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डैम में अधिकतम जलभराव स्तर से महज 1.2 मीटर नीचे पानी, लगातार बारिश से बढ़ी प्रशासन की चिंता

डैम में अधिकतम जलभराव स्तर से महज 1.2 मीटर नीचे पानी, लगातार बारिश से बढ़ी प्रशासन की चिंता

केलो डैम में 231.8 मीटर पानी, छह गेट खुले, चक्रपथ लबालब, शहर के कई मार्गों पर जाम

लबालब चक्रपथ, फिर भी जान जोखिम में डाल रहे बाइक सवार, चक्रपथ बंद, शहर के दूसरे रास्तों पर बढ़ा दबाव, ट्रैफिक व्यवस्था हुई ध्वस्त

रायगढ़/ केलो डैम में जलस्तर 231.8 मीटर पहुंच गया है, जबकि डैम का अधिकतम जलभराव स्तर 233 मीटर है। लगातार बारिश से डैम में पानी की आवक बढ़ने के बाद मंगलवार सुबह करीब 7 बजे छह गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। इसके बाद केलो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और शहर के निचले हिस्सों में इसका असर दिखाई देने लगा। सबसे ज्यादा असर चक्रपथ मार्ग पर पड़ा, जहां सड़क लबालब पानी में डूब गई और प्रशासन को आवागमन रोकने के लिए बैरिकेड लगाना पड़ा बावजूद इसके कई वाहन चालक जोखिम लेने से चूकते नजर नहीं आए।

गौरतलब हो कि केलो परियोजना के जलाशय की अधिकतम जलभराव क्षमता 233 मीटर है। परियोजना के के अनुसार जलाशय की जल भंडारण क्षमता करीब 60.78 मिलियन घनमीटर और उपयोगी यानी लाइव स्टोरेज क्षमता करीब 46.61 मिलियन घनमीटर है।
लगातार बारिश के कारण डैम में पानी की आवक बढ़ने पर छह गेट खोले गए। गेट खुलने के बाद केलो नदी में पानी का बहाव बढ़ा और चक्रपथ का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। डैम और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।केलो डैम में जलस्तर अधिकतम जलभराव स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में ऊपरी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने पर डैम में पानी की आवक और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर केलो नदी के जलस्तर पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन के लिए नदी किनारे के इलाकों के साथ-साथ चक्रपथ और अन्य निचले क्षेत्रों की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जलमग्न चक्रपथ पर लोगों को जाने से रोकना और वैकल्पिक मार्गों पर बढ़े यातायात को व्यवस्थित करना है। प्रशासन के अलर्ट के बावजूद यदि लोग पानी में उतरकर रास्ता पार करने का जोखिम उठाते हैं तो यह किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

लबालब चक्रपथ, फिर भी जान जोखिम में डाल रहे बाइक सवार

चक्रपथ मार्ग पर पानी इतना बढ़ गया कि सड़क का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो गया। इसके बावजूद कुछ बाइक सवार पानी में उतरकर मार्ग पार करने से भी परहेज नहीं कर रहे थे। तेज बहाव और सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देने के कारण ऐसे लोगों के साथ हादसे का खतरा बना रहा।प्रशासन की ओर से पहले ही अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद जलमग्न मार्ग को पार करने की कोशिश लोगों की लापरवाही को भी उजागर करती रही।

चक्रपथ बंद, शहर के दूसरे रास्तों पर बढ़ा दबाव

चक्रपथ बंद होने का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। चक्रपथ से होकर गुजरने वाला यातायात दूसरे मार्गों पर डायवर्ट होने से सुभाष चौक मार्ग, ओवरब्रिज क्षेत्र, शनि मंदिर मार्ग, चक्रधर नगर फाटक और जेलपारा मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया। कई स्थानों पर वाहनों की कतार लगने से जाम की स्थिति निर्मित हो गई।चक्रपथ सामान्य दिनों में शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग है। इसके जलमग्न होने से मुख्य मार्गों पर अचानक यातायात का दबाव बढ़ गया।

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