वर्षों से पहुंच मार्ग को तरस रही गोवर्धनपुर माध्यमिक शाला, बारिश में थम जाती है पढ़ाई


पक्की सड़क और बाउंड्रीवाल के अभाव में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, जनसुराज में आवेदन और निगम आयुक्त के निरीक्षण के बाद भी नहीं निकला समाधान

रायगढ़/ एक ओर शासन-प्रशासन ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की बेहतर व्यवस्था और विद्यार्थियों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कई स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गोवर्धनपुर स्थित माध्यमिक शाला का सामने आया है, जहां स्कूल भवन के निर्माण के वर्षों बाद भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुगम एवं सुरक्षित पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं हो सका है। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति लंबे समय से बदहाल है। पक्की सड़क के अभाव में सामान्य दिनों में भी आवागमन परेशानी भरा रहता है, जबकि बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा पहुंच मार्ग की समस्या से जिला शिक्षा विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। हाल ही में स्कूल प्रबंधन द्वारा जिला शिक्षा विभाग से स्कूल के पहुंच मार्ग तक सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव मंगाए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सकती है।गोवर्धनपुर माध्यमिक शाला तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति सामान्य दिनों में भी चिंताजनक बताई जा रही है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और जलभराव के कारण विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को आवागमन में परेशानी होती है। बारिश के दौरान यह समस्या कई गुना बढ़ जाती है। मार्ग में पानी भर जाने के कारण आवाजाही लगभग बाधित हो जाती है और स्कूल तक पहुंचना जोखिम भरा हो जाता है।सबसे गंभीर स्थिति यह है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण बारिश के दौरान स्कूल संचालन भी प्रभावित होने की नौबत आती है। बताया गया कि बारिश के दौरान स्कूल में अघोषित अवकाश जैसी स्थिति निर्मित हो चुकी है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है।स्कूल में केवल पहुंच मार्ग ही समस्या नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक बाउंड्रीवाल का भी अभाव बताया जा रहा है। स्कूल परिसर को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने के लिए बाउंड्रीवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्षों बाद भी इसका निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।गोवर्धनपुर के नगर निगम क्षेत्र में शामिल हुए भी कई वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद स्कूल तक पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी आवश्यकता का समाधान नहीं हो पाना स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को भी दर्शाता है।
शिक्षक भी वाहन छोड़कर पैदल पहुंचने को मजबूर
मार्ग की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बारिश के दौरान स्कूल के शिक्षक भी दुर्घटना के जोखिम को देखते हुए अपने वाहन प्राथमिक शाला के पास खड़े कर देते हैं और वहां से पगडंडी के रास्ते पैदल माध्यमिक शाला तक पहुंचते हैं। जब शिक्षकों के लिए ही स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो, तो विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर सहज ही सवाल खड़े होते हैं।स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मांग उठने के बावजूद सड़क निर्माण नहीं होने से अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि बच्चों को प्रतिदिन इसी मार्ग से स्कूल जाना पड़ता है और बारिश के दौरान स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है।
जनसुराज अभियान में भी उठ चुका है मामला
गोवर्धनपुर माध्यमिक शाला के पहुंच मार्ग का मुद्दा जनसुराज अभियान के दौरान भी उठाया गया था। शासन द्वारा लोगों की समस्याओं को मौके पर सुनकर उनके निराकरण का भरोसा दिलाने के उद्देश्य से चलाए गए इस अभियान के तहत स्कूल तक पहुंच मार्ग निर्माण के लिए आवेदन दिया गया था।बताया गया कि आवेदन के बाद नगर निगम आयुक्त द्वारा मौके का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा भी लिया गया था। लेकिन निरीक्षण के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम धरातल पर नहीं उतर सका है। अब मार्ग में नाला होने के साथ ही निजी भूमि का पेंच सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
नाले पर पुल निर्माण के लिए 15 लाख का स्टीमेट
वार्ड पार्षद के अनुसार स्कूल तक पहुंच मार्ग को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए गए हैं। मार्ग में नाले पर पुल निर्माण की आवश्यकता को देखते हुए करीब 15 लाख रुपए का स्टीमेट भी तैयार किया गया है। हालांकि, संबंधित हिस्से में निजी भूमि होने के कारण निर्माण को लेकर समस्या बनी हुई है। निजी भूमि का मामला सुलझने के बाद ही सड़क और पुल निर्माण का काम आगे बढ़ने की स्थिति बन सकती है।ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्कूल तक सुरक्षित पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार विभाग आपसी समन्वय से निजी भूमि से जुड़े मामले का समाधान कब तक निकालते हैं।
वर्शन:
“स्कूल पहुंच मार्ग में नाले के ऊपर पुल निर्माण के लिए करीब 15 लाख रुपए का स्टीमेट दिया गया है। जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। हालांकि उक्त निर्माण कार्य में निजी भूमि की समस्या भी है।”
— श्रीमती संतोषी पद्म प्रजा, पार्षद, वार्ड क्रमांक 47




