बीएस-4 और बीएस-6 डीजल वाहनों में यूरिया की अहम भूमिका, गुणवत्ताविहीन ऑटोमेटिव ग्रेड यूरिया का उपयोग वाहन मालिकों पर पड़ रहा भारी
रायगढ़/ बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और वाहनों से निकलने वाले हानिकारक धुएं को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने बीएस-4 और विशेष रूप से बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को लागू किया है। ऐसे ही एक फैक्ट्री अमलीभौना मार्ग में स्थित है।परन्तु यहाँ ख़रीदे गए ऑटोमेटिव ग्रेड यूरिया के वाहनों में उपयोग से न केवल वाहन खराब हो रहे है।बल्कि वाहन मालिकों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गौरतलब हो कि मानकों के तहत कई आधुनिक डीजल वाहनों में एससीआर तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में विशेष प्रकार के ऑटोमोटिव ग्रेड यूरिया सॉल्यूशन का उपयोग किया जाता है, जो नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों के उत्सर्जन को काफी हद तक कम करता है।विशेषज्ञों के अनुसार यह सामान्य कृषि में उपयोग होने वाला यूरिया नहीं होता, बल्कि लगभग 32.5 प्रतिशत उच्च शुद्धता वाले यूरिया और 67.5 प्रतिशत शुद्ध पानी का मिश्रण होता है। इसे वाहन के अलग टैंक में भरा जाता है, जहां से यह एग्जॉस्ट सिस्टम में नियंत्रित मात्रा में पहुंचकर हानिकारक गैसों को कम हानिकारक नाइट्रोजन और जलवाष्प में परिवर्तित करने में मदद करता है।स्थानीय अमलीभौना मार्ग में इसके निर्माण की फैक्ट्री मौजूद है।जहां से भारी वाहन चालक इसकी खरीदी कर भारी वाहनों के उपयोग करते है।परन्तु इस कारखाने से खरीदे गए यूरिया का उपयाेग वाहन मालिकों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।बताया जा रहा है कि इसके इस्तेमाल से वाहनों के ई जी आर खराब हो रहे है।जिसकी लगत 35 हजार रुपए के लगभग होती है।इसके अलावा इसका प्रभाव वाहनों के फिल्टर पर भी देखने को मिल रहा है।इस से इंजन की क्षमता प्रभावित हो रही है और कई वाहनों में सुरक्षा कारणों से इंजन की क्षमता भी घट रही है साथ ही वाहनों में स्टार्ट होने में भी समस्या देखने को मिल रही है।
गुणवत्ता परीक्षण के लिए मशीन नहीं उपलब्ध
अमलीभौना मार्ग में स्थित ऑटोमेटिव ग्रेड फैक्ट्री से खरीदे गए यूरिया के उपयोग से लगातार वाहनों में खराबी देखने को मिल रही है।जिसे लेकर भरी वाहनों के मालिकों द्वारा संस्थान के संचालक से गुणवत्ता परीक्षण की बात भी कही गई।परन्तु गुणवत्ता परीक्षण को लेकर जहां फैक्ट्री संचालक द्वारा हाथ खड़े कर दिए गए।वही मशीन की उपब्धता न होने का हवाला भी दिया जा रहा है।आखिर उस स्थिति में परीक्षण कैसे संभव है।ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन में निर्धारित मानकों के अनुरूप यूरिया का उपयोग नहीं किया जाता या उसमें मिलावट होती है, तो इससे एससीआर सिस्टम, इंजेक्टर, सेंसर और कैटेलिस्ट को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी डीजल वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप यूरिया सॉल्यूशन का उपयोग करें और समय-समय पर उसकी जांच कराते रहें, तो वाहनों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इससे वायु प्रदूषण घटेगा और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी कम होंगे।
वर्शन/इस संबंध में लिखित में शिकायत दीजिए।पर्यावरण विभाग से चर्चा कीजिए।
महेश शर्मा
एस डी एम




