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नगर निगम प्रशासन की उदासीनता से टिल्लू पार्क में बदहाली का शिकार, बंद पड़ी योग की पाठशाला

नगर निगम प्रशासन की उदासीनता से टिल्लू पार्क में बदहाली का शिकार, बंद पड़ी योग की पाठशाला

नगर निगम ने पतंजलि निशुल्क योग केंद्र के रूप में किया था विकसित, अब झाड़-झंखाड़ से घिरा

रायगढ़। शहर को सुंदर बनाने और नए पार्क विकसित करने के दावे करने वाला नगर निगम अपने पुराने उद्यानों की सुध लेना भी भूल गया है। जूटमिल क्षेत्र में ललित स्कूल के पास स्थित टिल्लू पार्क इसकी एक बानगी है। नगर निगम ने इस पार्क को पतंजलि निशुल्क योग केंद्र के रूप में विकसित किया था, ताकि क्षेत्र के लोगों को योगाभ्यास के लिए एक व्यवस्थित स्थान मिल सके। कुछ समय तक यहां योग की गतिविधियां भी संचालित हुईं, लेकिन आज केंद्र बदहाली का शिकार है। परिसर में झाड़-झंखाड़ का कब्जा है और आने-जाने के रास्ते तक बंद हो गए हैं। योग की पाठशाला अब खंडहरनुमा परिसर में तब्दील होती जा रही है।
दरअसल तात्कालीन दौर में यह पार्क काफी पुराना है, जूटमिल  क्षेत्र के लोगों का यह सुबह  शाम सैर सपाटा के लिए था। स्वरूप छोटा था लेकिन लोगों के लिए काफी आनंददायक था। नगर पालिका के बाद नगर निगम बनने के बाद समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार भी कराया गया। निगम ने कुछ साल पहले इसे योग केंद्र के रूप में विकसित कर जनसुविधा से जोड़ने की पहल की थी, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था बिखर गई। जिस स्थान पर लोग स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली के लिए योगाभ्यास करने पहुंचते थे, वहां अब उपेक्षा के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। पार्क की स्थिति ऐसी हो गई है कि इसका उपयोग करना तो दूर, परिसर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। वहीं जब नगर निगम ने इसे पतंजलि निशुल्क योग केंद्र के रूप में विकसित किया था तो उसके नियमित संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए थी। बहरहाल नगर निगम प्रशासन एक तरफ भारी भरकम राशि खर्च करते हुए शहर के विभिन्न क्षेत्र में पार्कों का निर्माण कार्य कर रही है लेकिन अपने ही बनाए और अपने ही अधिक पुराने पार्कों को बधाई पर छोड़ दिया है इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही हैं।

नए पर निगम का फोकस पुराने की जिम्मेदारी को भुलाए


शहर में जगह-जगह सौंदर्यीकरण और नए पार्कों के विकास की योजनाएं चल रही हैं। लोगों के घरों के साथ-साथ सरकारी परिसर सामुदायिक भवन तक को तोड़ा जा रहा है। नए उद्यानों को आकर्षक बनाने के लिए संसाधन के साथ भारी भरकम राशि भी खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पहले से विकसित सार्वजनिक स्थलों की देखरेख पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। टिल्लू पार्क की बदहाली नगर निगम की इसी कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के पुत्र की स्मृति में हुआ था निर्माण

स्थानीय लोगों ने बताया की टिल्लू पार्क का निर्माण पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के पुत्र की स्मृति में कराया गया था। बाद में नगर निगम ने इसे पतंजलि निशुल्क योग केंद्र के रूप में विकसित किया। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी निगम के पास थी। उद्देश्य था कि क्षेत्र के लोगों को निशुल्क योगाभ्यास की सुविधा मिल सके, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह जनसुविधा अब बदहाली का शिकार है।

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