4 सौ करोड़ के बजट का सपना, फागिंग मशीनें सुधारने में निगम नाकाम

48 वार्डों के लिए पहले ही महज 16 मशीनें, 8 खराब; बारिश में डेंगू-मलेरिया के खतरे के बीच दवा छिड़काव पर संकट
रायगढ़/ शहर के विकास और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पेश करने वाला नगर निगम अपनी बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े संसाधनों को दुरुस्त रखने में ही नाकाम नजर आ रहा है। इसका बड़ा उदाहरण निगम की फागिंग व्यवस्था है। 48 वार्डों में मच्छररोधी दवा के छिड़काव के लिए निगम के पास महज 16 फागिंग मशीनें हैं, जिनमें से 8 मशीनें खराब पड़ी हैं। ऐसे में आधी मशीनरी के खराब होने के बाद शेष 8 मशीनों के भरोसे पूरे 48 वार्डों में नियमित फागिंग व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बारिश के मौसम में जलजमाव के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे डेंगू, मलेरिया सहित अन्य मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। ऐसे समय में फागिंग और मच्छररोधी दवा का छिड़काव सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। बावजूद इसके निगम की आधी फागिंग मशीनों का खराब पड़े रहना व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
करोड़ों का बजट, लेकिन मशीनों की मरम्मत में सुस्ती
नगर निगम द्वारा करीब 4 सौ करोड़ रुपये का बजट पेश कर शहर के विकास का बड़ा खाका सामने रखा गया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये के बजट का प्रावधान किया जा सकता है, तो मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम से जुड़े मौजूदा संसाधनों को दुरुस्त कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
नई योजनाओं और बड़े बजट के बीच पहले से उपलब्ध मशीनों को चालू हालत में रखना भी निगम की प्राथमिकता होनी चाहिए। समय पर मेंटेनेंस और मरम्मत नहीं होने से उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। खासकर ऐसे समय में जब बारिश के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है, फागिंग मशीनों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता महत्वपूर्ण हो जाती है।नगर निगम क्षेत्र में 48 वार्ड हैं और सभी वार्डों में आवश्यकता के अनुसार फागिंग कराने की जिम्मेदारी निगम की है। लेकिन 16 मशीनों में से 8 के खराब होने के बाद फिलहाल प्रभावी रूप से आधी मशीनरी ही उपलब्ध है। इन मशीनों से पूरे शहर में फागिंग कराने के साथ-साथ मच्छरों के अधिक प्रकोप वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देना निगम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।यदि किसी वार्ड में फागिंग की आवश्यकता तत्काल सामने आती है, तो सीमित संख्या में मशीनों के कारण पूरे शहर में नियमित अंतराल पर छिड़काव कराने की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में खराब मशीनों को जल्द से जल्द दुरुस्त कराना जरूरी है।
अक्टूबर से बढ़ेगी जरूरत, रायपुर से मंगाए जा रहे पार्ट्स
हालांकि नगर निगम के वाहन विभाग के प्रभारी का कहना है कि वर्तमान में फागिंग नियमित रूप से प्रारंभ नहीं हुई है और अक्टूबर से इसकी आवश्यकता अधिक बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि फागिंग मशीनों की मरम्मत के लिए आवश्यक पार्ट्स जिले में उपलब्ध नहीं होते हैं। इसके चलते पार्ट्स रायपुर से ऑर्डर कर मंगाए गए हैं।
वाहन विभाग प्रभारी के अनुसार, खराब फागिंग मशीनों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है और करीब 15 दिनों के भीतर मशीनों को व्यवस्थित कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि आवश्यकता बढ़ने से पहले मशीनों को चालू हालत में लाने की तैयारी की जा रही है।
बीमारी बढ़ने के बाद जागेगा निगम या पहले होगी तैयारी?
फागिंग को लेकर निगम की मौजूदा स्थिति ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बाद संसाधनों को दुरुस्त करने की कवायद तेज होगी या उससे पहले ही व्यवस्था को मजबूत कर लिया जाएगा। निगम के अनुसार अक्टूबर से फागिंग की आवश्यकता अधिक बढ़ेगी और खराब मशीनों की मरम्मत के लिए पार्ट्स मंगाए जा चुके हैं।अब निगाह इस बात पर है कि 15 दिनों में खराब मशीनें वास्तव में कितनी दुरुस्त होती हैं और अक्टूबर से पहले 48 वार्डों में नियमित एवं प्रभावी फागिंग के लिए निगम कितनी मशीनें उपलब्ध करा पाता है।
वर्सन/फागिंग मशीन का उपयोग अक्टूबर में अधिक होगा।वर्तमान में बारिश की वजह से दवा छिड़काव रेगुलर शुरू नहीं हुआ है।फागिंग मशीन के पार्ट्स रायपुर में उपलब्ध है।ऑर्डर कर मंगवाया गया है।15 दिनों के मशीन व्यवस्थित हो जाएगी।
सूरज देवांगन
प्रभारी वाहन विभाग




