ऑडिट में पिछड़ी पंचायतें, जनपद में 6 की रिपोर्ट लंबित, कम बजट और देर से राशि मिलने से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित
रायगढ़/जनपद अंतर्गत शामिल 84 ग्राम पंचायतों में 14 वे वित्त आयोग को लेकर अब भी 6 ग्राम पंचायतों की ऑडिट अधूरी है।जिनमें भानपुर,नौरंगपुर, लाखा,नवागांव, कोयलंगा सहित देलारी का नाम शामिल है।पेंडिंग ऑडिट रिपोर्ट को लेकर जनपद सी ई ओ द्वारा शेष सभी पंचायतों को मार्च अंत के पूर्व आडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देशित किया गया है।पंचायतों को प्राप्त शासकीय राशि के सही उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट बेहद आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है। इसके माध्यम से जहां विकास कार्यों में खर्च की जांच होती है, वहीं अनियमितताओं पर रोक लगाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी मार्ग प्रशस्त होता है।
पंचायतों में विकास की राशि ऊट के मुंह में जीरा
गौरतलब है कि शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को उनकी जनसंख्या और भौगोलिक आकार के आधार पर वित्तीय राशि आवंटित की जाती है। यह राशि सामान्यतः न्यूनतम लगभग 3 लाख रुपए या उससे अधिक हो सकती है। वहीं, मूलभूत आवश्यकताओं के लिए पंचायतों को औसतन 20 से 30 हजार रुपए तक की सीमित राशि ही उपलब्ध कराई जाती है। जिसकी वास्तविक स्थिति यह है कि इतनी अल्प राशि में ग्राम पंचायतों के समग्र अधोसंरचना विकास की कल्पना भी कठिन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस राशि से कई पंचायतों में गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था तक सुचारू रूप से बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।ऐसे में सवाल उठता है कि जब मूलभूत जरूरतें ही पूरी नहीं हो पा रहीं, तो सड़क, बिजली, स्वच्छता और अन्य विकास कार्यों के लिए आवश्यक अतिरिक्त संसाधन आखिर कहां से जुटाए जाएं। यही कारण है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्य अक्सर अधूरे रह जाते हैं या उनकी गति बेहद धीमी बनी रहती है।
15 वे वित्त की राशि सालभर बाद
ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न हुए लगभग एक वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन अधिकांश पंचायतों को 15वें वित्त आयोग की राशि हाल ही में, बीते सप्ताह के दौरान ही प्राप्त हो सकी है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि क्या बीते पूरे साल पंचायतों में वित्तीय संसाधनों के अभाव में विकास कार्य ठप पड़े रहे।जानकारी के अनुसार, पंचायत स्तर पर कई छोटे-बड़े कार्य जैसे पेयजल व्यवस्था, नाली निर्माण, मरम्मत कार्य और स्वच्छता संबंधी गतिविधियां नियमित फंड पर निर्भर रहती हैं। समय पर राशि उपलब्ध न होने से इन कार्यों की गति प्रभावित होना तय माना जाता है।राशि आवंटन में देरी के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाएं, तकनीकी स्वीकृतियां, उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा विभिन्न स्तरों पर फाइलों की स्वीकृति में लगने वाला समय प्रमुख कारण बताए जाते हैं। हालांकि, इस देरी का सीधा असर ग्रामीण विकास की रफ्तार पर पड़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में में बाधा उत्पन्न होती है।
वर्शन/ 6 ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट आने शेष है।इन सभी पंचायतों को निर्धारित अवधि में ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देश दिए गए है।फरवरी के अंत तक रिपोर्ट पूरी करवा लीं जाएगी।
सनत नायक
सी ई ओ
जनपद रायगढ़




