67 गारबेज प्वाइंट के बावजूद शहर में बढ़ रहे कचरे के नए अड्डे
तय स्थानों से नियमित उठाव नहीं, वार्डों में लोग खुद बना रहे कचरा प्वाइंट,दवा खरीदी में भी 15 दिन केी देरी
रायगढ़/ शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम ने 48 वार्डों में 67 गारबेज प्वाइंट निर्धारित किए हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इन इंतजामों पर सवाल खड़े कर रही है। निर्धारित गारबेज प्वाइंट के अलावा शहर के अलग-अलग वार्डों में सड़क किनारे, खाली जगहों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों द्वारा कचरा फेंकने से नए-नए अनधिकृत कचरा प्वाइंट बनते जा रहे हैं। खास बात यह है कि कई स्थानों पर पहले जहां नियमित रूप से कचरा उठाया जाता था, वहां भी अब उठाव में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
गोौरतलब हो कि गारबेज प्वाइंट से कचरा उठने के बजाय कई जगह कचरे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं और निर्धारित प्वाइंट के बाहर भी शहर का कचरा फैल रहा है। इससे निगम की डोर-टू-डोर कचरा व्यवस्था और कचरा परिवहन व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम के अनुसार 48 वार्डों में कुल 67 गारबेज प्वाइंट हैं। इन स्थानों पर एकत्रित कचरे का नियमित उठाव कर उसे निर्धारित स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन इसके बावजूद शहर में कई ऐसे स्थान दिखाई देते हैं जहां लंबे समय तक कचरा जमा रहने से धीरे-धीरे वह स्थायी कचरा प्वाइंट का रूप ले लेता है।
लोगों द्वारा निर्धारित गारबेज प्वाइंट के बजाय खाली प्लॉट, सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर कचरा डालना शुरू कर दिया जाता है। कुछ समय बाद वहां कचरे का ढेर इतना बढ़ जाता है कि वह आसपास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।
नियमित उठाव की व्यवस्था में आई गिरावट
शहर में समस्या केवल नए कचरा प्वाइंट बनने तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायतें सामने आ रही हैं कि पूर्व में जिन स्थानों से नियमित कचरा उठाया जाता था, वहां भी अब उठाव की नियमितता प्रभावित हुई है।कचरा उठाव में देरी होने पर लोग आसपास ही कचरा डालना शुरू कर देते हैं। इससे निर्धारित प्वाइंट की क्षमता से अधिक कचरा जमा होता है और उसके आसपास भी गंदगी फैलने लगती है। यही स्थिति आगे चलकर नए अनधिकृत गारबेज प्वाइंट तैयार होने का कारण बनती है।
17 टिपर और 20 ट्रैक्टर, फिर भी उठाव में देरी क्यों?
नगर निगम के पास कचरा उठाव और सफाई कार्य के लिए 20 ट्रैक्टर और 17 टिपर वाहन उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इन वाहनों के संचालन में हर माह करीब 16 लाख रुपए डीजल पर खर्च होने की जानकारी है।
इसके बावजूद यदि 67 निर्धारित गारबेज प्वाइंट से कचरा समय पर नहीं उठ रहा और अलग-अलग वार्डों में नए कचरा स्थल बन रहे हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि वाहनों की वार्डवार तैनाती और उनकी मॉनिटरिंग किस तरह की जा रही है।सिर्फ वाहनों की संख्या और ईंधन खर्च से सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं होगी। जरूरी है कि प्रत्येक गारबेज प्वाइंट के लिए नियमित उठाव का शेड्यूल, वाहन की आवाजाही और उठाए गए कचरे की निगरानी सुनिश्चित की जाए।
मॉनिटरिंग का अभाव
गारबेज प्वाइंट की संख्या से ज्यादा जरूरी है मॉनिटरिंग
शहर में कचरा प्रबंधन का बड़ा सवाल यह है कि निर्धारित 67 प्वाइंट के बाद भी नए कचरा स्थल क्यों बन रहे हैं। यदि किसी स्थान पर लोग लगातार कचरा डाल रहे हैं तो निगम को वहां निगरानी बढ़ाने, सूचना बोर्ड लगाने और नियमित सफाई कराने की जरूरत है।वहीं जिन 67 निर्धारित प्वाइंट पर कचरा एकत्रित होता है, वहां से उठाव की समयसीमा तय होने पर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन भी किया जा सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किस वार्ड में कचरा उठाव नियमित है और कहां वाहन या संसाधनों की कमी के कारण देरी हो रही है।
आधी फागिंग मशीनें खराब, दवा खरीदी में भी हुई देरी
कचरे के साथ बारिश के मौसम में मच्छरों की समस्या भी बढ़ रही है। निगम के पास कुल 16 फागिंग मशीनें बताई जा रही हैं, जिनमें से 8 लंबे समय से खराब हैं। वहीं दवा खरीदी में करीब 15 दिन की देरी होने की बात स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकार की है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब 100 लीटर मेलाथिलान लिक्विड और 100 बोरी पावडर का ऑर्डर दिया गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आगामी सप्ताहभर में दवा की आपूर्ति होने का दावा किया जा रहा है।
पहले कचरा उठे, फिर बने शहर की सफाई की तस्वीर
शहर में 48 वार्ड और 67 निर्धारित गारबेज प्वाइंट होने के बावजूद यदि लोग नए कचरा स्थल बनाने को मजबूर हो रहे हैं तो यह केवल नागरिकों की जिम्मेदारी का मामला नहीं है। निर्धारित प्वाइंट पर नियमित उठाव, वाहनों की उपलब्धता, सफाई कर्मचारियों की मॉनिटरिंग और अनधिकृत कचरा स्थलों पर कार्रवाई—इन सभी को एक साथ प्रभावी करना होगा।16 लाख रुपए का मासिक डीजल खर्च, 20 ट्रैक्टर और 17 टिपर उपलब्ध होने के बाद भी यदि कचरा उठाव नियमित नहीं हो पा रहा है तो निगम के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर 67 गारबेज प्वाइंट की व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी क्यों नहीं बनाया जा पा रहा है?
वर्सन/दवा खरीदी में 15 दिनों की देरी हुई है। अगामी सप्ताहभर में दवा उपलब्ध हो जाएगी। हर पार्षद के माध्यम से वार्डो में दवा छिड़काव एवं डेंगू जैसी बीमारी से बचाव को लेकर जागरूक किया जाएगा।
सौरभ आलोक साव
प्रभारी सफाई विभाग नगर निगम




