तीन जिलों की पुस्तकों का भंडारण,
पर अपना नहीं गोदाम 80 हजार मासिक किराए पर चल रहा डिपो, अब तक करोड़ों का भुगतान फिर भी नहीं बना अपना भवन
रायगढ़/ जिले में संचालित छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का गोदाम पिछले एक दशक से अधिक समय से किराए के भवन में संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि तीन जिलों में पाठ्यपुस्तकों के वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाला यह महत्वपूर्ण डिपो आज तक अपने स्वयं के भवन से वंचित है।
गौरतलब हो कि शहर के कबीर चौक स्थित राज्य वेयरहाउस परिसर में संचालित यह गोदाम न केवल अव्यवस्था का शिकार है, बल्कि पूरे परिसर में गंदगी और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी भी अक्सर देखने को मिलती है। इससे किताबों के सुरक्षित भंडारण और वितरण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस डिपो से रायगढ़, जशपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति की जाती है। हर साल शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले लाखों किताबें यहां से विभिन्न स्कूलों तक भेजी जाती हैं। इसके बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा आज तक इसके लिए स्थायी गोदाम या कार्यालय भवन उपलब्ध नहीं कराया गया है।वर्तमान में यह गोदाम लगभग 80 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर संचालित हो रहा है। यदि पिछले लगभग 15 वर्षों के खर्च का अनुमान लगाया जाए तो शासन द्वारा किराए के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी राशि में एक सुव्यवस्थित और आधुनिक गोदाम के साथ कार्यालय भवन का निर्माण आसानी से किया जा सकता था।विडंबना यह भी है कि प्रदेशभर में संचालित पाठ्य पुस्तक निगम के डिपो में से अधिकांश के पास आज भी अपना भवन नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि शिक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग की व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में अब तक गंभीर पहल क्यों नहीं की गई।शिक्षा सत्र शुरू होने के दौरान यहां हजारों किताबों का भंडारण होता है, ऐसे में यदि परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया गया तो पुस्तकों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन को इस दिशा में शीघ्र पहल करते हुए रायगढ़ में स्थायी गोदाम और कार्यालय भवन का निर्माण कराना चाहिए।
तीन जिलों की किताबों का जिम्मा
रायगढ़ स्थित पाठ्यपुस्तक निगम डिपो से रायगढ़, जशपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति की जाती है। हर वर्ष नए शिक्षा सत्र से पहले यहां लाखों किताबों का भंडारण किया जाता है और इन्हें अलग-अलग स्कूलों तक भेजा जाता है। प्राथमिक से लेकर माध्यमिक कक्षाओं तक की पाठ्यपुस्तकों का वितरण इसी डिपो के माध्यम से होता है, जिससे तीनों जिलों के शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन इसकी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।
किराए में खर्च करोड़ों, फिर भी नहीं बना अपना भवन
रायगढ़ में पाठ्यपुस्तक निगम का गोदाम करीब 80 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर संचालित हो रहा है। पिछले लगभग 15 वर्षों में किराए के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी राशि में विभाग के लिए स्थायी गोदाम और कार्यालय भवन का निर्माण संभव था। इसके बावजूद प्रदेश के कई स्थानों की तरह यहां भी पाठ्यपुस्तक डिपो आज तक किराए के भवन में ही संचालित हो रहा है।
वर्सन/प्रदेश में संचालित सभी 6 बुक डिपो किराए के गोदाम के संचालित है।स्वयं के कार्यालय एवं गोदाम के लिए कोई भूमि आबंटित नहीं हुई।रायगढ़ में संचालित डिपो के गोदाम हेतु 80 हजार रुपए किराया प्रात8 माह शासन भुगतान करती है।
कौशलेंद्र शर्मा
डिपो प्रभारी रायगढ़, पाठयपुस्तक निगम




