प्रथम अपील में झूठा प्रतिवेदन देने की शिकायत, पंचायत सचिव पर कार्रवाई की तलवार
उच्च अधिकारी को गुमराह करने का आरोप, जिला पंचायत सीईओ ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
रायगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के मामले में प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान उच्च अधिकारी के समक्ष कथित रूप से गलत तथ्य प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सियारपाली के जनसूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिव के विरुद्ध आवेदक द्वारा की गई शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संबंधित अधिकारी से तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मामला रायगढ़ के पत्रकार प्रकाश थवाईत द्वारा ग्राम पंचायत सियारपाली में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से जुड़ा है। निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने पर आवेदक ने सीईओ, जनपद पंचायत रायगढ़ के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की थी।
प्रथम अपील पर कार्रवाई करते हुए कार्यालय सीईओ जनपद पंचायत रायगढ़ ने 1 जुलाई 2026 को जनसूचना अधिकारी, ग्राम पंचायत सियारपाली को निर्देशित किया था कि सुनवाई की तिथि से पूर्व आवेदक को वांछित जानकारी उपलब्ध कराते हुए उसकी पावती प्रस्तुत करें अथवा 9 जुलाई 2026 को समस्त अभिलेखों के साथ अनिवार्य रूप से सुनवाई में उपस्थित हों।
सुनवाई में कुछ और, आवेदक को पत्र कुछ और
मामले में विवाद तब गहराया जब 9 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जनसूचना अधिकारी द्वारा लिखित रूप से यह कथन प्रस्तुत किया गया कि आवेदक को 5 जुलाई 2026 को डाक के माध्यम से जानकारी भेज दी गई है।
वहीं, उपलब्ध पत्राचार के अनुसार पंचायत सचिव द्वारा आवेदक को 7 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर पंचायत कार्यालय में उपस्थित होकर संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन करने तथा शुल्क अदा कर जानकारी प्राप्त करने के लिए कहा गया था।
आवेदक ने जब सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में निःशुल्क जानकारी दिए जाने के प्रावधान का हवाला देते हुए पुनः जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की, तब भी पंचायत सचिव द्वारा पत्र के माध्यम से शुल्क अदा कर जानकारी प्राप्त करने के लिए कहा गया।
ऐसे में एक ओर प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान उच्च अधिकारी के समक्ष आवेदक को जानकारी भेजे जाने की बात लिखित रूप से कही गई, जबकि दूसरी ओर आवेदक को शुल्क जमा कर जानकारी प्राप्त करने के लिए पत्राचार किए जाने का मामला सामने आया। इसी विरोधाभास को आधार बनाते हुए आवेदक ने जिला स्तर पर शिकायत प्रस्तुत की।
पंचायत सेवा नियमों के उल्लंघन का उल्लेख
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत सीईओ कार्यालय द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में संबंधित पंचायत सचिव का कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 के नियम 3 के उपनियम (1) के खंड (एक), (दो) एवं (तीन) के विपरीत बताते हुए कदाचरण की श्रेणी में आने का उल्लेख किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि ऐसा कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के तहत दंडनीय है।
संबंधित जनसूचना अधिकारी को तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिक को शासन-प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत कथन तथा आवेदक के साथ किए गए पत्राचार में विरोधाभास सामने आना गंभीर विषय माना जा रहा है।
अब निगाह इस बात पर है कि जिला पंचायत स्तर से जारी कारण बताओ नोटिस के बाद संबंधित पंचायत सचिव का जवाब क्या होता है और विभाग उनके विरुद्ध किस स्तर की कार्रवाई करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई केवल संबंधित अधिकारी के आचरण का मामला नहीं होगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि सूचना के अधिकार जैसे कानून के पालन में लापरवाही अथवा अधिकारियों को गलत तथ्य प्रस्तुत करना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।




