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तमनार में रोज निकल रही 21,977 टन फ्लाईऐश, सालाना आंकड़ा 80 लाख टन पार

तमनार में रोज निकल रही 21,977 टन फ्लाईऐश, सालाना आंकड़ा 80 लाख टन पार


3 हजार से अधिक मेगावाट के जिंदल पावर प्लांट में राख प्रबंधन पर सवाल,परिवहन में नियम तोड़ने पर लग चुका है 9.63 लाख का जुर्माना

रायगढ़/ कोयला आधारित बिजली उत्पादन के साथ निकलने वाली फ्लाईऐश तमनार क्षेत्र के लिए लगातार बढ़ती पर्यावरणीय चुनौती बनती जा रही है। तमनार स्थित जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के 3400 मेगावाट के पावर कॉम्प्लेक्स से प्रतिदिन करीब 21,977 टन फ्लाईऐश निकलने का आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। यह मात्रा पूरे साल समान रहने की स्थिति में करीब 80.22 लाख टन सालाना बैठती है।


गौरतलब हो केि  JPL की तमनार परियोजना की कुल क्षमता 3400 मेगावाट है।यह आंकड़ा किसी अनुमानित फार्मूले पर आधारित नहीं है, बल्कि बजरंग अग्रवाल बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत संयुक्त समिति की रिपोर्ट में दर्ज है। रिपोर्ट में फ्लाईऐश उत्पादन 21,977 टी पी डी बताया गया है और 2023-24 के फ्लाईऐश ऑडिट के आधार पर उपयोग 101 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
JPL का तमनार पावर कॉम्प्लेक्स 3400 मेगावाट का है, जिसमें 1000 मेगावाट का Stage-I और 2400 मेगावाट का Stage-II शामिल है। NGT के एक आदेश में भी Jindal Power के तमनार स्थित संयंत्र की स्थापित क्षमता 3400 MW दर्ज है।इसलिए केवल 3400 मेगावाट को 365 दिन से गुणा करके राख का उत्पादन निकालना वैज्ञानिक तरीका नहीं होगा। फ्लाईऐश की वास्तविक मात्रा के लिए वास्तविक कोयला खपत और कोयले की राख सामग्री महत्वपूर्ण है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में JPL की अलग-अलग इकाइयों के लिए कोयला खपत और राख उत्पादन के आंकड़े भी दर्ज किए गए हैं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अलग-अलग वर्षों में प्लांट संचालन और कोयले की गुणवत्ता के अनुसार राख की मात्रा में बड़ा अंतर आ सकता है।मामला केवल रोज निकलने वाली राख तक सीमित नहीं है। संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2024 में जे एस पी एल
के तमनार स्थित ऐश पोंड में करीब 161 लाख टन राख संग्रहित थी। रिपोर्ट में ऐश पोंड की क्षमता करीब 185 लाख घन मीटर दर्ज की गई है।रिपोर्ट के अनुसार JPL के पास चार ऐश पोंड लैगून हैं, जिनका क्षेत्रफल करीब 400 एकड़ बताया गया है। फ्लाईऐश के उपयोग के लिए कंपनी द्वारा ईंट संयंत्र, डी-कोल्ड माइनिंग क्षेत्र, सीमेंट संयंत्र आदि माध्यमों का उल्लेख किया गया है।
फ्लाईऐश के उपयोग के बावजूद पुराने स्टॉक की मौजूदगी बताती है कि तमनार जैसे बड़े ताप विद्युत संयंत्र में करंट ऐश के साथ लेगेसी ऐश का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।

परिवहन में नियमों की अनदेखी पर JPL पर कार्रवाई

फ्लाईऐश के परिवहन को लेकर JPL पर पहले ही पर्यावरणीय कार्रवाई हो चुकी है। अप्रैल 2024 में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने J P L, तमनार पर 9.63 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई थी।CECB के क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान JPL से संबंधित वाहनों द्वारा 642 मीट्रिक टन गीली फ्लाईऐश को बिना तिरपाल ढके परिवहन किया जाना पाया गया था। इस पर 1500 रुपये प्रति टन की दर से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई। कार्रवाई के दौरान एक दर्जन से अधिक वाहनों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई थी।CECB के अधिकारी ने उस समय बताया था कि सड़क किनारे और खाली जमीनों पर फ्लाईऐश के अवैध डंपिंग तथा परिवहन के दौरान गीली राख सड़क पर गिरने से प्रदूषण की समस्या बढ़ रही थी।

गलत डंपिंग से पर्यावरण पर खतरा

केंद्र सरकार ने भी फ्लाईऐश के अवैज्ञानिक निस्तारण को पर्यावरणीय समस्या माना है। 2025 में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि फ्लाईऐश का अवैज्ञानिक निस्तारण भूमि उपयोग, स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए समस्या पैदा कर सकता है तथा इसमें सांस के साथ शरीर में जाने वाले सूक्ष्म कण और कुछ विषैले तत्व मौजूद हो सकते हैं।
तमनार में रोजाना हजारों टन फ्लाईऐश निकलने की स्थिति में इसके परिवहन के दौरान वाहनों को पूरी तरह ढंकना, निर्धारित मार्ग से परिवहन करना और राख को केवल स्वीकृत उपयोग अथवा निस्तारण स्थल तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

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