कथा के चौथे दिन शिव – पार्वती विवाह के प्रसंग सुनकर भक्त हुए भावविभोर
शिव शक्ति समिति एवं जूटमिल मोहल्लेवासियों के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा यह शिव महापुराण कथा का आयोजन
रायगढ़। कान्हा हास्पिटल जूटमिल रोड में आयोजित शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन, कथा व्यास ज्योषित आचार्य वेंकटेश शरण जी महाराज श्रीधाम वृंदावन वाले ने महादेव संग पार्वती विवाह का अदभुत उल्लेख किया। कथा आयोजन के दौरान उन्होंने बताया कि गाय, गंगा और ब्राह्मण का अपमान कभी नही करना चाहिए क्योकि यह तीनों पूजयनीय है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और पार्वती का विवाह केवल एक दैवीय घटना नहीं बल्कि भक्ति, तपस्या, संयम और सृष्टि संतुलन का अदभुत प्रतीक है। इस दिव्य मिलन के बिना सृष्टि अधूरी मानी जाती थी क्योंकि शिव बिना शक्ति के शव है और शक्ति बिना शिव के निष्प्रभावी। यह कथा बताती है कि जब भक्ति और प्रेम सच्चे हो, तो परम ब्रह्म भी अपने भक्त के समर्पण से बंध जाते है।
उन्होंने कहा कि प्रथम जन्म में माता पार्वती, दक्ष प्रजापति की कन्या सती के रूप में जन्मी थीं। सती ने भगवान महादेव के पति रूप में प्राप्त किया परंतु उनके पिता दक्ष शिवजी का अनादर करते थे। एक बार दक्ष ने एक भव्य यज्ञ किया परंतु उसमें शिवजी को आमंत्रित नही किया। सती बिना बुलाएं वहां पहुंचीं और जब उन्होंने अपने पति का अपमान होते देखा, तो वेदना से व्याकुल होकर यज्ञकुंड में स्वयं को भस्म कर लिया। यह देखकर भगवान शिव क्रोधित हो उठे। उन्होने अपने वीरभद्र को उत्पन्न किया, जिसने दक्ष का यज्ञ भंग कर दिया। इसके बाद शिवजी संसार से विरक्त होकर गहन तपस्या में लीन हो गए। कालांतर में सती ने हिमवान राजा रानी मेना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।
शिव महापुराण कथा सुनने उमंड रही भक्तो की भीड
रायगढ़ जूटमिल पुराना बस स्टैण्ड कान्हा हास्पिटल के सामने शिव महापुराण कथा का अयोजन 10 मार्च से 18 मार्च 2026 तक पंडित शिव शक्ति समिति एवं समस्त मोहल्लेवासी जूटमिल द्वारा शिवमहापुराण कथा का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे है। प्रत्येक दिन के कथा प्रसंग के अनुसार झाकियों के माध्यम से आकर्षण व भावविभोर होते भक्त दिखाई दे रहे है। शिव कथा दोपहर 3 बजे से प्रभु इच्छा तक प्रतिदिन शिव महापुराण कथा की अनवरत सप्तज्ञानवी की धारा प्रवाहमान है।
18 मार्च को होगा भंडारा
शिव शक्ति समिति एवं समस्त जूटमिल मोहल्लेवासियों के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 9 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन बडी धूमधाम से कलश यात्रा के साथ शुभारम्भ होकर वेदी पूजन सह शिव महापुराण कथा का अमृतमयी रसास्वादन करने को मिल रहा है। जिसमें शिवलिंग की महिमा, आदि शिवलिंग पूजन विधि, रूदाक्ष की महिमा, नारद मोह, धनपति कुबेर चरित्र, संध्या देवी कथा एवं शिव पार्वती विवाह प्रसंग श्रवण कराया गया है। इसके आगे कल माता पार्वती को ब्राहमण पत्नी द्वारा पतिव्रता धर्म का उपदेश, गणेश कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, शिव के 12 अवतार सहित विविध ज्ञानवर्धक एवं प्रासंगिक कथाओं का श्रवणपान करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कथा व्यास विदाई एवं 18 मार्च को हवन, सहस्त्र धारा, पूर्णाहूति व भंडारा का आयोजन किया जायेगा। नगर के सभी श्रद्धालुभक्तों से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में शिव कथा स्थल पहुंचकर पुण्य के भागी बने।




