Saturday, August 8, 2026
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अभिभावकों को नेतृत्व देने की पहल फिलहाल ठंडे बस्ते में, स्कूलों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की मंशा अधूरी

अभिभावकों को नेतृत्व देने की पहल फिलहाल ठंडे बस्ते में, स्कूलों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की मंशा अधूरी


लगातार दूसरी बार टला शाला प्रबंधन समिति गठन, शासन के नए निर्देश पर लगा ब्रेक

रायगढ़/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 12 जून को जारी निर्देश के अनुसार प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में नई नियमावली के तहत शाला प्रबंधन समिति का गठन किया जाना था। इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों के संचालन में अभिभावकों की भूमिका को मजबूत करना, विद्यालय प्रबंधन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्कूलों में राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना था। लेकिन शासन ने बाद में जारी निर्देश के माध्यम से समिति गठन की प्रक्रिया को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है और वर्तमान शाला प्रबंधन समितियों को यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी इसे फिलहाल मौखिक निर्देश बता रहे हैं, जिससे जिले में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

गौरतलब हो कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन रायगढ़ जिले के अनेक शासकीय विद्यालयों में नई शाला प्रबंधन समिति का गठन अब भी अधर में लटका हुआ है। शिक्षा विभाग की ओर से समिति गठन के लिए बैठक बुलाने के आदेश जारी किए गए, लेकिन अगले ही दिन स्थगन आदेश जारी कर दिया गया। लगातार दूसरी बार ऐसा होने से अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षा जगत में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इससे विद्यालयों में नई समिति के गठन की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई है।अभिभावकों का कहना है कि यदि शासन ने नई नियमावली लागू करने का निर्णय लिया था तो उसके अनुरूप समिति गठन भी समय पर होना चाहिए था। उनका सवाल है कि आखिर बार-बार बैठक स्थगित होने के पीछे प्रशासनिक असमंजस है, नई नियमावली को लेकर कोई व्यावहारिक कठिनाई है या फिर अन्य कोई कारण है। शिक्षा विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे स्थिति और अधिक भ्रमपूर्ण हो गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शाला प्रबंधन समिति विद्यालय के विकास कार्यों की निगरानी, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, संसाधनों के पारदर्शी उपयोग तथा पालकों और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। ऐसे में समिति गठन में लगातार हो रही देरी का असर विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।जिले के कई अभिभावक नई व्यवस्था को विद्यालयों के हित में मानते हैं। उनका कहना है कि यदि समिति का नेतृत्व सीधे अभिभावकों के हाथ में होगा तो विद्यालयों की वास्तविक समस्याएं अधिक प्रभावी ढंग से सामने आएंगी और उनके समाधान के लिए जवाबदेही भी बढ़ेगी। फिलहाल शासन के स्थगन आदेश के कारण जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में नई समिति गठन को लेकर संशय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और शासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

अभिभावकों को नेतृत्व मिलने से क्या होंगे लाभ

नई व्यवस्था के तहत शाला प्रबंधन समिति में अभिभावकों को प्रमुख जिम्मेदारी मिलने से विद्यालयों का संचालन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की उम्मीद थी। अभिभावक सीधे स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन, मूलभूत सुविधाओं तथा विकास कार्यों की निगरानी कर सकते थे। इससे विद्यालय और पालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होता तथा बच्चों की शिक्षा से जुड़े निर्णयों में वास्तविक हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित होती।

वर्शन/ शाला विकास प्रबंधन समिति गठन में अभिभावकों को प्राथमिकता दिए जाने के संबंध में अपने पूर्व के आदेश को शासन द्वारा न्याय आदेश मिलने तक स्थगित कर दिया गया है।फिलहाल स्थिति यथावत रखने मौखिक आदेश दिया गया है।
आलोक स्वर्णकार
डी एम सी
समग्र शिक्षा विभाग

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