ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आश्रय गृह बदहाली का शिकार, उद्देश्य से भटका करोड़ों का ढांचा, भवन हो रहा बेकार
रायगढ़/शहर के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए बनाए गए आश्रय गृह की हालत इसकी घोर उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रही है। लाखों रुपये की लागत से निर्मित यह भवन आज अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। जहां एक ओर आश्रय गृह के भीतर अव्यवस्था, गंदगी और जर्जर हालात हैं, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों के लिए यह सुविधा कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है।

कचरा और गंदगी बता रहे अनदेखी
गौरतलब हो कि आश्रय गृह के अंदरूनी हिस्सों में जगह-जगह कचरा बिखरा हुआ है। खाली कमरों में धूल जमी हुई है, टूटी-फूटी दीवारें और उखड़ता प्लास्टर भवन की बदहाली को उजागर करता है। कोनों में फेंका गया कचरा, पुराने सामान, खाली सिलेंडर और अनुपयोगी सामग्री यह बताने के लिए काफी है कि यहां लंबे समय से न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही किसी तरह की देखरेख। बैठने और ठहरने के लिए बनाए गए ढांचे अनुपयोगी पड़े हैं ।जबकि पंखे और अन्य सुविधाएं भी शोपीस बनकर रह गई हैं।

नहीं हुई उद्देश्य की पूर्ति
विदित हो कि आश्रय गृह का उद्देश्य शहर में रहने वाले बेघर, असहाय, बुजुर्ग, मजदूर और मजबूरी में सड़कों पर रात गुजारने वालों को सुरक्षित ठिकाना देना था। यहां उन्हें छत, साफ-सुथरा वातावरण, पेयजल, शौचालय और आराम की सुविधा मिलनी थी। सर्दी, गर्मी और बारिश में यह आश्रय गृह उनके लिए राहत का केंद्र बन सकता था। इसके माध्यम से न केवल मानवीय सरोकार पूरे होते, बल्कि शहर को भी सड़क किनारे रहने वाले लोगों की समस्या से राहत मिलती।हकीकत यह है कि समुचित संचालन और निगरानी के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते न तो यहां नियमित रूप से जरूरतमंदों को ठहराया जा रहा है और न ही रख-रखाव पर ध्यान दिया जा रहा है। नतीजतन, सरकारी धन से बना यह भवन धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार
शासन द्वारा बेघरों के लिए इतनी उपयोगी योजना बनाई गई थी, तो उसके संचालन में लापरवाही क्यों बरती जा रही है। आश्रय गृह की वर्तमान स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इसके रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी किसकी है और क्यों जरूरतमंद आज भी सड़कों पर सोने को मजबूर हैं।जरूरत इस बात की है कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस आश्रय गृह की सुध लें। नियमित सफाई, मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और जरूरतमंदों तक पहुंच बनाकर ही इस योजना को सार्थक किया जा सकता है। अन्यथा लाखों रुपये खर्च कर बना यह आश्रय गृह महज एक उपेक्षित इमारत बनकर रह जाएगा, जो शासन की नीयत और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता रहेगा।




