अधीक्षकों की कमी से जूझ रहे छात्रावास, एक ही कर्मचारी के जिम्मे दो हॉस्टल
अगस्त में तबादले के बाद भी अटैचमेंट पर रोकने की व्यवस्था, प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उजागर
रायगढ़/ जिले के छात्रावासों में अधीक्षकों की कमी का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं तक दिखाई देने लगा है। डिग्री कॉलेज मार्ग स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में अधीक्षक की पदस्थापना को लेकर ऐसी स्थिति सामने आई है, जो विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जानकारी के अनुसार, यहां पदस्थ अधीक्षक का अगस्त माह में ही तबादला कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अटैचमेंट के जरिए यहीं रोके रखा गया है। वहीं, एक अन्य ओबीसी छात्रावास की जिम्मेदारी भी उन्हीं को सौंपे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि जब जिले में अधीक्षकों की कमी है, तो रिक्त पदों पर नियमित व्यवस्था बनाने के बजाय एक ही कर्मचारी से दो छात्रावासों की जिम्मेदारी क्यों निभाई जा रही है?
दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास उनकी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। यहां रहने वाले बच्चों की दिनचर्या, भोजन, पढ़ाई, अनुशासन और सुरक्षा की निगरानी के लिए अधीक्षक की भूमिका अहम होती है। ऐसे में अधीक्षकों के पद रिक्त रहने या एक कर्मचारी को एक से अधिक छात्रावासों की जिम्मेदारी दिए जाने की स्थिति में नियमित संचालन और निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस व्यवस्था के पीछे विभागीय कारण क्या हैं और दोनों छात्रावासों में जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह किया जा रहा है, इसकी आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।डिग्री कॉलेज मार्ग स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास के अधीक्षक का अगस्त में तबादला किए जाने की जानकारी है। इसके बाद भी उन्हें वर्तमान छात्रावास में अटैचमेंट के तहत बनाए रखा गया। साथ ही दूसरे ओबीसी हॉस्टल की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपे जाने की बात कही जा रही है। इससे विभाग में तबादला आदेश के क्रियान्वयन और अधीक्षकों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।यदि अधीक्षक को प्रशासनिक आवश्यकता के चलते अटैचमेंट पर रोका गया है, तो इसकी वजह और अवधि स्पष्ट होना जरूरी है। वहीं, दूसरे छात्रावास की जिम्मेदारी सौंपे जाने की स्थिति में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि दोनों संस्थानों में नियमित निगरानी और विद्यार्थियों की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।
छात्रावास में सुविधाओं की कमी भी बनी चिंता
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याएं भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों को लंबे समय से खेल सामग्री की कमी का सामना करना पड़ रहा था। खेलकूद बच्चों के शारीरिक विकास और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आवश्यक खेल सामग्री का समय पर उपलब्ध नहीं होना छात्रावास की सुविधाओं पर सवाल खड़ा करता है।हालांकि, अधीक्षक आशिफ खान के अनुसार, खेल सामग्री के लिए कलेक्टर से निवेदन किया गया था और सामग्री की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने जल्द ही इसे विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि खरीदी गई सामग्री कब तक बच्चों तक पहुंचती है।
दरवाजे-खिड़कियां खराब, कमरों में रोशनी की कमी
छात्रावास के दरवाजे और खिड़कियों की खराब स्थिति के साथ कमरों में पर्याप्त बल्ब नहीं होने की बात भी सामने आई है। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित आवास और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विशेषकर शाम और रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से अध्ययन में परेशानी हो सकती है। ऐसे में इन कमियों का निरीक्षण कर तत्काल सुधार की जरूरत है।बताया जा रहा है कि कुछ समय पूर्व छात्रावास भवन की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद दीवारों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। इससे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। विभाग को मरम्मत कार्य की लागत, गुणवत्ता निरीक्षण और वर्तमान भवन की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अधीक्षकों की कमी और कर्मचारियों की मांगें
जिले के छात्रावासों में अधीक्षकों की कमी का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब भोजन, वृत्ति और सेवा शर्तों से संबंधित मांगों को लेकर भी असंतोष बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, इन मुद्दों को लेकर 12 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल की तैयारी है। यदि हड़ताल होती है, तो छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की दैनिक जरूरतें प्रभावित न हों, इसके लिए विभाग को पहले से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।इस पूरे मामले में विभाग के सामने दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। पहली, अधीक्षकों की कमी और अटैचमेंट से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा कर नियमित पदस्थापना की दिशा में कदम उठाना। दूसरी, छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, पर्याप्त रोशनी, खेल सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
वर्सन
“कुछ समय पूर्व हॉस्टल भवन की मरम्मत कराई गई है। खेल सामग्री के लिए कलेक्टर से निवेदन किया गया था। इसकी खरीदी की जा चुकी है और जल्द ही खेल सामग्री बच्चों को उपलब्ध करा दी जाएगी।”
आशिफ खान,
अधीक्षक,
प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास, रायगढ़
अधीक्षकों की कमी से जूझ रहे छात्रावास, एक ही कर्मचारी के जिम्मे दो हॉस्टल
अगस्त में तबादले के बाद भी अटैचमेंट पर रोकने की व्यवस्था, प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उजागर
रायगढ़/ जिले के छात्रावासों में अधीक्षकों की कमी का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं तक दिखाई देने लगा है। डिग्री कॉलेज मार्ग स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में अधीक्षक की पदस्थापना को लेकर ऐसी स्थिति सामने आई है, जो विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जानकारी के अनुसार, यहां पदस्थ अधीक्षक का अगस्त माह में ही तबादला कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अटैचमेंट के जरिए यहीं रोके रखा गया है। वहीं, एक अन्य ओबीसी छात्रावास की जिम्मेदारी भी उन्हीं को सौंपे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि जब जिले में अधीक्षकों की कमी है, तो रिक्त पदों पर नियमित व्यवस्था बनाने के बजाय एक ही कर्मचारी से दो छात्रावासों की जिम्मेदारी क्यों निभाई जा रही है?
दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास उनकी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। यहां रहने वाले बच्चों की दिनचर्या, भोजन, पढ़ाई, अनुशासन और सुरक्षा की निगरानी के लिए अधीक्षक की भूमिका अहम होती है। ऐसे में अधीक्षकों के पद रिक्त रहने या एक कर्मचारी को एक से अधिक छात्रावासों की जिम्मेदारी दिए जाने की स्थिति में नियमित संचालन और निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस व्यवस्था के पीछे विभागीय कारण क्या हैं और दोनों छात्रावासों में जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह किया जा रहा है, इसकी आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।डिग्री कॉलेज मार्ग स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास के अधीक्षक का अगस्त में तबादला किए जाने की जानकारी है। इसके बाद भी उन्हें वर्तमान छात्रावास में अटैचमेंट के तहत बनाए रखा गया। साथ ही दूसरे ओबीसी हॉस्टल की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपे जाने की बात कही जा रही है। इससे विभाग में तबादला आदेश के क्रियान्वयन और अधीक्षकों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।यदि अधीक्षक को प्रशासनिक आवश्यकता के चलते अटैचमेंट पर रोका गया है, तो इसकी वजह और अवधि स्पष्ट होना जरूरी है। वहीं, दूसरे छात्रावास की जिम्मेदारी सौंपे जाने की स्थिति में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि दोनों संस्थानों में नियमित निगरानी और विद्यार्थियों की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।
छात्रावास में सुविधाओं की कमी भी बनी चिंता
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याएं भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों को लंबे समय से खेल सामग्री की कमी का सामना करना पड़ रहा था। खेलकूद बच्चों के शारीरिक विकास और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आवश्यक खेल सामग्री का समय पर उपलब्ध नहीं होना छात्रावास की सुविधाओं पर सवाल खड़ा करता है।हालांकि, अधीक्षक आशिफ खान के अनुसार, खेल सामग्री के लिए कलेक्टर से निवेदन किया गया था और सामग्री की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने जल्द ही इसे विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि खरीदी गई सामग्री कब तक बच्चों तक पहुंचती है।
दरवाजे-खिड़कियां खराब, कमरों में रोशनी की कमी
छात्रावास के दरवाजे और खिड़कियों की खराब स्थिति के साथ कमरों में पर्याप्त बल्ब नहीं होने की बात भी सामने आई है। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित आवास और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विशेषकर शाम और रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से अध्ययन में परेशानी हो सकती है। ऐसे में इन कमियों का निरीक्षण कर तत्काल सुधार की जरूरत है।बताया जा रहा है कि कुछ समय पूर्व छात्रावास भवन की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद दीवारों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। इससे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। विभाग को मरम्मत कार्य की लागत, गुणवत्ता निरीक्षण और वर्तमान भवन की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अधीक्षकों की कमी और कर्मचारियों की मांगें
जिले के छात्रावासों में अधीक्षकों की कमी का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब भोजन, वृत्ति और सेवा शर्तों से संबंधित मांगों को लेकर भी असंतोष बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, इन मुद्दों को लेकर 12 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल की तैयारी है। यदि हड़ताल होती है, तो छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की दैनिक जरूरतें प्रभावित न हों, इसके लिए विभाग को पहले से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।इस पूरे मामले में विभाग के सामने दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। पहली, अधीक्षकों की कमी और अटैचमेंट से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा कर नियमित पदस्थापना की दिशा में कदम उठाना। दूसरी, छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, पर्याप्त रोशनी, खेल सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
वर्सन
“कुछ समय पूर्व हॉस्टल भवन की मरम्मत कराई गई है। खेल सामग्री के लिए कलेक्टर से निवेदन किया गया था। इसकी खरीदी की जा चुकी है और जल्द ही खेल सामग्री बच्चों को उपलब्ध करा दी जाएगी।”
आशिफ खान,
अधीक्षक, प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास, रायगढ़




