मौनतीर्थ पीठ उज्जैन के वार्षिक अधिवेशन मे रायगढ़ की श्रीमती रीता श्रीवास्तव को उत्कृष्ट शिक्षक का मिला शिक्षाशिल्पी एवम सारस्वत सम्मान
मौनतीर्थ मंगलनाथ मार्ग उज्जैन में ब्रह्मलीन मौनीबाबा के 116 वें श्रद्धापर्व के अवसर पर 5 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में श्री मौनतीर्थ हिंदी विद्यापीठ उज्जैन मध्यप्रदेश, एम.डी. एजुकेशन सोसायटी सरायपाली छत्तीसगढ़ (पंजीकृत संस्था) व कलिंगा यूनिवर्सिटी रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय शैक्षिक संगोष्ठी सह सम्मान कार्यक्रम " शिक्षा शिल्पी रिफ्लेक्ट द पर्सेनालिटी ऑफ टीचर्स नेशनल कॉन्फ्रेंस कम अवार्ड सेरेमनी का आयोजन 13-14 दिसम्बर 2025 को श्री मौनतीर्थ पीठ चित्रकूट गंगाघाट मंगलनाथ मार्ग उज्जैन में डॉ. पी.आर.वासुदेवन 'शेष' सेवानिवृत्त वरिष्ठ हिंदी अधिकारी (भारत सरकार) चेन्नई (तमिलनाडु) के मुख्य आतिथ्य डॉ. नन्दलाल मणि त्रिपाठी 'पीताम्बर' ज्योतिष व धर्मशास्त्र के समसामयिक लेखक गोरखपुर (उत्तरप्रदेश) की अध्यक्षता, डॉ. संदीप गाँधी कुलसचिव कलिंगा विश्वविद्यालय नया रायपुर (छत्तीसगढ़) , उमाशंकर मनमौजी हास्य व व्यंग्य कवि भोपाल (मध्यप्रदेश) के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भूमिका विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान अपने शोध आलेख प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस में शिक्षण कार्य, कुशल प्रबंधन, योजना निर्माण, शिक्षा सुविधा, नेतृत्व , नियंत्रण , के साथ एक सुविधादाता के रूप में एक अच्छे शिक्षक के कर्तव्य व उत्तरदायित्व का निर्वहन किस प्रकार किया जाए विषय पर चर्चा किया गया। कार्यक्रम के द्वितीय दिवस में अवार्ड समारोह का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 21 शिक्षकों को शिक्षाशिल्पी सम्मान ,8 शिक्षकों को शिक्षा शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया गया
जिसमे रायगढ़ जिले से श्रीमती रीता श्रीवास्तव को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान शिक्षा शिल्पी एवम सारस्वत सम्मान प्रदान किया गया उनको यह सम्मान उनके द्वारा शाला में किये जा रहे नवाचारों, विभिन्न गतिविधियों एवम सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रों के सर्वांगीण विकास और लगातार कार्य करने शैक्षिक कार्यों के अलावा सामाजिक सरोकारों के महत्वपूर्ण कार्यों के फलस्वरूप उनके सतत परिश्रम को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कुमार प्रधान द्वारा किया गया।




