जनजाति विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे शासन-प्रशासन : रवि भगत

रायगढ़। मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना के अंतर्गत चयनित जनजाति विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों की 14 जुलाई 2026 को आयोजित काउंसलिंग को निरस्त कर दिया गया, लेकिन अब तक पुनः काउंसलिंग आयोजित करने अथवा विद्यार्थियों को विद्यालय आवंटित करने के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
इस संबंध में रवि भगत ने रायगढ़ कलेक्टर के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), लैलूंगा के माध्यम से आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
रवि भगत ने कहा कि काउंसलिंग निरस्त होने के बाद काफी समय बीत चुका है। चयनित विद्यार्थी और उनके अभिभावक असमंजस की स्थिति में हैं। वहीं अन्य विद्यार्थी अपने विद्यालयों में नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि उत्कर्ष योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थी विद्यालय आवंटन और प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने तथा भविष्य में अन्य विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक सामंजस्य स्थापित करने में कठिनाई उत्पन्न होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि जनजाति विभाग की जिम्मेदारी है कि चयनित विद्यार्थियों को समय पर उनका अधिकार और योजना का लाभ मिले। विद्यार्थियों की पढ़ाई में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
प्रमुख मांगें
रवि भगत ने प्रशासन से निम्न मांगें तत्काल पूरी करने की मांग की है
निरस्त की गई काउंसलिंग शीघ्र पुनः आयोजित की जाए।
चयनित विद्यार्थियों को यथाशीघ्र विद्यालय आवंटित किया जाए।
विद्यालयों में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया तत्काल पूर्ण कराई जाए।
काउंसलिंग निरस्त होने तथा पुनः काउंसलिंग में हो रही देरी के संबंध में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी दी जाए।
विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
रवि भगत ने कहा कि चयनित विद्यार्थियों का समय लगातार निकल रहा है और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसलिए प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जनजाति विभाग द्वारा विद्यार्थियों को शीघ्र उनका अधिकार नहीं दिया गया और काउंसलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने अधिकार के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
रवि भगत
रायगढ़, छत्तीसगढ़




