क्रिकेट सट्टा में कार्यवाही पर विराम, क्या कार्यवाही के डर से सटोरिए कर रहे आराम
रायगढ़/शहर में 20–20 क्रिकेट का रोमांच इन दिनों अपने चरम पर है।हर मुकाबले के साथ दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसी उत्साह की आड़ में क्रिकेट सट्टा का अवैध कारोबार एक बार फिर सिर उठाता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि मौजूदा 20–20 सीजन में अब तक पुलिस की कोई ठोस और बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई, जिससे कानून व्यवस्था और पुलिसिया सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के कई इलाकों में सट्टा खाईवाल मोबाइल फोन के जरिए दांव लगवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क कथित तौर पर सुरक्षित ठिकानों से संचालित हो रहा है। कार्रवाई के अभाव में सट्टेबाजों का मनोबल बढ़ा हुआ है और वे बेखौफ होकर इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
कार्यवाही पर लगा विराम
गौरतलब है कि पूर्व में रायगढ़ पुलिस द्वारा क्रिकेट सट्टा के खिलाफ समय-समय पर सख्त कार्रवाई की जाती रही है।
कई मामलों में सट्टा खाईवालों की गिरफ्तारी, मोबाइल फोन और नकदी की जब्ती जैसी कार्रवाई पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन मौजूदा 20–20 सीजन में किसी बड़ी कार्रवाई का न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
क्या पुलिस के डर से सट्टा पूरी तरह बंद हो चुका है?
या फिर सट्टा नेटवर्क अब और ज्यादा शातिर तरीके से संचालित हो रहा है?अथवा जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते सट्टेबाजों को खुली छूट मिल रही है? क्रिकेट सट्टा का सबसे गंभीर दुष्प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ रहा है। आसान पैसे के लालच में कई युवा इस अवैध कारोबार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सट्टेबाजी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इसके चलते अपराध, कर्ज, मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद जैसी घटनाओं में भी इजाफा होता है।
वर्शन/करेक्ट सट्टा पर अंकुश लगाने सभी थाना प्रभारियों को अपने थाना क्षेत्र में मुखबिर तंत्र का जाल मजबूत करने निर्देश दिए गए है। साईबर तुम को भी सक्रिय कर सट्टा जुआ से जुड़ी शिकायत मिलने पर तत्काल कार्यवाही करने निर्देशित किया गया है।
अनिल सोनी
एडिशनल एस पी




