
पुसौर में नगर पंचायत की विशेष बैठक पर उठे सवाल, सीएमओ की गैरमौजूदगी से पार्षदों में नाराजगी
पुसौर/ नगर पंचायत पुसौर में परिषद की विशेष बैठक बुलाने के लिए बाकायदा पत्र जारी किए जाने के बावजूद निर्धारित बैठक के दिन जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी का मामला सामने आया है। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 6 अगस्त को जारी पत्र में 11 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे नगर पंचायत कार्यालय में विशेष बैठक आयोजित किए जाने की सूचना दी गई थी। बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा एवं निर्णय लिया जाना प्रस्तावित था। पत्र जारी होने के बाद निर्धारित तिथि पर बैठक में शामिल होने पहुंचे नगर पंचायत के पार्षद और एल्डरमैन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण बिना बैठक किए ही वापस लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त पत्र के अनुसार नगर पंचायत पुसौर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की ओर से 6 अगस्त को विशेष बैठक के संबंध में सूचना जारी की गई थी। पत्र में बैठक की तारीख 11 अगस्त 2026, समय दोपहर 2 बजे तथा स्थान नगर पंचायत कार्यालय निर्धारित किया गया था। पत्र में बैठक के एजेंडे में आगामी स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के संबंध में विचार एवं निर्णय, वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्माण कार्यों के प्रस्ताव एवं अन्य विषयों पर विचार, पूर्व स्वीकृत निर्माण कार्यों की प्रगति एवं अन्य कार्यों की समीक्षा सहित अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया था। पत्र में संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्धारित तिथि एवं समय पर बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए थे।ऐसे में सवाल यह है कि जब नगर पंचायत प्रशासन ने स्वयं विशेष बैठक की तारीख, समय और एजेंडा तय कर पार्षदों एवं संबंधित अमले को सूचना जारी की थी, तो बैठक के समय नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी स्वयं मौजूद क्यों नहीं रहे? इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि सीएमओ द्वारा बैठक में अपनी अनुपस्थिति की स्थिति में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को बैठक संबंधी जिम्मेदारी सौंपे जाने का कोई स्पष्ट लिखित आदेश भी जारी नहीं किया गया था। परिणामस्वरूप बैठक में पहुंचे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बिना चर्चा और निर्णय के वापस लौटना पड़ा।
मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि छत्तीसगढ़ नगरपालिक अधिनियम, 1961 की धारा 69 के अनुसार मुख्य नगर पालिका अधिकारी को परिषद की प्रत्येक बैठक में उपस्थित रहना होता है। वहीं अधिनियम की धारा 92 के तहत सीएमओ परिषद की कार्यपालिका और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी होता है। धारा 92(2) में यह व्यवस्था भी है कि सीएमओ अपने नियंत्रण और अधीक्षण में नगरपालिका के किसी अधिकारी को अपने अधिकार, कर्तव्य या कार्य लिखित रूप से सौंप सकता है। ऐसे में यदि किसी अपरिहार्य कारण से सीएमओ बैठक में उपस्थित नहीं हो सकते थे, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या उनकी ओर से किसी सक्षम अधिकारी को लिखित रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई थी? यदि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ था, तो बैठक की व्यवस्था को लेकर नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अधिकारी रहे नदारद
केवल सीएमओ या इंजीनियर की अनुपस्थिति के आधार पर बैठक को स्वतः अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा। अधिनियम में परिषद की बैठक के लिए कोरम की व्यवस्था भी निर्धारित है। धारा 61 के अनुसार कुल पार्षदों की संख्या का एक-तिहाई कोरम आवश्यक है और कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक स्थगित की जानी होती है। वहीं बैठक की कार्यवाही में उपस्थित पार्षदों के नाम तथा प्रत्येक विषय पर लिए गए निर्णय दर्ज किए जाने का भी प्रावधान है।इस मामले में यदि बैठक के समय पर्याप्त पार्षद मौजूद थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण बैठक ही नहीं कराई गई,




