम सतत प्रयत्नशील है। इस क्रम में अब तक बिना दहेज के 81 विवाह संपन्न हुए है।ये विवाह अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा,अघोर आश्रम काली मंदिर शिवरीनारायण, अघोर आश्रम कोइलीजोर, औघड़ की मड़ई जिगना,कुटीर खाड़ पाथर आश्रम रेनुकोट,मे सादगी के साथ विवाह संपन्न कराया गए । एक विधवा विवाह भी संपन्न कराया गया है।
*नशा उन्मूलन में उल्लेखनीय योगदान*
समाज में बढ़ती नशा खोरी एवं नशा उन्मूलन हेतु मादक द्रव्यों के सेवन को रोकने के लिये प्रचार-प्रसार के आलावा नशा निरोध हेतु दवाई भी वितरित की जाती है। आश्रम की दवा के जरिए सैकड़ो की संख्या में लोग नशे से दूर हुए है । 2005 से यह अभियान निरंतर जारी है। इसके अलावा पूज्य बाबा जी प्रत्येक आशीर्वचन के दौरान नशे के हानियों से समाज को अवगत कराते है।
*महिला सशक्तिकरण की दिशा में चमत्कारिक कार्य*
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पूज्य बाबा जी द्वारा क्रियाकुटी रेनुकोट आश्रम(उप्र) में वर्ष 2012 से महिला शिल्प कला प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ किया गया है। इस केन्द्र से अब तक 216 महिलाओंं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार के योग्य बनाया गया।
*स्वच्छता का महत्व समझाने ट्रस्ट ने बनाए शौचालय*
जीवन के लिये स्वच्छता अनिवार्य है लेकिन गरीबी स्वच्छता के लिये बड़ी बाधक भी है। आश्रम प्रबंधन ने इस मर्म को समझते हुए ग्राम बनोरा में निवासरत 73 निर्धन परिवारों को चिन्हित किया और उन्हे आश्रम की ओर से शौचालय निर्मित कर नि:शुल्क उपयोग हेतु सौंपा गया।
*अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा के समाजिक सरोकार*
यह आश्रम आम लोगों के जीवन की अदद आवश्यकता बन गया है। जनता ट्रस्ट को अपने सुख दुख का सहभागी मानती है।अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट-बनोरा द्वारा संचालित आश्रमों में निरंतर आवश्यक उपयोग की वस्तुओं का वितरण किया जाता रहा है। ठण्ड के ठिठुरते मौसम में कुल 4538 जरूरतमंद लोगों को रोजमर्रा इस्तेमाल कंबल साबुन कपड़े जैसी आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इसी क्रम में बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ लाभान्वित लोगों की संख्या कुल 1826 है।
*कोविड महामारी के दौरान ट्रस्ट की भूमिका*
वैश्विक महामारी कोविड महामारी के दौरान भी अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट, बनोरा द्वारा अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए पीड़ित जनों के सहायतार्थ 23 अप्रैल 2020 को प्रधान मंत्री सुरक्षा निधि में एक लाख ग्यारह हजार रुपए 20 सितम्बर 2020 को छत्तीसगढ़ सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन में जिला प्रशासन के जरिए एक लाख इक्कीस हजार रूपए का योगदान दिया गया। 06 मई 2021 को ट्रस्ट द्वारा छत्तीसगढ़ सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन में माननीय जिलाध्यक्ष महोदय को दो लाख पांच हजार रुपए का योगदान पुन: दिया गया था साथ ही 02 जून 2021 को शासकीय अस्पताल, रायगढ़ में एक लाख उनतीस हजार आठ सौ की लागत से 20 नग एयर-कूलर भेंट स्वरुप दिए गए।
*पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अघोर गुरु पीठ के कार्य*
प्रकृति में संतुलन बनाये रखने की दिशा में यह ट्रस्ट अपनी सभी शाखाओं के चारों ओर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देती है एवं आश्रम में आने वाले सभी लोगों को वृक्षारोपण कार्य हेतु प्रोत्साहित भी करते है। गुरु पूर्णिमा पर आश्रम आगमन के दौरान छत्तीस गढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री एवम विधायक रायगढ़ ओपी चौधरी ने विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया।
*वर्ष भर होने ट्रस्ट के विभिन्न आयोजन*
