स्कूल या फ्लाईऐश डंपिंग यार्ड? चैतन्य टेक्नो स्कूल में बच्चों की सेहत से बड़ा खिलवाड़


खेल मैदान से लेकर भवन परिसर तक फैली काली राख, प्रदूषण नियमों की उड़ाई धज्जियां


रायगढ़/एक ओर अभिभावक बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ निजी शिक्षण संस्थानों में प्रबंधन की गंभीर लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। ऐसा ही एक चिंताजनक मामला उड़ीसा–गढ़उमरिया मार्ग स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल परिसर में सामने आया है, जहां पूरे परिसर में फैली फ्लाईऐश (राख) न सिर्फ नियमों की खुलेआम अनदेखी को उजागर कर रही है, बल्कि छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा बन गई है।
स्कूल परिसर बना फ्लाईऐश का डंपिंग यार्ड
गौरतलब हो कि गडऊमरिया मार्ग स्थित चैतन्य टेक्नो स्कूल परिसर इन दिनों फ्लाईऐश डंपिंग यार्ड बना नजर आ रहा है।जहां के खेल मैदान, खुले परिसर और आसपास के हिस्सों में बड़ी मात्रा में काली राख फ्लाईऐश बिछी हुई है। यही नहीं, परिसर के भीतर और भवन के आसपास भी राख फैली हुई है, जहां बच्चे प्रतिदिन खेलते, दौड़ते और शारीरिक गतिविधियां करते हैं। हवा के साथ उड़ने वाली यह राख बच्चों के फेफड़ों, आंखों और त्वचा के लिए बेहद घातक मानी जाती है।चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार फ्लाईऐश में सिलिका, एल्यूमिनियम, आयरन और अन्य हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस संबंधी बीमारियां,एलर्जी,आंखों में जलन,त्वचा रोग और बच्चों में फेफड़ों के विकास पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों पर इसका प्रभाव कहीं अधिक गंभीर होता है।
नियमों की खुली अनदेखी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार फ्लाईऐश का उपयोग या भंडारण खुले में, विशेषकर आवासीय और शैक्षणिक परिसरों में, प्रतिबंधित है।और यह स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्यकर वातावरण उपलब्ध कराया जाए। लेकिन चैतन्य स्कूल परिसर की स्थिति इन सभी नियमों को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है।हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद स्कूल प्रबंधन द्वारा न तो फ्लाईऐश हटाने की ठोस पहल की गई और न ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। वहीं, यह पूरा मामला जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की उदासीनता को भी उजागर करता है।
प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रशासन की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर स्कूल परिसर में फ्लाईऐश फैलाया गया, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?
अब देखना लाजमी होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले की भी अनदेखी कर उन्हें खतरे में डाला जाएगा।
वर्शन/ स्कूल परिसर में फ्लाईऐश बिछाए जाने को लेकर स्कूल प्रबंधन को फटकार लगाई गई है।दो दिनों के भीतर व्यवस्था के सुधार करने निर्देश दिए गए है।
के व्ही राव
जिला शिक्षाधिकारी




