विकास की कीमत या पर्यावरण का विनाश? नवदुर्गा और रुपाणाधाम कंपनी की मनमानी
बरपाली–गदगांव क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग पर उठे गंभीर सवाल,ठेकेदार हुआ बेलगाम
रायगढ़/ जिले के बरपाली और गदगांव के बीच बहने वाले प्राकृतिक बरदे नाले में कथित रूप से बड़े पैमाने पर फ्लाई ऐश डंपिंग किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि नवदुर्गा प्लांट और रुपाणा धाम प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश को ठेकेदार रोहतास नेहरा के माध्यम से नाले एवं आसपास के क्षेत्र में डंप किया गया, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य और आजीविका पर भी गंभीर संकट पैदा हो गया है।
गौरतलब हो कि जिस नाले का पानी कभी गांवों और मवेशियों के लिए उपयोगी था, वह अब फ्लाई ऐश की परतों से प्रभावित हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी मशीनों की मदद से प्राकृतिक जलधारा के स्वरूप में बदलाव कर वहां राखड़ डंप की गई, जिससे आसपास की हरियाली और कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। लोगों का कहना है कि इससे हजारों पेड़ों के प्रभावित होने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि भी बर्बाद हुई है।स्थानीय लोगों का दावा है कि बरसात के दौरान फ्लाई ऐश बहकर नाले के पानी में मिल रही है, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यही जलधारा आगे राबो डैम और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचती है, जिससे आसपास के कई गांवों के पेयजल एवं पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रभावी रोकथाम नहीं की गई तो भविष्य में जलजनित एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।इस पूरे मामले में पंचायत की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित पंचायत द्वारा जारी की गई एनओसी के आधार पर डंपिंग का कार्य किया गया, जबकि इससे क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचा।तो क्या ग्राम पंचायत अथवा पर्यावरण विभाग को प्राकृतिक नाले में कंपनी के फ्लाईएश को डंप किए जाने की अनुमति प्रदान करने का अधिकार है।ग्रामीण इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।वही पर्यावरण विभाग की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, लगभग दो माह पूर्व पर्यावरण विभाग ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए नवदुर्गा प्लांट पर करीब 8 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई और इसके बाद भी क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग की समस्या पूरी तरह नहीं रुकी।
कंपनी का वृहद हस्त, ठेकेदार की मनमानी
इस पूरे काले कारोबार का मुख्य कर्ताधर्ता और मोहरा ठेकेदार रोहतास नेहरा है, जिसने नवदुर्गा और रुपाणा धाम प्लांट के इशारों पर बेखौफ होकर इस विनाशलीला को अंजाम दिया है। नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए ठेकेदार रोहतास नेहरा ने भारी मशीनों से प्राकृतिक जलस्रोत को पाट दिया और वहां उद्योगों से निकलने वाली जानलेवा राख को डंप कर दिया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इन औद्योगिक घरानों के लिए इंसानी जान और प्रकृति की कीमत उनके मुनाफे के आगे कौड़ी भर भी नहीं है। फ्लाई ऐश के सुरक्षित निपटान के वैज्ञानिक और कानूनी मापदंडों को ताक पर रखकर, इन कंपनियों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने और पैसा बचाने के लिए एक पूरे गांव के भविष्य को मौत के मुहाने पर धकेल दिया है।




