Saturday, May 30, 2026
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महाजेंको को बेच दी जंगल की जमीन, 100 करोड़ के घोटाले में पीएमओ में शिकायत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने शुरू की जांच

महाजेंको को बेच दी जंगल की जमीन, 100 करोड़ के घोटाले में पीएमओ में शिकायत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने शुरू की जांच

सही तरीके से हुई जांच तो नपेंगे वन, राजस्व व महाजेंको के भी अफसर

जनकर्म न्यूज

रायगढ़। जिले के भू माफिया और दलालों ने महाराष्ट्र सरकार की बिजली कंपनी को 100 करोड़ का चूना लगा दिया। महाराष्ट्र की बिजली कंपनी महाजेंको को रायगढ़ के दलालों ने फॉरेस्ट की 500 एकड़ जमीन बेच दी। यह जमीन छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगी, वो जमीन है जिसका कोई राजस्व रिकॉर्ड नहीं है। यह जंगल की जमीन है और यहां पर सैकड़ों सालों से आदिवासी रहते आ रहे हैं। दलालों ने तहसीलदार, वन अधिकारी और पटवारी से सांठगांठ कर महाजेंको को 100 करोड़ में यह जमीन बेच दी। इस जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर दी गई। सालों से ये सिंडिकेट कैपा के पैसे की भी बंदरबांट कर रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने अब 100 करोड़ के इस घोटाले की जांच बैठाई है। यह पूरा घोटाला 100 करोड़ की 500 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह जमीन महाराष्ट्र सरकार की बिजली कंपनी महाजेंको ने रायगढ़ जिले में खरीदी है। महाजेंको को रायगढ़ जिले के गारे पेलमा में कोल ब्लॉक आवंटित हुआ है। इसकी एमडीओ अडानी कंपनी है। इस कोल ब्लॉक की ऐवज में बिजली कंपनी ने पेड़ लगाने के लिए 500 एकड़ जमीन खरीदी। छत्तीसगढ़ के दलालों और भूमाफिया ने राजस्व और वन अधिकारियों से साठ गांठ कर महाजेंको को 100 करोड़ का चूना लगा दिया इन लोगों ने बिजली कंपनी को उस जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर दी जो फॉरेस्ट की जमीन है और इस पर सालों से आदिवासी रहते आ रहे हैं। इस पूरे गड़बड़ घोटाले में महाजेंको के अधिकारी, छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग के पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और डीएफओ शामिल हैं।

आदिवासियों की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री

छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला ओडिशा की सीमा से लगा हुआ है। यहां के 10-12 गांव जो 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर बसे हुए हैं, वे न तो छत्तीसगढ़ में आते हैं और न ही उड़ीसा में। सरकारी रिकॉर्ड में इनको मसाहती गांव घोषित किया हुआ है इसलिए इनका कोई राजस्व रिकॉर्ड नहीं है। यहां पर सालों से आदिवासी लोग रहते हैं जो वहीं पर खेती कर अपना जीवन यापन करते हैं। भूमाफिया और दलालों ने इसी 500 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री महाजेनको को कर दी। इस फर्जी रजिस्ट्री में पटवारी से लेकर तहसीलदार और वन अधिकारी का सिंडीकेट शामिल है। हैरानी की बात ये है कि पटवारी तहसीलदार और बन अधिकारियों ने यह लिखकर भी दे दिया कि वे भौतिक रूप से यह जमीन देखकर आए है। यानी जो जमीन है ही नहीं उसका भौतिक सत्यापन हो गया और उसकी रजिस्ट्री भी कर दी गई। जाहिर है जमीन के इन 100 करोड़ की बंदरबांट इन सबके बीच में हो गई।

अब महाराष्ट्र सरकार ने बिठाई जांच

यहा पूरा मामला हाल ही में सामने आया है जब महाराष्ट्र सरकार ने इसकी जांच बैठाई है। महाराष्ट्र सरकार के इंडस्ट्री एवं एनर्जी डिपार्टमेंट ने बिजली कंपनी के एमडी को ऑर्डर जारी कर इस पूरे घोटाले की जांच करने को कहा है। छत्तीसगढ़ के विसिल ब्लोअर नरेश गुप्ता ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री ऑफिस से की। पीएमओ ने महाराष्ट्र सरकार को इस मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

महाजेंको ने शैली कंपनियों से खरीदी 100 करोड़ में 500 एकड़ जमीन

इस घोटाले की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई। पर्यावरण मंजूरी के लिए लगने वाली जमीन की तलाश कर रहे महाजेनको के अधिकारियों की मुलाकात इन दलालों से कटाई गई। इन्होंने ही कंपनी के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया। इस कंसल्टेंट ने उन अखबारों में जमीन संबंधी विज्ञापन छपवाए जिनका सुर्कलेशन जीरो है। विज्ञापन के बाद जिन एजेंसियों ने अपनी रुचि दिखाई वे इन दलालों की ही फर्जी एजेंसी थी। महाजेंको ने शेल कंपनियों से 100 करोड़ में 500 एकड़ जमीन खरीदी। इस पूरे गड़बड़ घोटाले में महाजेंको के अधिकारी, छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग के पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और डीएफओ शामिल हैं

कहां से आएगी हरियाली, कैंपा मद पर भी उठे सवाल

जब किसी सड़क, खदान, बांध, रेलवे, उद्योग या दूसरी परियोजना के लिए जंगल की जमीन का उपयोग किया जाता है, तब जितना वन क्षेत्र प्रभावित होता है, उसकी भरपाई के लिए परियोजना एजेंसी से एक राशि ली जाती है। यही पैसा कैपा फंड में जमा होता है। कैंपा का उद्देश्य जंगलों की क्षति की भरपाई करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इसके तहत कई काम किए जाते हैं। जैसे पौधारोपण करना, कटे हुए जंगलों की भरपाई करना, वन्यजीव संरक्षण, जंगलों में जल संरक्षण और मिट्टी संरक्षण कार्य, वन क्षेत्रों में सड़क, चौकी, फेंसिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना और स्थानीय वनवासियों और ग्रामीणों से जुड़े संरक्षण कार्य करना। इसके लिए कंपनी से हर साल करोड़ों रुपए का फंड आता है। अब यह पैसा कहां जा रहा है यह किसी को पता नहीं है। जाहिर है इस फंड की भी बंदरबांट हो रही है।

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