टिमरलगा–गुड़ेली में अवैध खनन का जाल, बिना रॉयल्टी गिट्टी परिवहन जारी

क्रशरों से निकल रहे सैकड़ों वाहन, रॉयल्टी बचाने का खेल, खनिज जांच चौकियों की भूमिका पर उठे सवाल
रायगढ़/टिमरलगा और गुड़ेली क्षेत्र में अवैध खनन तथा बिना रॉयल्टी गिट्टी परिवहन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। चंद्रपुर, टिमरलगा और गुड़ेली स्थित खदानों से रोजाना बड़ी संख्या में गिट्टी और लाइमस्टोन से लदे वाहन बिना ट्रांजिट पास (टीपी) के निकल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि खनिज जांच चौकियों की मौजूदगी के बावजूद यह कारोबार खुलेआम जारी है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक टिमरलगा खनिज बैरियर में कर्मचारियों की तैनाती होने के बाद भी अवैध परिवहन में तेजी देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि रोज करीब सैकड़ों की संख्या में वाहन बिना वैध टीपी और कई बार ओवरलोड होकर रायगढ़, सक्ती और ओडिशा की ओर रवाना हो रहे हैं। इससे सरकार को भारी राजस्व हानि होने की आशंका जताई जा रही है।इधर गुड़ेली और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कई क्रशर प्लांटों पर भी अवैध बोल्डर खपाए जाने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ क्रशर संचालक एक ही टीपी का बार-बार उपयोग कर कई ट्रिप भेज रहे हैं। इससे खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।हालांकि खनिज विभाग द्वारा समय समय ओर बिना रॉयल्टी के अवैध गिट्टी परिवहन करने वाले वाहनों पर कार्यवाही तो की जाती है।परन्तु टीमरलगा खनिज जांच चौकी में यदि ईमानदारी से वाहनों के दस्तावेजों एवं रॉयल्टी की जांच होती तो संभवतः विभाग को कार्यवाही की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।परन्तु रॉयल्टी बचाने के फेर में थोड़ी सांठगांठ कर खनिज चौकी में तैनात कर्मियों द्वारा शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का चुना लगाया जा रहा है।
रॉयल्टी बचाने का खेल
सूत्रों के मुताबिक अवैध परिवहन के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। सबसे आम तरीका बिना टीपी के सीधे वाहन भेजना है। क्रशर से गिट्टी लोड कर वाहन रायगढ़, सक्ती और ओडिशा की ओर रवाना कर दिए जाते हैं। रास्ते में जांच होने की स्थिति में फर्जी पर्ची या पुराने टीपी दिखाकर वाहन को निकालने की कोशिश की जाती है।
दूसरा तरीका एक ही टीपी का बार-बार उपयोग करना है। नियम के अनुसार एक टीपी केवल एक ट्रिप के लिए मान्य होता है, लेकिन कुछ संचालक उसी टीपी को कई बार इस्तेमाल कर कई ट्रिप में गिट्टी भेज देते हैं। इससे एक ही रॉयल्टी में कई गाड़ियों का परिवहन हो जाता है।तीसरा तरीका फर्जी रॉयल्टी जारी कराने का बताया जा रहा है। आरोप है कि कुछ लीजधारक नाम मात्र का खनन दिखाकर बड़ी मात्रा में रॉयल्टी पर्चियां प्राप्त कर लेते हैं और बाद में उन्हें अन्य क्रशर संचालकों को बेच देते हैं। इस तरह बिना वास्तविक खनन के भी गिट्टी का परिवहन जारी रहता है।
जांच चौकी की खानापूर्ति
टीमरलगा गुडेली मार्ग में स्थित खनिज जांच चौकी में जांच के नाम पर महज रस्म अदायगी देखने को मिलती है।जहां से सेटिंग किए गए वाहनों को बिना जांच के ही कुछ पैसे लेकर छोड़ दिया जाता है।बताया जा रहा है कि इस चौकी में खनिज विभाग में पदस्थ कर्मचारी तो गैर मौजूद रहते है।अलबत्ता इसकी जिम्मेदारी बाहरी रखे गए लोगों के हाथों में होती है।




