बेरीवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिवस भगवान श्रीकृष्ण का मनाया गया जन्मोत्सव

जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है तब-तब भगवान धरती पर होते है अवतरित : पं. ओमप्रकाश शर्मा

गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार एवं श्रीराम-श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का हुआ भावपूर्ण वर्णन


रायगढ़। अग्रोहा भवन मंदिर चौक, रायगढ़ में बेरीवाल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ में कल बुधवार को कथा का चौथा दिन था । कथा व्यास पं. ओमप्रकाश शर्मा के मुखारविंद से श्रद्धालुओं को भगवान की रूप, गुण, धाम, लीलाओं एवं सनातन धर्म के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण श्रवण कराया। कथा के चौथे दिन गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार तथा श्रीराम-श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन विशेष आकर्षण रहा l परम पूज्य पं. ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। कथा व्यास ने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा।
श्री कृष्ण जन्मोत्सव ने भक्तों को किया भाव विभोर
कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा स्थल में उपस्थित श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग को सुनकर भावविभोर हो उठे। इस दौरान संगीतमय उत्सव मनाया गया प्रसाद का वितरण किया गया। कथा व्यास पं. ओम प्रकाश शर्मा ने भक्तों को अमृतमयी कथा का रसास्वादन कराते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, कारागार के दृश्य, वासुदेव द्वारा यमुना पार कर नंदगांव पहुंचने तथा भगवान की बाल लीलाओं का मनमोहक वर्णन किया I श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ जमकर उत्सव मनाया। सम्पूर्ण कथा स्थल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सात वर्षो में 32वीं कथा का कर रहे वाचन पं. ओम प्रकाश शर्मा
कथा व्यास पं. ओमप्रकाश शर्मा का जन्म 15 अक्टूबर 1984 को हुआ। वे रायगढ़ जिले के पुसौर तहसील अंतर्गत ग्राम बड़े हल्दी के निवासी हैं। इनके पिता स्व. गोकुल शर्मा एवं माता श्रीमती नलिनी शर्मा हैं। बाल्यकाल में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद माता नलिनी शर्मा ने ही उन्हें माता-पिता दोनों का स्नेह, प्रेरणा एवं धार्मिक संस्कार प्रदान किए l घर में मिले धार्मिक वातावरण और बचपन से ही भगवान की कथा-लीलाओं के श्रवण एवं अध्ययन ने उनके मन में आध्यात्मिक रुचि को और गहरा किया।इसी धार्मिक संस्कार और प्रभु की कृपा से पं. ओमप्रकाश शर्मा आज श्रीमद्भागवत कथा सहित विभिन्न धार्मिक कथाओं का वाचन कर रहे हैं। पिछले 7 वर्षों से वे कथा प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं तक सनातन धर्म, भक्ति और भगवान की लीलाओं का संदेश पहुंचा रहे हैं। अब तक वे 32 कथाओं का वाचन कर चुके हैं। उनका मानना है कि कथा-वाचन केवल एक कार्य नहीं, बल्कि भगवान की सेवा और समाज में धार्मिक संस्कारों के प्रसार का माध्यम है।
संगीत टीम भी बांध रही भक्ति का समां
कथा के दौरान भजनों एवं संगीतमय प्रस्तुतियों में देव सिदार सिंगर, मिनिकेतन मालाकार तबला वादक, हेमंत पाण्डेय एवं रोशन यादव अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं सुरेन्द्र महाराज द्वारा मंच संचालन किया जा रहा है l कथा स्थल की साज-सज्जा सीताराम साव द्वारा की जा रही है। वेदी पूजा के लिए आचार्य पं. अशोक नन्दे महाराज भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका जन्म 22 अप्रैल 1996 को ग्राम ओड़ेकेरा पुसौर में हुआ। उनके पिता चंदुलाल नन्दे एवं माता तेजकुमारी नन्दे हैं। उन्होंने बी.ए. फाइनल तक शिक्षा प्राप्त की है। आचार्य पं. अशोक नन्दे महाराज सभी पूजा पाठ करवाते है l उन्होंने श्रद्धालुओं को गौ सेवा एवं गौ रक्षा का संदेश देते हुए भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए गौ, गंगा और गीता के महिमा को जानने आग्रह किया है l
कथा के चौथे दिन होने वाले भगवान के अवतार एवं जन्मोत्सव के प्रसंगों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साहित व भाव विभोर दिखे l आयोजक परिवार के परसरामशम्भू दयाल बेरीवाल,प्रमोद कुमार, विनोद कुमार एवं समस्त बेरीवाल परिवार ने धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण एवं पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।




