फ्लाई ऐश का खेल, उद्योग से निकली राख, रास्ते में गायब!
रायगढ़ के 30 उद्योगों से सालाना 1.90 करोड़ टन फ्लाई ऐश, गलत निपटान पर अप्रैल से अब तक 10 लाख का जुर्माना
रायगढ़/ औद्योगिक जिले रायगढ़ में फ्लाई ऐश अब केवल उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट नहीं, बल्कि इसके परिवहन और निपटान की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मुद्दा बन गया है। जिले के करीब 30 उद्योगों से हर साल लगभग 1 करोड़ 90 लाख टन फ्लाई ऐश निकलती है। इतनी बड़ी मात्रा के उपयोग और सुरक्षित निपटान के लिए नियम-कायदे तय हैं, निगरानी की व्यवस्था है और उल्लंघन पर कार्रवाई भी होती है। इसके बावजूद फ्लाई ऐश के अवैध डंपिंग की शिकायतें और मामले सामने आ रहे हैं।
गोरतलब हो केि वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अब तक गलत तरीके से फ्लाई ऐश के निपटान के मामलों में जिले के उद्योगों पर करीब 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। कार्रवाई के बावजूद सवाल यह है कि आखिर उद्योगों से निकलने के बाद फ्लाई ऐश निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले रास्ते में ही कैसे गायब हो जाती है?
उद्योग से निकली राख का रास्ता कौन देख रहा?
फ्लाई ऐश के गलत निपटान में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसका परिवहन है। उद्योगों से निकलने के बाद फ्लाई ऐश को निर्धारित उपयोगकर्ता अथवा निर्धारित स्थल तक पहुंचाया जाना होता है। लेकिन आरोप है कि कुछ परिवहनकर्ता दूरी और डीजल का खर्च बचाने के लिए अपने फायदे के हिसाब से रास्ते में ही फ्लाई ऐश को खाली कर देते हैं।इसका नतीजा यह होता है कि खेतों, खाली जमीन, सड़क किनारे और अन्य अनुपयुक्त स्थानों पर फ्लाई ऐश के ढेर नजर आने लगते हैं। कई बार ऐसी जगहों पर डंपिंग की जाती है जहां न तो इसे डालने की अनुमति होती है और न ही पर्यावरणीय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम।यानी कागजों में फ्लाई ऐश का गंतव्य कुछ और, जबकि जमीन पर उसका ठिकाना कुछ और होने का खतरा बना रहता है।फ्लाई ऐश को मनमाने तरीके से जमीन पर डालना इसका नियमसम्मत निपटान नहीं है। इसका उपयोग सीमेंट, कंक्रीट, ईंट, ब्लॉक, पैनल जैसे निर्माण उत्पादों, सड़क निर्माण एवं अन्य निर्धारित निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। कृषि में भी इसका उपयोग नियंत्रित तरीके से और मिट्टी की जांच के आधार पर किया जा सकता है।
कागज पर सही, जमीन पर अवैध डंपिंग?
फ्लाई ऐश के मामले में असली चुनौती केवल उत्पादन की मात्रा नहीं, बल्कि उसकी अंतिम उपयोगिता तक निगरानी है। यदि किसी उद्योग ने निर्धारित मात्रा में फ्लाई ऐश किसी उपयोगकर्ता को भेजी, लेकिन परिवहनकर्ता ने बीच रास्ते में उसे खाली कर दिया तो रिकॉर्ड में उसका निपटान हो सकता है, लेकिन जमीन पर उसका वास्तविक उपयोग नहीं हुआ।यही वजह है कि केवल उद्योग पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ परिवहनकर्ता, वाहन और वास्तविक डंपिंग स्थल की भी जवाबदेही तय करना जरूरी है।
10 लाख का जुर्माना, फिर भी सवाल कायम
अप्रैल 2026 से अब तक करीब 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना बताता है कि प्रशासन और पर्यावरण विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिवर्ष निकलने वाली फ्लाई ऐश को देखते हुए केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।यदि सालाना 1.90 करोड़ टन फ्लाई ऐश का उत्पादन हो रहा है तो इसके परिवहन की प्रत्येक खेप की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कितनी राख निकली, किस वाहन से निकली, कहां पहुंची और उसका वास्तविक उपयोग कहां हुआ—इन चारों बिंदुओं का रिकॉर्ड एक-दूसरे से मिलना चाहिए।




