बारिश के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, साढ़े छह माह में जिला चिकित्सालय पहुंचे 80 मरीज, एक की हुई मौत, एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता के दावे
रायगढ़/ जिले में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही सर्पदंश (स्नेक बाइट) के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर के बाहरी इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। जिला चिकित्सालय रायगढ़ के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से 9 जुलाई 2026 तक कुल 80 स्नेक बाइट के मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें एक मरीज की मौत हुई है।
गौरतलब हो कि जिला चिकित्सालय से मिले आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 1, फरवरी में 1, मार्च में 13, अप्रैल में 10, मई में 12, जून में 24 तथा 9 जुलाई तक 19 मरीज सर्पदंश के शिकार होकर उपचार के लिए पहुंचे हैं। आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि जैसे-जैसे बारिश का दौर तेज हुआ, वैसे-वैसे सर्पदंश की घटनाओं में भी तेजी आती गई। अकेले जून और जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में कुल 43 मामले सामने आ चुके हैं, जो इस मौसम में बढ़ते खतरे की ओर इशारा करते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भर जाता है। ऐसे में वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में खेतों, घरों, गोदामों, लकड़ी और ईंटों के ढेर, झाड़ियों तथा रिहायशी इलाकों की ओर निकल आते हैं। दूसरी ओर धान की रोपाई, खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों के कारण ग्रामीणों का खेतों में आवागमन बढ़ जाता है, जिससे सर्पदंश की घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।जिला चिकित्सालय प्रबंधन के अनुसार अस्पताल में स्नेक बाइट के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन, आवश्यक दवाइयां तथा प्रशिक्षित चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसकी स्थिति का परीक्षण कर उपचार प्रारंभ कर दिया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर मरीज को निगरानी में भी रखा जाता है ताकि किसी प्रकार की जटिलता होने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।
झड़ फुक घरेलू उपचार के चक्कर में जाती है जान
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश मामलों में यदि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन कई बार लोग पहले झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के चक्कर में समय गंवा देते हैं। इसके अलावा जहरीले सांप के काटने के बाद अस्पताल पहुंचने में अत्यधिक देरी होने या मरीज की स्थिति पहले से अत्यंत गंभीर होने पर उपचार कठिन हो जाता है। साढ़े छह माह के दौरान हुई एकमात्र मौत के पीछे भी गंभीर स्थिति अथवा अस्पताल पहुंचने में हुई देरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
जागरूकता जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। बारिश के मौसम में खेतों, झाड़ियों और सुनसान स्थानों पर जाते समय जूते पहनें, रात में टॉर्च का उपयोग करें, घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा लकड़ी, भूसा या पत्थरों के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने के बजाय उसे शांत रखें और बिना समय गंवाए सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक चिकित्सा ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
वर्शन/ बीते 6 माह में लगभग 80 मामले स्नेक बाईट के सामने आए है।जिनके एक की मौत हुई है।अस्पताल प्रबंधन के पास पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपब्ध है।
डॉक्टर दिनेश पटेल
सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय




