2017 से पहले सरकारी जमीन पर बसे पात्र परिवारों को मिलेगा पट्टा, रायगढ़ जिले में सर्वे शुरू
15 अगस्त तक सर्वे पूरा करने के निर्देश, 3 लाख से कम आय वाले जरूरतमंद परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता
रायगढ़/छत्तीसगढ़ शासन ने शहरी क्षेत्रों में वर्षों से सरकारी भूमि पर निवास कर रहे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। शासन के निर्देश पर वर्ष 2017 से पहले से सरकारी भूमि पर निवासरत पात्र परिवारों को भूमि का पट्टा प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसी क्रम में रायगढ़ जिले में भी सर्वे कार्य शुरू हो गया है। राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए 15 अगस्त 2026 तक सर्वे कार्य पूर्ण करने के लिए कहा है, ताकि पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार कर आगे की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से की जा सके।
शासन के निर्देशानुसार सर्वे का कार्य नगरीय निकायों और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा। सर्वे के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित परिवार वर्ष 2017 से पहले से सरकारी भूमि पर निवास कर रहा है तथा शासन द्वारा निर्धारित सभी पात्रता शर्तों को पूरा करता है। सर्वे रिपोर्ट संचालक भू-अभिलेख को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर पात्र हितग्राहियों का अंतिम चयन कर उन्हें पट्टा प्रदान किया जाएगा।योजना के तहत नगर निगम क्षेत्रों में अधिकतम 600 वर्गफीट तथा नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में अधिकतम 800 वर्गफीट भूमि पर कब्जा रखने वाले परिवारों को ही पात्र माना जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक भूमि पर कब्जा अतिक्रमण की श्रेणी में माना जाएगा और ऐसे मामलों में पट्टा प्रदान नहीं किया जाएगा। शासन की मंशा वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को भूमि पर वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराना है, न कि बड़े पैमाने पर किए गए अतिक्रमण को वैध करना।शासन की नीति के अनुसार पात्र हितग्राहियों को प्रारंभिक रूप से 30 वर्षों के लिए पट्टा जारी किया जाएगा। निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद नियमानुसार इसका नवीनीकरण भी कराया जा सकेगा। इससे वर्षों से सरकारी भूमि पर रह रहे परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलने के साथ-साथ विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सुविधा होगी।
पात्रता के मापदंड तय
शासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कब्जाधारी इस योजना का लाभ लेने का पात्र नहीं होगा। जिन लोगों के पास पहले से स्वयं का मकान उपलब्ध है, तालाब, नाले, ग्रीन बेल्ट अथवा फुटपाथ पर अतिक्रमण किया गया है या जिनका कब्जा सार्वजनिक विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है, उन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
योजना में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई है। जिन हितग्राहियों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है तथा जो अपने निवास संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लाभ मिलेगा। वहीं यदि किसी व्यक्ति ने निवास के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य अथवा व्यावसायिक व्यवस्था के लिए सरकारी भूमि पर कब्जा किया है, तो उसे पट्टा वितरण के लिए अमान्य माना जाएगा।
वर्शन/2017 से पहले जिन लोगों का नजूल भूमि पर कब्जा है।उनका सर्वे कर पट्टा प्रदान किया जाएगा।नगर निगम क्षेत्र में 6 सौ स्क्वायर फीट एवं नगर पालिका क्षेत्र में 8 सौ स्क्वायर फीट कब्जे की भूमि ही पट्टा वितरण के लिए मान्य होगा।
महेश शर्मा
एस डी एम




