लखनऊ अग्निकांड से सबक : रायगढ़ में उद्योगों के साथ व्यावसायिक परिसरों की भी हो सुरक्षा जांच
✒️✒️संजय पल्लू बेरीवाल✒️✒️

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस दर्दनाक घटना में कई लोगों की जान चली गई और अनेक परिवारों का जीवन हमेशा के लिए बदल गया। यह हादसा केवल उत्तर प्रदेश या लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक शहर और औद्योगिक जिले के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
रायगढ़ जिला देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में स्टील, पावर, स्पंज आयरन और अन्य उद्योग संचालित हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले में औद्योगिक दुर्घटनाओं और आगजनी की भीषण घटनाएं भी सामने आती रही हैं। अभी हाल ही के दिनों में छातामुड़ा चौक पर एक भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था वह तो बहुत अच्छी किस्मत थी कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इन सब से सबक लेते हुए प्रशासन और उद्योग प्रबंधन को सुरक्षा मानकों की समीक्षा करते रहना चाहिए।
खतरा केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। रायगढ़ और जिले के अन्य नगरों में तेजी से बड़े-बड़े व्यावसायिक परिसर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, निजी अस्पताल, हॉस्टल होटल, बैंक, मैरिज पैलेस, कोचिंग संस्थान, बहुमंजिला इमारतें और सार्वजनिक उपयोग के भवन विकसित हो रहे हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। यदि किसी भवन में आग लग जाए या कोई अन्य आपदा आ जाए तो बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
व्यावसायिक परिसरों पर भी विशेष ध्यान जरूरी
अक्सर देखा जाता है कि कई व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन यंत्र तो लगे होते हैं, लेकिन वे समय पर परीक्षण और रखरखाव के अभाव में उपयोग योग्य नहीं रहते। कई भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग पर्याप्त नहीं होते या फिर उनका उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जाता है। कई स्थानों पर विद्युत तारों का जाल, अव्यवस्थित पार्किंग और भीड़भाड़ किसी भी दुर्घटना को और गंभीर बना सकती है।
रायगढ़ जिले में प्रशासन को उद्योगों के साथ-साथ सभी बड़े व्यावसायिक परिसरों, अस्पतालों, स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, होटल, मैरिज गार्डन और बहुमंजिला इमारतों का भी व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए। केवल कागजी जांच नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति का भौतिक निरीक्षण किया जाना आवश्यक है।
सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार क्षेत्र, सिनेमा हॉल, सामुदायिक भवन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी प्रतिदिन हजारों लोग एकत्रित होते हैं। इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन योजना की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था पहले से तैयार रहनी चाहिए।
प्रशासन और प्रबंधन की संयुक्त जिम्मेदारी
सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। उद्योग प्रबंधन, भवन संचालक, व्यवसायी और संस्थान प्रमुखों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके परिसर में सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो। नियमित मॉक ड्रिल, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और उपकरणों की समय-समय पर जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।
समय रहते चेत जाए रायगढ़
लखनऊ का अग्निकांड एक चेतावनी है कि दुर्घटनाएं कभी बताकर नहीं आतीं। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई तो किसी भी उद्योग, व्यावसायिक परिसर या सार्वजनिक भवन में बड़ा हादसा हो सकता है। रायगढ़ में प्रशासन को उद्योगों के साथ-साथ सभी प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा जांच का विशेष अभियान चलाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित त्रासदी को रोका जा सके।
विकास तभी सार्थक है जब उसके केंद्र में मानव जीवन की सुरक्षा हो। लखनऊ की घटना से सबक लेते हुए रायगढ़ को आज ही सतर्क और तैयार होने की आवश्यकता है।




