दवा छिड़काव ठप, निगम की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

करोड़ों के बजट वाले निगम में दवा के लिए तरस रहे वार्ड, कई महीनों से मेलाथीन पावडर नहीं मिलने का पार्षदों का दावा
रायगढ़/ शहर की सफाई व्यवस्था और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के विभिन्न वार्डों में नियमित दवा छिड़काव व्यवस्था लंबे समय से प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। कई पार्षदों का आरोप है कि उनके वार्डों में मच्छर नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाला मेलाथीन पावडर तक कई महीनों से उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के बावजूद दवा छिड़काव की व्यवस्था किस स्तर पर संचालित हो रही है, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खास बात यह है कि सालाना करीब साढ़े 3 सौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश करने वाले नगर निगम में यदि वार्ड स्तर पर दवा छिड़काव के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो यह व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। पार्षदों की शिकायतों के बावजूद यदि कई-कई महीनों तक दवा उपलब्ध नहीं होती, तो फिर शहर में मच्छर नियंत्रण की व्यवस्था आखिर किस भरोसे संचालित हो रही है, यह बड़ा सवाल है।मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को दवा एवं संबंधित व्यवस्था के लिए लगभग 10 लाख रुपये की राशि की स्वीकृति मिली थी। इसमें करीब डेढ़ लाख रुपये की मेलाथीन पावडर एवं लिक्विड दवा का ऑर्डर किए जाने की बात बताई जा रही है।अब सवाल यह है कि जब दवा की आवश्यकता पहले से बनी हुई थी और वार्डों से लगातार मांग सामने आ रही थी, तो दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने में इतनी देरी क्यों हुई? स्वीकृति मिलने के बाद दवा की खरीदी, आपूर्ति और वार्डों तक वितरण की प्रक्रिया किस स्तर पर अटकी रही, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा जल्द उपलब्ध होने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर वार्डों में दवा की उपलब्धता को लेकर पार्षदों की शिकायतें अब भी बनी हुई हैं। ऐसे में विभाग के दावे और वार्डों की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है।दवा छिड़काव की समस्या अकेली नहीं है। शहर के कई हिस्सों में नियमित कचरा उठाव को लेकर भी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। यदि कचरा समय पर नहीं उठता और उसे लंबे समय तक एक ही स्थान पर पड़ा रहने दिया जाता है, तो गंदगी के साथ-साथ मच्छर और अन्य कीटों के पनपने की स्थिति भी बनती है।ऐसे में एक ओर जहां नियमित कचरा उठाव आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर मच्छर नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव भी जरूरी है। दोनों व्यवस्थाओं के बीच समन्वय नहीं होने का सीधा असर शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ सकता है।
पार्षदों के दावे से सामने आई दवा की कमी
वार्डों में दवा छिड़काव को लेकर पार्षदों की अलग-अलग शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ पार्षदों का कहना है कि उनके वार्ड में मेलाथीन पावडर करीब छह माह से उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि कुछ पार्षद इससे भी लंबे समय से दवा की मांग किए जाने की बात कह रहे हैं। एक पार्षद द्वारा करीब दो साल से दवा के लिए निगम में चक्कर लगाने की बात कही जा रही है।यदि पार्षदों के ये दावे सही हैं तो यह केवल दवा की अनुपलब्धता का मामला नहीं है, बल्कि वार्डों में मच्छर नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की नियमितता पर सवाल खड़ा करता है। दवा छिड़काव का उद्देश्य ही मच्छरों के प्रजनन और उनकी संख्या को नियंत्रित करना है। ऐसे में लंबे समय तक दवा उपलब्ध नहीं होने से बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य प्रभारी के पास भी स्टॉक का स्पष्ट अपडेट नहीं!
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि निगम के स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी के पास ही मौजूदा दवा स्टॉक का स्पष्ट एवं अद्यतन आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि जब संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को ही यह स्पष्ट जानकारी नहीं होगी कि निगम के पास कितनी दवा उपलब्ध है, कितनी खपत हुई और कितनी दवा की आवश्यकता है, तो वार्डों में दवा छिड़काव की प्रभावी मॉनिटरिंग कैसे होगी?
सफाई विभाग की कमान को लेकर भी सवाल
पूरे मामले में नगर निगम के सफाई विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार निगम में स्थायी सफाई अधिकारी की कमी बनी हुई है। वहीं स्वास्थ्य एवं सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी सीमित प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संचालित किए जाने की बात सामने आ रही है।स्वास्थ्य और सफाई विभाग शहर की मूलभूत सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग हैं। इन विभागों में नियमित अधिकारियों की उपलब्धता, कर्मचारियों की निगरानी, संसाधनों का प्रबंधन और वार्डवार कार्यों की मॉनिटरिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जिम्मेदार पदों पर स्थायी एवं अनुभवी अधिकारियों की कमी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पंप ऑपरेटर के भरोसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी?
