24 हजार 612 किसान धान बेचने का कर रहे इंतजार, खरीदी की धीमी रफ्तार ने बढ़ाई किसानों की चिंता
रायगढ़/बीते वर्ष 15 नवंबर से जिले में शुरू हुई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की रफ्तार लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है। हालात यह हैं कि करीब दो माह गुजर जाने के बावजूद हजारों किसान अब भी अपनी बारी के इंतजार में बैठे हैं, जिससे किसानों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही है।जिले में धान खरीदी के लिए कुल 83,528 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन अब तक केवल 58,916 किसानों से ही धान की खरीदी हो सकी है। शेष 24,612 किसान अब भी धान बेचने से वंचित हैं। शासन द्वारा 31 जनवरी को धान खरीदी की अंतिम तिथि तय की गई है। ऐसे में समय रहते धान नहीं बिकने की स्थिति में हजारों किसान समर्थन मूल्य के लाभ से हाथ धो बैठेंगे।
नियम कायदे और तकनीकी खामियों से धीमी हुई रफ्तार
गौरतलब हो कि शासन के निर्देशानुसार टोकन जारी करने से पहले किसानों को भौतिक सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा था। जिससे पहले ही खरीदी प्रक्रिया धीमी हो गई। इसके बाद ऑनलाइन प्रणाली की तकनीकी खामियों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। जिसके बाद भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया तो बंद कर दी गई है।बहरहाल जब देखना लाजमी होगा कि क्या इस प्रक्रिया के बंद होने से निर्धारित तिथि में 24 हजार से अधिक किसान समर्थन मूल्य में धान बेचने का लाभ ले सकेंगे।या फिर सुस्त रफ्तार और तकनीकी खामियों का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ेगा।
समितियों में धीमा उठाव बना बड़ा रोड़ा
जिले में 105 समितियों के माध्यम से धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है।धान खरीदी की सुस्ती के पीछे समितियों में धीमा उठाव भी एक अहम कारण माना जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 3 लाख 72 हजार 185 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसमें से 3 लाख 55 हजार मीट्रिक टन धान का डीओ काटा जा चुका है। इसके बावजूद उठाव की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण अब भी 1 लाख 46 हजार 422 मीट्रिक टन धान समितियों में जाम पड़ा हुआ है।धान का उठाव और खरीदी दोनों ही मोर्चों पर सुस्ती के चलते अंतिम तिथि नजदीक आते ही किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। यदि व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में किसान न केवल धान बेचने से वंचित हो जाएंगे बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
वर्शन/धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई है।5 फरवरी तक समितियों से पूरे धान का उठाव कर लिया जाएगा।तकनीकी समस्याओं को खरीदी में देरी का कारण माना जा सकता है।
चितरंजन सिंह
जिला खाद्य अधिकारी




