एमसीएच में सोनोग्राफी ठप, मरीज निजी सेंटरों के भरोसे
तीन रेडियोलॉजिस्ट होने के बावजूद अवकाश और जिम्मेदारियों के फेर में व्यवस्था चरमराई, गर्भवती महिलाओं की बढ़ी परेशानी
रायगढ़/ कहने को तो 100 बिस्तरों के मातृत्व शिशु चिकित्सालय में 3 रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी है।परन्तु एक को जहां गायनोलिजिस्ट का जिम्मा दिया गया है तो वहीं दो रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर होने की बात बताई जा रही है।लिहाजा तीन दिनों से एम सी एच में सोनोग्राफी सुविधा को लेकर मरीजों को अन्यत्र सेंटरों का रुख करने के साथ ही सोनोग्राफी के लिए मोटी रकम भी चुकानी पड़ रही है।वही व्यवस्था में सुधार को लेकर अब एम सी एच जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों की राह देख रहा है।
गौरतलब हो कि रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में मेडिकल कॉलेज मार्ग स्थित एम सी एच हॉस्पिटल में सोनोग्राफी सुविधा ठप पड़ी है।जिसे लेकर मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।इस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को प्रसव सुविधा उपब्ध है।परन्तु सोनोग्राफी बंद होने की वजह से उन्हें मेडिकल कॉलेज अथवा दूसरे सोनोग्राफी सेंटरों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।यही नहीं हॉस्पिटल की शहर से दूरी होने की वजह से मरीजों को यहां वाहन सुविधा भी उपब्ध नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में उनकी परेशानी और बढ़ रही है।बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल में तीन रेडियोलॉजिस्ट मौजूद है।परन्तु हॉस्पिटल में गाइनोलॉजिस्ट के अभाव में एक चिकित्सक को उसकी जिम्मेदारी दी गई तो वही दो चिकित्सक अवकाश पर गये है।परन्तु आश्चर्य की बात है जब एक चिकित्सक गाइनोलॉजिस्ट का कार्य कर रहा है।तब अन्य दो रेडियोलॉजिस्ट को एक साथ अवकाश दिया जाना अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।जिसकी वजह से वर्तमान में सोनोग्राफी सुविधा बंद पड़ी है।
रोजाना 7 से 8 सोनोग्राफी
जानकारी के मुताबिक मातृत्व शिशु चिकित्सालय में जहां रोजाना 70 से 80 ओ पी डी और 15 से 20 मरीज आई पी डी में आते है।इसके अलावा 12 से 15 डिलवरी संबंधित प्रकरण का निपटारा किया जाता है।यही नहीं सोनोग्राफी को लेकर भी 7 से 8 की संख्या में मरीज पहुंचते है।परन्तु 100 बिस्तरों के अस्पताल में यह आंकड़ा किसी भी लिहाज से कमतर जान पड़ता है।सूत्रों की माने तो कई ऐसे चिकित्सक है जो सरकारी मशीनरी की बजाय कमीशन देने वाले सोनोग्राफी सेंटरों को अधिक तरजीह देते है।नतीजन मुफ़्त सेवा के बावजूद भी सोनोग्राफी के आंकड़े में लगातार गिरावट के रूप में देखने को मिल रही है।
प्रबंधन की लापरवाही
वर्तमान में बीते तीन दिनों से बंद पड़े सोनोग्राफी सेंटर का कारण अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के रूप में सामने आ रहा है।जहां रेडियोलॉजिस्ट के अभाव के बावजूद भी मौजूदा दोनों चिकित्सकों को अवकाश दिया जाना समझ से परे है।क्या अस्पताल प्रबंधन इस स्थिति से अवगत नहीं था।या फिर अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा को महत्त्व देना जरूरी नहीं समझा गया।
अब जिला चिकित्सालय से मदद की गुहार
एम सी एच में अब सोनोग्राफी व्यवस्था को बहाल करने जिला चिकित्सालय में मौजूद रेडियोलॉजिस्ट की सहायता लेने की बात कही है रही है।जो सप्ताह में दो से तीन दिवस अपनी सेवाएं यहां देंगे।ये तो हुई सप्ताह में दो से तीन दिनों की बात तो बाकी दिन मरीजों की सुविधा का क्या होगा।क्या उन्हें फिर निजी सेंटरों के चक्कर लगाना पड़ेगा।
वर्शन/ सोमवार से सोनोग्राफी सुविधा रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में बंद है।जिला चिकित्सालय में चर्चा कर यह मौजूद रेडियोलॉजिस्ट को एम सी एच में सप्ताह के दो से तीन दिनों तक कार्य करने चर्चा की जाएगी।
डॉक्टर अभिषेक अग्रवाल
एम सी एच




