दर्जनभर से अधिक उद्योगों पर विद्युत विभाग का 204 करोड़ से अधिक का बिजली बकाया
आम उपभोक्ता की लाइन तुरंत कटती है, लेकिन बड़े उद्योगों पर विभाग क्यों मेहरबान?
रायगढ़/ जिले में बिजली बिल वसूली को लेकर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर जहां घरेलू और छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं का कुछ हजार रुपये का बिल बकाया होते ही उनकी बिजली आपूर्ति बिना देर किए काट दी जाती है, वहीं दूसरी ओर जिले के बड़े उद्योग वर्षों से करोड़ों रुपये का विद्युत शुल्क बकाया रखे हुए हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों के विरुद्ध विभाग की कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती।
गौरतलब हो कि रायगढ़ जिले के 16 बड़े उद्योगों पर ब्याज सहित विद्युत शुल्क का बकाया 204 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इनमें कई ऐसे उद्योग शामिल हैं जिन पर वर्षों से करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है।जब आम उपभोक्ताओं पर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, तो बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के मामले में भी वही सख्ती दिखाई देनी चाहिए। आखिर बिजली विभाग का राजस्व जनता और सरकार दोनों की संपत्ति है। यदि करोड़ों रुपये की वसूली वर्षों तक लंबित रहती है, तो इसका सीधा असर विभाग की वित्तीय स्थिति और ईमानदारी से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या विद्युत विभाग इन बकायेदार उद्योगों से 204 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूलने के लिए कठोर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा?यदि नियम सभी उपभोक्ताओं के लिए समान हैं, तो फिर बड़े उद्योगों को वर्षों तक बकाया रखने की अनुमति कैसे मिल गई? क्या उनके विद्युत कनेक्शन काटने, संपत्ति कुर्क करने या अन्य कानूनी वसूली की कार्रवाई की गई? यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वसूली नहीं होने के कारण मूल राशि के साथ ब्याज भी लगातार बढ़ता गया और अब बकाया 204 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। यदि विभाग शुरुआती चरण में प्रभावी कार्रवाई करता, तो इतनी बड़ी राशि लंबित नहीं होती।
आम जनता पर सख्ती, उद्योगों पर नरमी?
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि कोई घरेलू उपभोक्ता या छोटा व्यापारी कुछ हजार रुपये का बिल समय पर जमा नहीं कर पाता, तो उसकी बिजली आपूर्ति तत्काल काट दी जाती है। लेकिन जब करोड़ों रुपये का बकाया रखने वाले बड़े उद्योगों की बात आती है, तो विभाग की कार्रवाई उतनी प्रभावी क्यों नहीं दिखती?
प्रमुख बकायेदार उद्योग
टी आर एन एनर्जी— 101.95 करोड़ रुपये
रायगढ़ इस्पात — 62.46 करोड़ रुपये
सिंघल स्टील एंड पावर — 24.33 करोड़ रुपये
रुक्मणी बायोमास — 13 करोड़ रुपये
मां काली एलॉयज — 9.48 करोड़ रुपये
सुनील इस्पात — 9.37 करोड़ रुपये
रुपाणाधाम स्टील — 8.47 करोड़ रुपये
सिंघल इंटरप्राइजेस — 5.80 करोड़ रुपये
मध्यम एवं छोटे उद्योगों पर भी करोड़ों का बकाया
स्काई एलॉयज — 3.51 करोड़ रुपये
श्याम इस्पात — 1.78 करोड़ रुपये
मां मंगला इस्पात — 1.39 करोड़ रुपये
शाकम्भरी इस्पात — 92.47 लाख रुपये
सन स्टील कंपनी — 55.57 लाख रुपये




