छठ तालाब के सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल: 55 लाख के निर्माण के बाद फिर ढही नाली,

दो लाख 35 हजार का मेंटेनेश भी न आया काम,गंदा पानी तालाब में मिलने से बढ़ा बीमारी का खतरा

रायगढ़/ नगर पंचायत किरोड़ीमल में विकास कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नगर के आस्था के प्रमुख केंद्र छठ तालाब में करीब तीन वर्ष पूर्व लगभग 55 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण एवं अन्य निर्माण कार्य कराए गए थे। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी कमजोर साबित हुई कि चार माह पहले ही तालाब से जुड़ी जल निकासी नाली का एक हिस्सा ढह गया। इसके बाद नगर पंचायत ने 2.35 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कार्य कराया, लेकिन यह मरम्मत भी टिकाऊ साबित नहीं हुई। अब दोबारा निर्माण में अनियमितता सामने आने से नाली का गंदा पानी सीधे तालाब में मिल रहा है, जिससे जल प्रदूषण के साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
गौरतलब हो कि तालाब की वर्तमान स्थिति निर्माण कार्य की वास्तविकता को उजागर कर रही हैं। एक ओर नाली का क्षतिग्रस्त हिस्सा धंस चुका है, जिससे गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है। वहीं दूसरी ओर तालाब के किनारे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट जमा दिखाई दे रहे हैं। इससे न केवल तालाब का पानी दूषित हो रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में दुर्गंध और मच्छरों के पनपने की आशंका भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगामी दिनों में यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।छठ तालाब किरोड़ीमल नगर पंचायत के लोगों की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष यहां छठ महापर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना करने पहुंचते हैं। ऐसे में तालाब में नाली का गंदा पानी मिलने और चारों ओर फैली गंदगी को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि जिस तालाब का सौंदर्यीकरण लाखों रुपये खर्च कर किया गया था, वही आज बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। इससे सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।नगर पंचायत अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण की बात भी कही जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
क्या नोटिस का होगा असर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पंचायत प्रशासन का नोटिस संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर पर कितना प्रभाव डालता है। यदि समय रहते गुणवत्तापूर्ण मरम्मत और तालाब की साफ-सफाई नहीं कराई गई तो आने वाले छठ पर्व से पहले यह धार्मिक स्थल अव्यवस्था और प्रदूषण का शिकार बना रह सकता है।
वर्सन/ इस संबंध में इंजीनियर और ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है।वे अपने खर्च पर क्षतिग्रस्त नाली का निर्माण करेंगे।
देवेंद्र सिंह चंदेल
सी एम ओ
नगर पंचायत किरोड़ीमल नगर




