685 अधिवक्ताओं के वोट से तय होगी संघ की नई टीम, आज मतदान
अध्यक्ष की कुर्सी के लिए तीन दावेदार आमने-सामने, सचिव पद पर पांच प्रत्याशियों के बीच मुकाबला
रायगढ़। जिला अधिवक्ता संघ की सत्ता किसके हाथ में होगी, इसकी चुनावी प्रक्रिया आज मतदान के साथ आगे बढ़ेगी। अध्यक्ष से लेकर कार्यकारिणी सदस्य तक के विभिन्न पदों के लिए मैदान में उतरे प्रत्याशियों की किस्मत 685 अधिवक्ता मतदाता तय करेंगे। इस बार पिछले चुनाव की तुलना में 154 मतदाता अधिक हैं। ऐसे में हर वोट का महत्व बढ़ गया है। खासकर अध्यक्ष पद पर तीन और सचिव पद पर पांच प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
अध्यक्ष पद की दौड़ में महेंद्र सिंह यादव, मनोज कुमार तिवारी और शतेन्द्र कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों के बीच अपनी स्वीकार्यता और समर्थन साबित करने की चुनौती है। सचिव पद पर पांच प्रत्याशियों ने दावेदारी पेश की है। उपाध्यक्ष और कनिष्ठ महिला उपाध्यक्ष के एक-एक पद के लिए दो-दो प्रत्याशी आमने-सामने हैं। वहीं कार्यकारिणी में महिलाओं के लिए आरक्षित तीन सदस्य पदों पर भी चुनाव होना है।इस चुनाव में बढ़ा हुआ मतदाता आधार प्रत्याशियों के लिए अहम है। पिछले चुनाव में 531 अधिवक्ता मतदाता थे, जबकि इस बार इनकी संख्या 685 पहुंच गई है। यानी चुनावी गणित में 154 नए मतदाताओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। मतदान के साथ ही प्रत्याशियों के बीच चल रही जोर-आजमाइश का दौर थमेगा। हालांकि किसके पक्ष में कितना समर्थन रहा, इसकी तस्वीर पांच नवंबर को मतगणना के बाद ही सामने आएगी।
चुनावी परीक्षा से पहले कोर्ट परिसर में चला संपर्क अभियान
मतदान से ठीक पहले न्यायालय परिसर चुनावी गतिविधियों का केंद्र बना रहा। प्रत्याशियों ने व्यक्तिगत संपर्क के जरिए अधिवक्ताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश की। अलग-अलग पदों के दावेदारों के समर्थक भी सक्रिय रहे। कहीं संभावित जीत-हार के समीकरणों पर चर्चा हुई तो कहीं मतदाताओं के रुझान को लेकर आकलन चलता रहा। निर्वाचन टीम ने भी मतदान केंद्र, मतदाता सूची और चुनाव संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है।
बढ़े मतदाताओं के कारण मतदान के लिए मिला अतिरिक्त समय
पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 154 मतदाता अधिक होने का असर मतदान की समय-सारणी पर भी पड़ा है। पहले शाम पांच बजे तक वोटिंग निर्धारित थी, लेकिन निर्वाचन टीम ने इसे बढ़ाकर शाम 5:30 बजे तक कर दिया है। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना कराने के बजाय पांच नवंबर की तारीख तय की गई है। इससे मतपेटियों की सुरक्षा और मतगणना की तैयारियों के लिए अलग से समय मिल सकेगा।




