200 करोड़ की अमृत मिशन योजना पर उठे सवाल, 24 घंटे जलापूर्ति का दावा हवा-हवाई
वार्ड 14 और 16 में महज 20 मिनट मिल रहा पानी,लोग हो रहे हलाकान
रायगढ़/ शहर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से लागू की गई अमृत मिशन पेयजल योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर तक नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना था। योजना के शुभारंभ के समय नगरवासियों को 24 घंटे जलापूर्ति, बेहतर वितरण व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत पेयजल नेटवर्क का भरोसा दिलाया गया था। लेकिन धरातल पर हालात इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। शहर के वार्ड क्रमांक 14 और 16 में लोग आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं। स्थिति यह है कि अमृत मिशन के तहत कई क्षेत्रों में प्रतिदिन केवल लगभग 20 मिनट ही पानी की आपूर्ति हो रही है, जो सामान्य परिवारों की दैनिक आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
गौरतलब हो कि अमृत मिशन लागू होने के बाद नगर निगम ने पहले से संचालित बोर पंपों के माध्यम से होने वाली जलापूर्ति की पाइप लाइनों को अलग कर दिया था। उस समय यह भरोसा दिया गया था कि अब नई योजना के माध्यम से पर्याप्त और नियमित पानी मिलेगा। लेकिन अब अमृत मिशन से भी पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही है। नतीजतन कई परिवार दोबारा निगम के बोर पंपों से पाइप लाइन जोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, ताकि किसी तरह घरेलू जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था हो सके। इससे योजना की कार्यप्रणाली और उसकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।मोहल्लेवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। वार्डवासियों ने नगर निगम में कई बार शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं, राज्य सरकार के सुशासन तिहार के दौरान आयोजित शिविर में भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया और लिखित शिकायत सौंपी गई। इसके बावजूद तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत के लगभग डेढ़ महीने बाद निगम की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई और मौके पर वास्तविक समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। जांच के बाद भी जलापूर्ति की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।वार्डवासियों का कहना है कि निगम के जिम्मेदार अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि अमृत मिशन के तहत पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। लोगों का आरोप है कि पानी की कमी और अनियमित आपूर्ति के पीछे तकनीकी खामियों तथा वितरण व्यवस्था की कमियों को दूर करने के बजाय अधिकारियों द्वारा होने वाली बिजली आपूर्ति में व्यवधान का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है। यदि बिजली आपूर्ति ही मुख्य कारण है तो उसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
लगत करोड़ो में सुविधा बस नाम की
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई किसी भी पेयजल परियोजना का मूल्यांकन केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली वास्तविक सुविधा से होता है। यदि योजना के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है और वे पुराने बोर पंपों पर निर्भर होने को विवश हैं, तो यह योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और रखरखाव पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।अमृत मिशन योजना की संपूर्ण तकनीकी समीक्षा कर जलापूर्ति में आ रही बाधा को दूर करना निगम की महती जिम्मेदारी है।ताकि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई योजना वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर सके और लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए रोजाना संघर्ष न करना पड़े।
क्या कहते है अधिकारी और मोहल्लेवासी
वर्शन/ अमृत मिशन से सुबह 1 घंटे पानी की सप्लाई हो रही है।शाम की पानी सप्लाई में विद्युत समस्या की वजह से स्थिति थोड़ी बिगड़ती है।ओवर हेड टैंक के माध्यम से पेयजल सप्लाई होती है।बिजली आपूर्ति बाधित होने से व्यवधान होता है।
सूरज देवांगन
सब इंजीनियर
प्रभारी जल विभाग
नगर निगम
इस संबंध में वार्डवासी लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि अमृत मिशन से पानी सप्लाई में हो रही समस्या की शिकायत उनके द्वारा निगम सहित सुशासन तिहार शिविर में भी की गई थी।जिसके डेढ़ माह बाद निगम के जल विभाग की टीम पहुंची।और औपचारिकता निभाकर चली गई।स्थिति आज भी पेयजल सप्लाई को लेकर जस की तस बनी हुई है।
वार्ड क्रमांक 16 के रहवासी अभिषेक पांडे बताते है कि अमृत मिशन से महज 15 से 20 मिनट ही घरों में पानी की सप्लाई हो रही है।जो किसी भी लिहाज से एक पूरे परिवार के दिनभर उपयोग हेतु पर्याप्त नहीं है।पूर्व में बोर कनेक्शन के माध्यम से पर्याप्त पानी मिलता था।अब तो बोर कनेक्शन भी हटा दिया गया है।
वार्डवासी सुभाष मजूमदार बताते है कि अमृत मिशन योजना में 24 घंटे पानी सप्लाई की बात कही गई थी।जो पूर्ण रूप से गलत साबित हुई है। लाईट गोल होने की स्थिति में तो मोहल्लेवासी बंद बंद पानी को हलाकान होते है।




