शहर की तीसरी आंख कहे जाने वाले सीसीटीवी कैमरे खराब, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों को पकड़ना हुआ मुश्किल
आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस महकमे को निजी संस्थानों के कैमरे खंगालने की मजबूरी
स्तरहीन कैमरे की फोकस क्वालिटी बन रही है गुत्थी सुलझाने बाधा

रायगढ़।
शहर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चौराहों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे अब केवल शो-पीस बन कर रह गए हैं। इसके लिए लगे यंत्र धूल फांक रहे हैं। इस पर किसी का ध्यान ही नहीं है। हालत यह है कि चौक चौराहों पर कोई बड़ी घटना, चोरी लूट व अन्य हो रही है तो पुलिस को दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का सहारा लेना पड़ रहा है जबकि इन दुकानों में खराब क्वालिटी के कैमरे से संदिग्ध लोगों की पहचान करना पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।
जिला मुख्यालय में छिनतई, उठाईगीरी, मारपीट, रोड रेज, स्पीड बाइकिंग की वारदात, घटना दुर्घटना आए दिन हो रही है। इनमे शामिल लोगों पर निगरानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण वर्तमान आधुनिक दौर में सीसीटीवी कैमरा है।
सीसीटीवी आज के समय में महती आवश्यकता हो गई है। इससे अपराधों पर निगरानी के साथ कई मामलों में खुलासे भी हो रहे हैं। शहर के दुकान, मकान, निजी संस्थानों में इसे लगाया भी गया है। लेकिन शहर में तीसरी आंख से सुरक्षा करने का सपना पूरी तरह अभी भी साकार नहीं हुआ है। लंबे समय से शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब हैं। हालात यह हैं कि शहर के 90 में फीसद कैमरे खराब हैं। इन्हें सही नहीं करने से शहरवासियों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शहरवासी अब इन्हे सही करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। वही आमजन को आपराधिक घटना से जद्दोजहद करना पड़ रहा है, पुलिस आरोपित को पकड़ने में दमखम लगाने के बाद भी सफलता की सीढ़ी नही चढ़ पा रही हैं। बहरहाल लोगों को सुरक्षित माहौल और अपराध में लिप्त लोगों की धरपकड़ के लिए सीसीटीवी को दुरुस्त करना होगा, उच्च स्तरीय कैमरे को लगाने की प्राथमिकता देना चाहिए। साथ ही पेट्रोलिंग के साथ पुलिस टीम को भी चौकन्ना रहना होगा। ताकि अपराध और अपराधियों पर नकेल कसा जा सके।
आपराधिक गतिविधियों से शहर संवेदनशील
क्राइम के लिहाज से शहर संवेदनशील औद्योगिक जिला होने के कारण यहां आने-जाने वालों की बड़ी तादाद होती है, इसलिए अपराध के लिहाज से शहर ज्यादा संवेदनशील है। बड़े अपराध होने पर पुलिस हर बार उद्योगों से सीएसआर के तहत सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कहती है, लेकिन शहर में लगे कैमरों में एक बड़े उद्योग को छोड़कर बाकी किसी संस्थान ने कैमरा नहीं लगवाया है। फिलहाल इसे दुरुस्त करते हुए कैमरें को तहरिज देने की दरकार है।
शहर में लगभग 04 साल पहले चौक- चौराहे या सार्वजनिक जगहों पर व्यापारिक संस्थान या संस्था द्वारा शहर में 306 सीसीटीवी कैमरे लगे थे। इसमें सबसे ज्यादा कोतवाली में 144, चक्रधरनगर में 82, जूटमिल में 64, कोतरा रोड में 16 कैमरे लगें थे। प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए 8 कैमरे खराब हैं। इन कैमरों का संचालक कंट्रोल रूम से होता था, लेकिन तीन साल से कैमरे खराब हैं। बजट नहीं होने के कारण इन्हें बनवाया नहीं जा सका है। मौजूदा दौर में आमजन अपने घर को सुरक्षित रखने तथा निजी संस्थानों द्वारा बढ़ते आपराधिक गतिविधियों के चलते कैमरे लगाए है। गली मोहल्ले में भी इसकी झलक देखी जा सकती है।
शहर में 4 साल पहले इस तरह थी सीसीटीवी कैमरें




