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शक्कर की बढ़ी कीमतों ने फीका किया मिठास का स्वाद, जमाखोरों की चांदी, उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

शक्कर की बढ़ी कीमतों ने फीका किया मिठास का स्वाद, जमाखोरों की चांदी,उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, मांग और आपूर्ति के बीच मुनाफाखोरी की आशंका

रायगढ़ /शक्कर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी रोजमर्रा की जरूरतों में आसानी से खरीदी जाने वाली शक्कर अब बढ़ी कीमतों के कारण लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। बाजार में कीमत बढ़ने के साथ ही शक्कर की मिठास भी आम लोगों के लिए महंगी होती जा रही है।

जानकारी के मुताबिक वर्तमान में शक्कर का थोक बाजार भाव करीब 64 रुपये प्रति किलो के आसपास बताया जा रहा है। वहीं, बाजार में कुछ जमाखोर और स्टॉक रखने वाले व्यापारी इसी शक्कर को 68 से 70 रुपये प्रति किलो तक की ऊंची कीमत पर बेच रहे हैं। इससे थोक और खुदरा बाजार के बीच कीमतों का अंतर बढ़ता नजर आ रहा है।सबसे गंभीर सवाल उन व्यापारियों को लेकर उठ रहा है, जिनके पास शक्कर का पुराना स्टॉक पहले से मौजूद है। बाजार में चर्चा है कि कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का हवाला देकर पुराने स्टॉक को भी नई बढ़ी हुई दरों पर खपाया जा रहा है। यदि ऐसा है तो इसका सीधा फायदा जमाखोरी करने वाले व्यापारियों को मिल रहा है, जबकि इसकी मार आम उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ रही है।फिलहाल शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों के बजट को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन बाजार में उपलब्ध स्टॉक और बिक्री दर की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा तथा यदि कहीं जमाखोरी या मनमानी कीमत वसूली पाई जाती है तो संबंधित व्यापारियों पर कार्रवाई की जाएगी।बढ़ती कीमतों के बीच अब खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की बाजार निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों के पास उपलब्ध स्टॉक, खरीद दर और बिक्री दर की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रशासन को शक्कर के स्टॉक और कीमतों की नियमित जांच कर जमाखोरी अथवा अनुचित मुनाफाखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

मांग और आपूर्ति के बीच मुनाफाखोरी की आशंका

शक्कर की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच बाजार में मांग और आपूर्ति को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ शक्कर की खपत बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में यदि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद कृत्रिम रूप से कमी का माहौल बनाया जाता है, तो कीमतों में और उछाल आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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