अधिग्रहित भूमि के साथ निजी भूमि पर कर रहे काम, बिना चिन्हांकन शुरू किया काम
गेजामुड़ा के प्रभावित ग्रामीणों ने रिहाई के बाद अडानी कमानी पर लगाया आरोप
रायगढ़/ खरसिया ब्लॉक के ग्राम गेजामुड़ा में अडानी की प्रस्तावित रेल लाइन से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल धीमा पड़ गया है। आंदोलन के दौरान गांव के करीब दर्जनभर ग्रामीणों की गिरफ्तारी के बाद स्थिति में कुछ समय के लिए विराम जरूर लगा, लेकिन कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में अब भी गहरा रोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा अधिग्रहित भूमि का सही तरीके से चिन्हांकन नहीं किया गया है और कई स्थानों पर ऐसी जमीनों पर भी कार्य कराया जा रहा है, जिन्हें अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह की मनमानी जारी रही तो वे कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कराने की दिशा में भी कदम उठा सकते हैं।
बिना चिन्हांकन शुरू किया काम
गौरतलब हो कि प्रभावित किसानों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन को कार्य शुरू करने की इतनी जल्दबाजी थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रबंधन द्वारा अधिग्रहित भूमि पर चिन्हांकन करने की भी जहमत नहीं उठाई गई। जिस से कार्य शुरू कर देने से उनकी निजी भूमि भी प्रभावित हो रही है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है। बीते तीन महीनों से ग्राम गेजामुड़ा के प्रभावित ग्रामीण वर्तमान बाजार दर के अनुसार उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा कई बार आंदोलन स्थल से ग्रामीणों को हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
इसी बीच एक प्रभावित ग्रामीण ऋषि पटेल को कोतरा रोड पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर थाने लाए जाने की कार्रवाई ने आंदोलन को और उग्र बना दिया। अपने साथी की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण रातभर कोतरा रोड थाना के सामने डटे रहे और उसकी रिहाई की मांग करते रहे।अगले ही दिन जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम गेजामुड़ा में अडानी की रेल लाइन का निर्माण कार्य शुरू करा दिया। इस दौरान विरोध करने पहुंचे करीब दर्जनभर प्रभावित ग्रामीणों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
आंदोलन पर विराम आक्रोश बेलगाम
गिरफ्तारी के बाद आंदोलन में फिलहाल विराम जरूर आया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मूल मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन अधिग्रहित भूमि के अलावा किसानों की छोड़ी हुई या गैर-अधिग्रहित जमीन पर भी कार्य करा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अब प्रभावित ग्रामीण आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं और आवश्यक हुआ तो कंपनी के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराने की भी तैयारी कर रहे हैं।




