Monday, March 2, 2026
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सात दिनों में कभी निर्धारित समय पर नहीं पहुंची शताब्दी ट्रेन

सात दिनों में कभी निर्धारित समय पर नहीं पहुंची शताब्दी ट्रेन, घंटों लेटलतफी यात्रियों को कर रही हलाकान,रेल्वे परिचालन सुधारने फेल

रायगढ़/ जिले में रेल यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो जब प्रमुख यात्री ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर रायगढ़ स्टेशन पहुंची हों। ट्रेनों की लेटलतीफी अब सामान्य स्थिति बन चुकी है, जिससे यात्रियों को घंटों प्लेटफार्म पर इंतजार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।जानकारी के अनुसार, जनशताब्दी एक्सप्रेस सप्ताहभर में एक भी दिन समय पर नहीं पहुंच सकी। वहीं शालीमार-कुर्ला एक्सप्रेस, जिसका रायगढ़ पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 7:10 बजे है, वह कई बार दोपहर 1 बजे तक भी नहीं पहुंची। हावड़ा-पुणे मेल अपने तय समय सुबह 6:45 बजे के बजाय करीब 6 घंटे की देरी से पहुंची, जिससे यात्री प्लेटफार्म पर परेशान होते नजर आए। इसी तरह अहमदाबाद सुपरफास्ट भी सुबह 8:40 बजे के निर्धारित समय के बजाय दोपहर बाद स्टेशन पहुंची।

मालगाड़ियों को प्राथमिकता, यात्री ट्रेनें प्रभावित

गौरतलब हो कि इस अव्यवस्था की बड़ी वजह मालगाड़ियों को दी जा रही प्राथमिकता है। रायगढ़ और आसपास का क्षेत्र कोयला एवं खनिज संपदा से समृद्ध है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालगाड़ियां कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों का परिवहन करती हैं। इन मालगाड़ियों को बेरोक टोक परिचालन में कई मर्तबे यात्री ट्रेनों को ही आउटर में खड़ी कर दी जाती है।इस कारण यात्री ट्रेनों का समय पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और देरी का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। माल परिवहन से रेलवे को अधिक राजस्व प्राप्त होता है, जिसके चलते यात्री सुविधाएं कहीं न कहीं पीछे छूटती नजर आ रही हैं।

करोड़ों खर्च के बावजूद व्यवस्था पटरी से उतरी

एक ओर रेलवे द्वारा स्टेशनों के रखरखाव और आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा। यात्रियों का कहना है कि जब ट्रेनें समय पर ही नहीं चलेंगी तो बेहतर स्टेशन सुविधाओं का लाभ भी अधूरा ही रहेगा।लगातार हो रही देरी से यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। दैनिक यात्री, नौकरीपेशा लोग और छात्र सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी दिनचर्या पूरी तरह ट्रेनों के समय पर निर्भर रहती है।बहरहाल रेलवे द्वारा यात्री ट्रेनों की सुविधाओं मद किया जा रहा विस्तार किसी भी लिहाज से पर्याप्त साबित नहीं हो रहा।और रेल्वे का पूरा ध्यान मालवाहक ट्रेनों पर ही नजर आ रहा है।

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