Thursday, July 9, 2026
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सबसे बड़े महाविद्यालय डिग्री कॉलेज में आधार आधारित उपस्थिति व्यवस्था ठप

सबसे बड़े महाविद्यालय डिग्री कॉलेज में आधार आधारित उपस्थिति व्यवस्था ठप


5 माह बाद भी नहीं हुआ सुधार, प्रबंधन ने कहा नहीं दरकार, उच्च शिक्षा विभाग का उद्देश्य अधूरा

रायगढ़/ उच्च शिक्षा संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार सक्षम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी किए गए थे। उद्देश्य यह था कि कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित हो, फर्जी उपस्थिति की संभावना समाप्त हो तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़े। शहर के सबसे बड़े शासकीय डिग्री कॉलेज में इस व्यवस्था का शुभारंभ भी किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद मशीन खराब हो गई और पांच माह बीत जाने के बाद भी उसे दुरुस्त नहीं किया जा सका है।

जानकारी के अनुसार महाविद्यालय में स्थापित बायोमेट्रिक मशीन प्रारंभिक दिनों में संचालित हुई, परंतु बाद में तकनीकी रूप से बंद हो गई। कॉलेज सूत्रों का कहना है कि लगभग पांच माह पूर्व महाविद्यालय में कार्यरत एक दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मी ने नशे की हालत में मशीन पर उपस्थिति दर्ज करते समय स्क्रीन पर जोर से दबाव डाल दिया, जिससे टच स्क्रीन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद मशीन पूरी तरह बंद हो गई और तब से कर्मचारियों की उपस्थिति उसमें दर्ज नहीं हो पा रही है।घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारी की गलती मानते हुए उसका एक माह का वेतन रोकने तथा मशीन की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक मशीन चालू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ की उपस्थिति वैकल्पिक व्यवस्थाओं के भरोसे चल रही है।स्थिति यह है कि जिस व्यवस्था को सरकारी महाविद्यालयों में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लागू किया गया था, वही जिले के सबसे बड़े कॉलेज में ठप पड़ी हुई है। कर्मचारियों की उपस्थिति अब मोबाइल आधारित एप के माध्यम से दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उसमें भी नियमित तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। कई बार सर्वर डाउन होने, इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहने और लॉगिन संबंधी समस्याओं के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। इससे कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है।

उच्च शिक्षा विभाग का उद्देश्य अधूरा

शिक्षा विभाग द्वारा बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य उपस्थिति प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाना था, ताकि वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सके। मगर डिग्री कॉलेज में मशीन लंबे समय से बंद रहने और वैकल्पिक एप आधारित व्यवस्था के भी सुचारु रूप से काम न करने के कारण यह सवाल उठने लगा है कि महाविद्यालय में उपस्थिति व्यवस्था की पारदर्शिता आखिर कैसे सुनिश्चित होगी। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब सबसे बड़े कॉलेज में ही बायोमेट्रिक प्रणाली प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही, तो अन्य संस्थानों में इसकी स्थिति कैसी होगी।

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