41 करोड़ की फोरलेन सड़क को मिली प्रशासनिक मंजूरी, लेकिन तब तक गड्ढों में हिचकोले खाने को मजबूर शहरवासी
कोतरा रोड–ढिमरापुर चौक मार्ग बारिश में बना मुसीबत का सफर, डस्ट गिट्टी बिछाने का अस्थायी इंतजाम भी हुआ बेअसर, निर्माण तक आफ़त में जान
रायगढ़/ शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल कोतरा रोड से ढिमरापुर चौक तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण का रास्ता भले ही प्रशासनिक स्तर पर साफ हो गया हो, लेकिन मौजूदा समय में इस मार्ग से गुजरना हजारों वाहन चालकों और राहगीरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। करीब 4.125 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन मार्ग के निर्माण के लिए 41 करोड़ 38 लाख 56 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इससे लंबे समय से नई सड़क की मांग कर रहे लोगों में उम्मीद तो जगी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के बीच फिलहाल निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है।
गौरतलब हो कि बारिश से पहले इस मार्ग की जर्जर स्थिति को देखते हुए करीब सप्ताहभर पूर्व सड़क पर कंपनी का डस्ट डालकर गड्ढों को भरने और यातायात सुचारू रखने का प्रयास किया गया था। हालांकि यह व्यवस्था पहली ही तेज बारिश में पूरी तरह बह गई। परिणामस्वरूप सड़क पहले से भी अधिक ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक हो गई है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे वाहन चालक हर पल दुर्घटना की आशंका के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
यह मार्ग शहर को औद्योगिक क्षेत्र, ढिमरापुर, कोतरा रोड तथा आसपास के ग्रामीण अंचलों से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में भारी वाहन, बसें, स्कूल वाहन, दोपहिया और चारपहिया वाहन इसी सड़क से गुजरते हैं। लेकिन सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों को हर कुछ मीटर पर ब्रेक लगाना पड़ रहा है। दोपहिया सवारों के लिए तो यह मार्ग सबसे अधिक जोखिम भरा साबित हो रहा है। पानी से भरे गड्ढों की गहराई का अनुमान नहीं लग पाने से वाहन असंतुलित हो रहे हैं और फिसलने की घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।भारी वाहनों के गुजरने से गड्ढों में भरा पानी उछलकर आसपास चल रहे राहगीरों और छोटे वाहनों पर गिरता है। वहीं सड़क पर लगातार झटके लगने से चारपहिया वाहनों के सस्पेंशन, टायर और अन्य पुर्जों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। वाहन मालिकों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण उन्हें बार-बार वाहन की मरम्मत करानी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
निर्माण तक आफ़त में जान
स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन सड़क की स्वीकृति निश्चित रूप से शहर के लिए बड़ी सौगात है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने तक इस मार्ग को सुरक्षित और चलने योग्य बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि बारिश के दौरान प्रभावी अस्थायी मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाएगी।




