Monday, August 3, 2026
Google search engine
HomeBlogरायगढ़ में फिर मालगाड़ियों को प्राथमिकता, आउटर में घंटों खड़ी रही सुपरफास्ट...

रायगढ़ में फिर मालगाड़ियों को प्राथमिकता, आउटर में घंटों खड़ी रही सुपरफास्ट ट्रेन, उत्कल एक्सप्रेस की चाल भी नहीं सुधरी

रायगढ़ में फिर मालगाड़ियों को प्राथमिकता, आउटर में घंटों खड़ी रही सुपरफास्ट ट्रेन, उत्कल एक्सप्रेस की चाल भी नहीं सुधरी


भुवनेश्वर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 2 घंटे 30 मिनट विलंब से पहुंची, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर उठे सवाल

रायगढ़। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायगढ़ स्टेशन पर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप एक बार फिर सामने आया है। शनिवार देर रात स्टेशन प्रबंधन की कार्यप्रणाली के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि मालगाड़ियों की आवाजाही को प्राथमिकता देने के चलते ट्रेन क्रमांक 12879 भुवनेश्वर सुपरफास्ट एक्सप्रेस को रायगढ़ स्टेशन के आउटर पर काफी देर तक रोककर रखा गया, जिससे ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब ढाई घंटे विलंब से स्टेशन पहुंची।

जानकारी के अनुसार, भुवनेश्वर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के रायगढ़ पहुंचने का निर्धारित समय रात 10:05 बजे है। चांपा से लगभग एक घंटे की देरी से चलने के कारण यात्रियों को उम्मीद थी कि ट्रेन करीब 11:05 बजे तक रायगढ़ पहुंच जाएगी। लेकिन स्टेशन में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने के कारण ट्रेन को रायगढ़ आउटर पर रोक दिया गया और अंततः यह रात 12:35 बजे स्टेशन पहुंच सकी। इस प्रकार ट्रेन निर्धारित समय से लगभग ढाई घंटे विलंब से रायगढ़ पहुंची।सूत्रों के मुताबिक, जिस समय सुपरफास्ट एक्सप्रेस स्टेशन पहुंचने वाली थी, उस दौरान रेलवे प्रशासन मालगाड़ियों के परिचालन को प्राथमिकता दे रहा था। इसी वजह से यात्री ट्रेन को आउटर सिग्नल पर रोककर इंतजार कराया गया। यात्रियों का कहना है कि यदि ट्रेन अपनी गति से चलकर समय पर रायगढ़ पहुंच सकती थी, तो स्टेशन में प्रवेश नहीं मिलने के कारण हुई यह अतिरिक्त देरी पूरी तरह परिचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि देर रात किसी भी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन को लंबे समय तक आउटर पर खड़ा रखना केवल यात्रियों की असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। आउटर पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में यात्रियों को लूटपाट, छीना-झपटी, असामाजिक तत्वों की गतिविधियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा संबंधी जोखिम, अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर चिकित्सा सहायता मिलने में विलंब तथा आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्य प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा बार-बार होने वाली ऐसी देरी से यात्रियों की आगे की कनेक्टिंग ट्रेनें और अन्य यात्रा कार्यक्रम भी प्रभावित होते हैं।

जवाबदेही से बचते है जिम्मेदार

इस मामले में रायगढ़ रेलवे प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए, जबकि कुछ अधिकारियों ने परिचालन संबंधी निर्णयों का हवाला देते हुए इसकी जिम्मेदारी बिलासपुर रेल मंडल के निर्देशों पर डाल दी। ऐसे में वास्तविक स्थिति क्या है और यात्री ट्रेनों की अपेक्षा मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने की नीति किन परिस्थितियों में अपनाई जाती है, इसका स्पष्ट जवाब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से ही मिल सकता है।

उत्कल एक्सप्रेस की चाल भी नहीं सुधरी

यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। ट्रेन क्रमांक 18478 उत्कल एक्सप्रेस भी रविवार को अपनी निर्धारित समय-सारिणी से काफी पीछे चलती रही। इस ट्रेन के रायगढ़ पहुंचने का निर्धारित समय दिन में 11:30 बजे है, लेकिन शाम 6:15 बजे तक भी ट्रेन स्टेशन नहीं पहुंच सकी। इसी प्रकार ट्रेन क्रमांक 22844 बिलासपुर–पटना (बक्सर मार्ग) एक्सप्रेस को दोपहर 3:00 बजे तक रायगढ़ पहुंचना था, लेकिन यह भी शाम 6:00 बजे तक ही स्टेशन पहुंच सकी। लगातार विलंब से चल रही यात्री ट्रेनों ने एक बार फिर रेलवे की परिचालन व्यवस्था और समयपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

spot_img
spot_img

JANKARM DAILY EPAPER

Recent Artical