औद्योगिक धुएं से जहरीली होती हवा,मापक यंत्र भी हो रहे खराब, जिले में पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा बेहिसाब
रायगढ़। जिले में पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। औद्योगिक गतिविधियों, खनन परिवहन और शहरी लापरवाहियों के चलते वायु गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में प्रदूषण स्तर सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है।खबर के मुताबिक रायगढ़ जिले और इसके आसपास स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है। पर्यावरणीय नियमों के बावजूद कई उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का समुचित और नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा। इसके अलावा खुले वाहनों से कोयला, राख, लौह अयस्क और अन्य औद्योगिक सामग्री का परिवहन भी हवा में धूलकणों की मात्रा बढ़ा रहा है, जिससे वातावरण और अधिक जहरीला होता जा रहा है।
प्रदूषण मापक यंत्र के मेंटेनेंस का अभाव
विदित हो कि जिले में प्रदूषण स्तर मापने मापक यंत्र लगाए गए है।जिनके रखरखाव का ठेका 5 वर्षों तक एक निजी कंपनी का है।परन्तु नियमित मेंटेनेंस के अभाव में भी ये मशीन बंद नजर आई है।ऐसा ही हाल शहर कलेक्ट्रेड एवं पर्यावरण विभाग के बाहर स्थापित प्रदूषण मापक यंत्र में भी देखने को मिला।जो लगातार बढ़ते प्रदूषण जैसी स्थिति में भी बंद नजर आए।हालांकि इन्हें चालू करवाने कारीगर तो भेजा गया है।परन्तु यंत्रों के सुधार नहीं हो सका था।
बढ़ते प्रदूषण स्तर से बढ़ता खतरा
गौरतलब हो कि खुले में कचरा जलाना, सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। खासकर शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में सुबह-शाम धुंध की स्थिति देखी जा रही है, जो बढ़ते प्रदूषण का संकेत है।पर्यावरण जानकारों के अनुसार रायगढ़ के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच रहा है। यह स्तर लंबे समय तक बना रहने पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। धूलकण (PM 2.5 और PM 10) की अधिकता के कारण सांस संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
डॉक्टरों की मानें तो बढ़ता प्रदूषण सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और दमा व हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए खतरनाक है। जिले के अस्पतालों में सांस फूलना, खांसी, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। चिकित्सकों ने लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, मास्क के उपयोग और घरों में गीले कपड़े से नियमित सफाई करने की सलाह दी है।
प्रशासनिक दावे बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा समय-समय पर निगरानी और कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर सीमित नजर आता है। न तो खुले में कचरा जलाने पर सख्ती दिखाई दे रही है और न ही औद्योगिक इकाइयों की नियमित व प्रभावी जांच हो पा रही है। यदि समय रहते ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में रायगढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। हरित क्षेत्र बढ़ाने, सड़कों की नियमित सफाई, उद्योगों पर सख्त निगरानी, खुले परिवहन पर रोक, सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन देने और नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने से ही प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
वर्शन/ जिले में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से लोगों के सांस की बीमारी सहित लंग और त्वचा के कैंसर की संभावना बढ़ चुकी है।यही नहीं किडनी,लीवर के साथ नाखून से लेकर बालों के भी इसका विपरीत असर देखने को मिल रहा है। यहां तक कि बच्चों में होने वाली सर्दी जुकाम की बीमारी में महीने भर तक सुधार नहीं हो पाता है।

डॉक्टर राजू अग्रवाल
वर्शन/जिले में प्रदूषण मापक रिप्ले बोर्ड का मेंटेनेंस बराबर नहीं किया जा रहा है।जिसके कारण इसकी वास्तविक स्थिति पता नहीं चल पाती है।वर्तमान में तमनार सबसे अधिक प्रदूषण वाला क्षेत्र है

राजेश त्रिपाठी
आर टी आई कार्यकर्ता




