पुसौर क्षेत्र में भाजपा के पितृपुरूश कहे जाने वाले बेलाल गुप्ता का निधन
उन दिनों जब देष व देष के सभी राज्य सहित स्थानीय षासन में भी कांग्रेस का बोल बाला था और संसद में मात्र भाजपा के दो सांसद थे उस समय भाजपा को पैर जमाने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पडा होगा और उसमें खास कर उन कार्यकर्ताओं को जिन्हौने भाजपा को सिद्धांतों को अंगीकार कर जनता को भजपा के पक्ष में समझाने में का प्रयास किया इसको समझा जा सकता है। पुसौर अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में उस फेहरिस्त में बेलाल गुप्ता का नाम पहले पायदान में लिया जाता है जो नींव के पत्थर साबित हुये वहीं उन्हें इस क्षेत्र के लिये भाजपा का पितृपुरूश कहे जाने से षायद कोई अतिषयोक्ति नहीं होगी। इस तथ्य की पुश्टी इस आषय से भी किया जा सकता है चूंकि गांव के नामवर गौटिया लोग प्रायः कांग्रेस के दामन थामते हुये षासन पक्ष में रहे और अपनी राजनीति चमकाते रहे वहीं बेलाल गुप्ता गौटिया परिवार के होने के बाद भी भाजपा के सिद्धांतों पर लोगों को जोडा, कार्यकर्ताओं में इजाफा हुआ और इसी क्रम में षायद देष के सभी हिस्सों में हुआ होगा इसलिये क्रमषः केन्द्र और राज्य के साथ साथ स्थानीय षासनों में भगवा झंडा लहरा रहा है। ज्ञात हो कि इनके परिवार के लोग भी कांग्रेस में रहे और बहुसंख्यक कांग्रेस जन इन्हें कई तरह के उलाहने भी देते रहे कि कब भाजपा का सरकार बनेगा जो आप लोगों को जोड रहे हो इसके बावजुद भी बेलाल गुप्ता और भाजपा से जुडे रहे, हार नहीं माने और लगातार प्रयास करते रहे।
कभी पद की लालसा नहीं रही बेलाल गुप्ता को:-
संगठन अथवा किसी प्रषासनिक पद के लिये बेलाल गुप्ता ने लालसा नहीं रखी और नहीं चुनाव लडने के लिये इन्हौने कोई मंषा जाहिर किया, उनका एक लक्ष्य था कि किसी भी तरह भाजपा का परचम लहराये। इस आषय से भाजपा संगठन का जो भी आदेष होता था उस पर ये कार्य करते थे। जब पुसौर क्षेत्र सरिया विधानसभा क्षेत्र में आता था उस समय कांग्रेस के विधायक कमला देवी सिंह रहती थी जिनके प्रचार के लिये लोग क्षेत्र के गौटिया व प्रभावी लोग आया करते थे वहीं डाॅ. षक्राजित नायक भाजपा से चुनाव लडते थे जिसमें ये स्वयं के खर्चे से चुनाव प्रचार के लिये जाते थे। रायगढ विधान सभा से जुडने के बाद रोषन अग्रवाल, विजय अग्रवाल सहित अन्य भाजपा के षिर्शस्थ पदाधिकारी इनसे चुनावी रणनीति के लिये मार्गदर्षन लिया करते थे जिसके फलस्वरूप पुसौर क्षेत्र में भाजपा को क्रमषः बढत मिलने की बात कही जाती है।
93 वर्श में अधिक उम्रदराज होने के कारण हुआ इनका देहावसानः-
बेलाल गुप्ता के दो पुत्र में से छोटा पुत्र राजकुमार गुप्ता के निधन से यह मानसिक रूप से कमजोर रहे इसके पष्चात् कुछ दिन बाद इनकी धर्म पत्नि की भी मृत्यु हो गई जिससे ये और कमजोर हो गये और इनका कान तथा आंख दोनों जबाब दे गया बावजुद इसके इन्हौने धैर्य के साथ जीवन यापन करने में कामयाब रहे। परिवार जन इस बिच आये दिन उनका पुछ परख व देखभाल भी किये लेकिन जो फरा सो झरा के समीकरण में अंततः बिते 25 दिसम्बर के रात लगभग 12 बजे इन्हौने अपनी अंतिम सांस लिया और सुबह उनके अंतिम संस्कार नगर के अध्यक्ष प्रतिनिधि मोहित सतपथी उपाध्यक्ष उमेष साव, पुर्व अध्यक्ष रितेष थवाईत, पुर्व जनपद सदस्य एवं सोसायटी अध्यक्ष दधिबामन साव, नगर के पार्शद गण सहित उनके परिजनों की उपस्थिति में हुआ। ज्ञात हो कि बेलाल गुप्ता वार्ड क्रमांक 13 के निवासी रहे इस वार्ड के पार्शद उपाध्यक्ष उमेष साव ने इनके निधन पर गहरा षोक व्यक्त करते हुये कहा कि अंतिम संस्कार हेतु मुक्तिधाम ले जाते समय बाजा गाजा के साथ सम्मान का वातावरण निर्मित रहा इस बिच कईयों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।