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निगम के पंप ऑपरेटर स्तर के कर्मचारी के भरोसे संचालित किए जाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि क्या इतने बड़े शहर की स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक एवं तकनीकी व्यवस्था निगम के पास मौजूद है?
यह व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसका अंदाजा दवा छिड़काव को लेकर सामने आ रही शिकायतों से लगाया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी आवश्यक है कि विभागीय जिम्मेदारियां वर्तमान में किस अधिकारी या कर्मचारी के पास हैं और उनकी प्रशासनिक स्थिति क्या है।
300 करोड़ के बजट के बीच बुनियादी व्यवस्था क्यों बदहाल?
नगर निगम का बजट यदि करीब 300 करोड़ रुपये के स्तर पर है, तो शहरवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इस बजट का कितना हिस्सा वास्तविक रूप से सफाई, मच्छर नियंत्रण, कचरा उठाव और वार्ड स्तर की मूलभूत सेवाओं पर खर्च हो रहा है।
एक तरफ शहर को बेहतर बनाने के लिए बड़े बजट और विकास कार्यों की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ मच्छर नियंत्रण के लिए आवश्यक दवा तक वार्डों में उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आती है। इससे निगम की प्राथमिकताओं और खर्च की योजना पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सीधी बात : स्वास्थ्य विभाग प्रभारी सौरभ आलोक साव
से सवाल-जवाब
प्रश्न : शहर के वार्डों में दवा छिड़काव के लिए दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसका क्या कारण है और दवा कब तक उपलब्ध होगी?
उत्तर : शहर के वार्डों में दवा छिड़काव के लिए मंगलवार तक दवा का स्टॉक उपलब्ध हो जाएगा।
प्रश्न : कई पार्षदों का कहना है कि कुछ वार्डों में छह माह तो कुछ वार्डों में करीब दो साल से मेलाथीन पावडर का वितरण नहीं हुआ है। इस पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : डेंगू से निपटने के लिए बारिश के पूर्व वार्डों में दवा का छिड़काव किया जाता है। इसके साथ ही लिक्विड दवा का वितरण भी वार्डों में किया गया है।
प्रश्न : मेलाथीन पावडर की खरीदी और स्टॉक को लेकर पार्षदों में नाराजगी है। क्या निगम की ओर से मेलाथीन पावडर की खरीदी को लेकर किसी तरह का परहेज किया जाता है?
उत्तर : दवा की खरीदी समान मात्रा में की जाती है। वर्तमान में दवा के लिए करीब 10 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है, जिसमें से लगभग डेढ़ लाख रुपये की दवा मंगाई गई है।
प्रश्न : नगर निगम के स्टॉक में वर्तमान में दवा छिड़काव के लिए कितनी मात्रा में दवा उपलब्ध है?
उत्तर : फिलहाल स्टॉक की जानकारी उपलब्ध नहीं है। स्टोर इंचार्ज को सोमवार को स्टॉक पंजी का मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं। स्टॉक पंजी के मिलान के बाद ही वर्तमान में उपलब्ध दवा की वास्तविक मात्रा के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
पार्षदों ने बताई दवा और सफाई व्यवस्था की स्थिति
क्या कहते हैं पार्षद
वार्ड क्रमांक 17 के पार्षद सलीम नियारिया ने बताया कि 48 वार्डों के अनुरूप नगर निगम के पास पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में कचरा उठाव भी नियमित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि निगम में स्थायी स्वास्थ्य अधिकारी नहीं होने के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। यहां तक कि पंप ऑपरेटर को सफाई विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। पार्षद ने सफाई विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई।
वार्ड क्रमांक 20 के पार्षद शरद हरि शराफ ने बताया कि उनके वार्ड में करीब छह माह से मैलाथीन पावडर उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही इसका छिड़काव हुआ है। उन्होंने बताया कि पूर्व में टेमिफास्ट का छिड़काव किया गया था, लेकिन वर्तमान में मच्छरों की रोकथाम के लिए आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।
वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद अशोक यादव ने बताया कि नगर निगम द्वारा पर्याप्त मात्रा में दवाओं का वितरण नहीं किया जा रहा है। बारिश के मौसम में छिड़काव के लिए लिक्विड दवा का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है, जबकि पावडर की आवश्यकता अधिक रहती है। इसके बावजूद निगम की ओर से पिछले करीब तीन माह से मैलाथीन पावडर उपलब्ध नहीं कराया गया है।
वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद नवाब खान ने बताया कि उनके वार्ड में पिछले करीब दो वर्षों से दवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे को नगर निगम की सामान्य सभा में भी प्रमुखता से उठाया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक इसका कोई सकारात्मक समाधान सामने नहीं आया है।
वार्ड क्रमांक 44 की पार्षद ममिता राजकमल ने बताया कि करीब 15 दिन पूर्व उनके वार्ड में छिड़काव के लिए लिक्विड दवा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि मैलाथीन पावडर का अभाव अब भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में मच्छरों की रोकथाम के लिए पावडर की अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।




