क्रोंधा गांव में शिक्षा पर भारी बारिश, पुल के अभाव में रोज जोखिम भरा सफर
उफनते नाले को पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर 50 बच्चे
रायगढ़/ सरकार शिक्षा को प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार बताती है और सुरक्षित व सुगम शिक्षा व्यवस्था के दावे किए जाते हैं। लेकिन जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत क्रोंधा की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां करती है। यहां करीब 50 छात्र-छात्राएं हर बारिश के मौसम में जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। घुटनों तक बहते पानी के बीच बच्चों का यह सफर केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि हर दिन जिंदगी और खतरे के बीच संघर्ष जैसा बन गया है।
गौरतलब हो कि बारिश शुरू होते ही गांव को स्कूल से जोड़ने वाला नाला उफान पर आ जाता है। ऐसे में छात्र-छात्राएं साइकिल नाले के एक किनारे छोड़कर पैदल पानी के बीच से गुजरते हैं। तेज बहाव और फिसलन के कारण हर कदम पर हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद शिक्षा के प्रति बच्चों की लगन उन्हें रोज इस जोखिम को उठाने के लिए मजबूर करती है।सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है। कई छात्राएं स्कूल ड्रेस भीगने और खराब होने से बचाने के लिए अलग कपड़े साथ लेकर चलती हैं। नाला पार करने के बाद वे स्कूल पहुंचकर ड्रेस बदलती हैं और फिर कक्षाओं में शामिल होती हैं। लेकिन जब बारिश अधिक होने से पानी का स्तर बढ़ जाता है, तब कई दिनों तक स्कूल जाना संभव नहीं हो पाता। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और उपस्थिति पर पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि इस नाले पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष समस्या रखी गई तथा आश्वासन भी मिले, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। मजबूरी में बच्चों के सामने करीब 15 किलोमीटर लंबे वैकल्पिक मार्ग से जाने का विकल्प बचता है, जो प्रतिदिन तय करना संभव नहीं है। ऐसे में अधिकांश बच्चे या तो जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं या फिर स्कूल से अनुपस्थित रहने को विवश हो जाते हैं। यह समस्या हर मानसून में सामने आती है, लेकिन समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
जान जोखिम में डालकर शिक्षा के लिए समर्पण
क्रोंधा के बच्चों का शिक्षा के प्रति समर्पण निश्चित रूप से प्रेरणादायी है, लेकिन किसी भी संवेदनशील व्यवस्था में शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को उफनते नाले से गुजरने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या प्रशासन किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करेगा, या फिर समय रहते इन बच्चों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराएगा।वही ग्रामीणों का सवाल है कि जब तक पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक इन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
वर्शन
इस संबंध में सेतु विभाग के कार्यपालन अभियंता संतोष भगत का कहना है कि पुल निर्माण का प्रस्ताव और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।




