संपत्ति के में छूट के बाद वसूली की शिकायत पर ईडब्ल्यूएस मकानों का सर्वे, जांच में सामने आ रहा अतिरिक्त निर्माण
कांग्रेस के आरोपों के बाद निगम ने गठित की जांच टीम, सभी वार्डों में सर्वे हुआ तो बढ़ सकती है निगम की आय
रायगढ़/ नगर निगम में जलकर वसूली को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाया गया मुद्दा अब निगम की आय बढ़ाने का माध्यम बनता नजर आ रहा है। पूर्व सभापति जयंत ठेठवार, नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शाखा यादव तथा नगेन्द्र नेगी ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा 500 वर्गफीट से कम क्षेत्रफल के मकानों में रहने वाले परिवारों को संपत्तिकर में छूट का प्रावधान होने के बावजूद उनसे निर्धारित 60 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 200 रुपये प्रतिमाह जलकर वसूलने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेताओं ने इसे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बताते हुए निगम प्रशासन से व्यवस्था में सुधार की मांग की थी।
मामला सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त ने ईडब्ल्यूएस मकानों की वास्तविक स्थिति और निर्माण क्षेत्रफल की जांच के लिए टीम गठित कर सर्वे शुरू कराया है। निगम की टीम लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ईडब्ल्यूएस मकानों का भौतिक सत्यापन कर रही है। सर्वे के दौरान कई मकानों में निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक निर्माण होने की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। यानी जिन मकानों का निर्माण ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत निर्धारित सीमा के भीतर होना था, उनमें बाद में अतिरिक्त निर्माण किए जाने के मामले भी जांच के दायरे में आ रहे हैं।निगम सूत्रों के मुताबिक जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ईडब्ल्यूएस मकानों में वास्तविक निर्माण क्षेत्रफल क्या है और क्या संबंधित भवन अभी भी उस श्रेणी की निर्धारित पात्रता एवं कर व्यवस्था के दायरे में आते हैं। यदि किसी मकान में निर्धारित 500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में अतिरिक्त निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार उसकी संपत्तिकर एवं अन्य कर संबंधी देनदारी का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है। इससे निगम के राजस्व में भी वृद्धि की संभावना है।बताया जा रहा है कि शुरुआती सर्वे में ही कई स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण के संकेत मिलने के बाद अब पूरे शहर में स्थित ईडब्ल्यूएस मकानों की व्यापक जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि निगम सभी वार्डों में ईडब्ल्यूएस मकानों का व्यवस्थित सर्वे कर वास्तविक निर्माण क्षेत्रफल का रिकॉर्ड तैयार करता है और अतिरिक्त निर्माण पर नियमानुसार कर निर्धारण करता है, तो निगम के खजाने में बड़ी राशि जुड़ सकती है। अनुमान है कि व्यापक स्तर पर जांच होने पर अतिरिक्त निर्माण के एवज में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक की राजस्व आय की संभावना बन सकती है। हालांकि वास्तविक राशि का निर्धारण सर्वे पूरा होने और प्रत्येक मकान के दस्तावेज एवं निर्माण क्षेत्रफल के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
अतिरिक्त निर्माण पर क्या होगी सख्ती
इस पूरे मामले ने एक अलग तस्वीर भी सामने रख दी है। कांग्रेस ने जहां जलकर की कथित विसंगति को लेकर निगम प्रशासन को घेरा था, वहीं उसके बाद शुरू हुए ईडब्ल्यूएस मकानों के सर्वे में अतिरिक्त निर्माण की स्थिति सामने आने से निगम के लिए राजस्व बढ़ाने का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि निगम प्रशासन सर्वे को कितनी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ पूरा करता है तथा जांच में अनियमित निर्माण पाए जाने वाले मकानों पर किस प्रकार की कार्रवाई और कर निर्धारण किया जाता है।फिलहाल ईडब्ल्यूएस मकानों का सर्वे जारी है। सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितने ईडब्ल्यूएस मकानों में निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक निर्माण हुआ है और उससे निगम को वास्तविक रूप से कितने अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।