चैत्र नवरात्र पूज्य अघोरेश्वर का अवतरण दिवस भद्र पक्ष,शुक्ल पक्ष,सप्तमी तिथि, 29 नवंबर को पूज्य अघोरेश्वर का निर्वाण दिवस सहित वर्ष में 4 आयोजन ऐसे होते है। जिनमें भिन्न-भिन्न प्रांतों से भक्तजन आकर आयोजन में सम्मिलित होते है। इस अवसर पर भजन-कीर्तन एवं पूजा पाठ करते है। अघोर गुरु पीठ बनोरा में अघोरेश्वर भगवान राम के अवतरण दिवस एवं निर्वाण दिवस के अवसर पर शासकीय चिकित्सालयो में रोगियों, वृद्धजनों एवं कुष्ठ रोगियों के आश्रम में भी फल एवं दैनिक उपयोग की वस्तुयें प्रदान की जाती हैं।
*अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट द्वारा खेती को प्रोत्साहन*
आश्रम की परिधि से बाहर दक्षिण-पूर्व में कृषि के लिए सात एकड़ भूमि क्रय की गई इससे आधुनिक तरीके से धान की खेती का अभिनव प्रयोग किया गया है। चुंकि गावों में रोजगार के अवसरों का अभाव होता है। इस वजह से कृषि ही प्रमुख आय का साधन है। आधुनिक तरीके से खेती के प्रयोग के पीछे यह उद्देश्य है कि स्थानीय निवासी इस उन्नत पूर्ण तरीके को अपनाकर अधिक उत्पादन कर सके। यहां की भूमि खेती के योग्य है लेकिन सिंचाई के अभाव की वजह एक फसल प्राप्त होती है। सिंचाई के तकनीक को उन्नत करने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि गेहू आदि की उपज प्राप्त की जा सके। प्रत्येक वर्ष प्रयोग के तौर पर धान की अच्छी किस्मे भी बीज स्वरूप डाली जाती है। उत्पादन के समय सिंचाई पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाता है। खेती के कार्यो में बनोरा के ग्रामीण भी अपना श्रमदान देते है। आवश्यकता पडऩे पर मजदूर भी लगाए जाते है। उत्तरोत्तर विकास पथ पर अग्रसर रहते हुए अघोर गुरूपीठ ट्रस्ट अपने स्थापित उद्देश्यों की पूर्ति में तत्पर रहता है।
*पारिवारिक संस्कारों हेतु मार्गदर्शन*
बिना दहेज के शादी-व्याह,मुडंन संस्कार, नामकरण संस्कार, पठनव प्रदान संस्कार, दीक्षा संस्कार सहित सभी उपयुक्त संस्कार परम पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी द्वारा निर्देशित किए जाते है।
*गौ सेवा हेतु ट्रस्ट का समर्पण*
गाय धर्म की अनुपम शोभा है। गौ-माता के प्रति विशेष श्रद्धा की वजह से आश्रम परिसर में गौ-शाला का निर्माण भी किया गया है जिसमें गायें एवं बछड़े है इनके गोबर से कंपोस्ट खाद बनाकर कृषि एवं बागवानी के उपयोग में लाया जाता है। गायों की सेवा हेतु पृथक से एक व्यक्ति मौजूद है।
*ट्रस्ट के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले फाउंडर ट्रस्टी*
अघोर अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा संस्थान के लिए सेवा समर्पण और श्रद्धा के प्रेरणा स्त्रोत रहे फाउंडर ट्रस्टियों में नेत्रानंद ईजार दार जी, आयुर्वेदाचार्य भागवत प्रसाद शर्मा जी,राम नरेश त्रिपाठी जी, गुणेश्वर झा जी शामिल है ये सभी ट्रस्टी स्थापना काल से ट्रस्ट के भिन्न भिन्न संगठनात्मक कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान देते रहे। बनोरा ट्रस्ट की नींव मजबूत करने के लिए इन सभी ट्रस्टियों का पूरा जीवन गुरु सेवा लोकमंगल कार्यों के संचालन हेतु होम हो गया। बनोरा आश्रम सभी ट्रस्टियों के परिवार जनों के सुख शांति समृद्धि की कामना करता है । जन कल्याण कारी कार्यों के संचालन हेतु अपने जीवन की आहुति दी है
*वसुधैव कुटुम्बकम” का जीवंत मिशाल अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा*
जाति-धर्म से ऊपर उठकर 33 साल से मानव सेवा में रत है अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा
मानव सेवा ही माधव सेवा के सिद्धांत पर कार्य कर रहा है। पीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां जाति, धर्म, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं किया जाता। हर पीड़ित और जरूरतमंद को सम दृष्टि से देखा जाता है। ट्रस्ट के संस्थापक एवं मार्गदर्शक पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम का जीवन ही मानव सेवा का पर्याय बन गया है। उनके मार्गदर्शन में बनोरा पीठ शिक्षा, स्वास्थ्य, अन्नदान और संस्कार के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। यहां आने वाला हर व्यक्ति केवल “मानव” के रूप में सम्मान पाता है। बनोरा की पाठशाला में न कोई छोटा है न बड़ा, न कोई अपना है न पराया। यहां सिर्फ इंसानियत का धर्म चलता है।




