रायगढ़ इस्पात प्लांट में फर्नेस ब्लास्ट, चार मजदूर झुलसे
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, औद्योगिक हादसों से नहीं ले रहे सबक उद्योग, श्रमिकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान
रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्र गेरवानी स्थित रायगढ़ इस्पात प्लांट में मंगलवार को हुए फर्नेस ब्लास्ट ने एक बार फिर उद्योगों में श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। हादसे में चार मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए रायगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घायलों में अमरेश कुमार, रामनाथ सूर्यवंशी, फिरोज आलम खान सहित एक अन्य श्रमिक शामिल हैं। सभी का उपचार जारी है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार फर्नेस संचालन के दौरान अचानक विस्फोट हुआ, जिसकी चपेट में आकर मजदूर झुलस गए। घटना के बाद प्लांट प्रबंधन ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए मामले को सामान्य बताने का प्रयास किया, लेकिन चार श्रमिकों के घायल होने की घटना सुरक्षा प्रबंधन की गंभीर खामियों की ओर इशारा कर रही है।हादसे की सूचना मिलते ही पूंजीपथरा पुलिस तथा औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौके के लिए रवाना हुए। विभागीय स्तर पर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्नेस संचालन के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं तथा श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।रायगढ़ जिला प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र माना जाता है, लेकिन यहां समय-समय पर होने वाले औद्योगिक हादसे उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े करते रहे हैं। बीते वर्षों में कई स्टील एवं स्पंज आयरन संयंत्रों में बॉयलर विस्फोट, ऊंचाई से गिरने तथा फर्नेस दुर्घटनाओं के मामले सामने आ चुके हैं। कई घटनाओं में श्रमिकों की जान तक जा चुकी है, जबकि दर्जनों मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।इसके बावजूद उद्योगों में सुरक्षा ,मशीनों के नियमित रखरखाव, आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था तथा श्रमिकों को सुरक्षा प्रशिक्षण देने के दावों की वास्तविकता अक्सर हादसों के बाद ही सामने आती है।
श्रमिकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान
यदि उद्योगों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है, तो फिर इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत हजारों मजदूर प्रतिदिन जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं और ऐसे हादसे उनके जीवन पर बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं।
अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर अन्य औद्योगिक हादसों की तरह यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। फिलहाल चार श्रमिको का अस्पताल में उपचार जारी है।
जबकि घटना ने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।




