रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग पर रोज लग रहा जाम, औद्योगिक वाहनों की बेतरतीबी से राहगीर परेशान
पेट्रोलिंग और यातायात व्यवस्था पर उठने लगे सवाल, एंबुलेंस और स्कूल बसें भी फंस रहीं
पूंजीपथरा से घरघोड़ा तक जाम का झाम, हर दिन थम रही रफ्तार
रायगढ़। रायगढ़ से पूंजीपथरा होते हुए घरघोड़ा और तमनार जाने वाला स्टेट हाइवे इन दिनों लगातार जाम की समस्या से जूझ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही, सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और कमजोर ट्रैफिक प्रबंधन के कारण इस मार्ग पर रोजाना लंबा जाम लग रहा है। हालत यह है कि आम राहगीरों के साथ-साथ एंबुलेंस, स्कूल बसें और नौकरीपेशा लोग भी घंटों सड़क पर फंसे रहने को मजबूर हैं।
गेरवानी से आगे पूंजीपथरा क्षेत्र औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो चुका है। वहीं घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र में जामपाली, बिजारी और बरौद जैसी कोयला खदानें संचालित हैं। इन उद्योगों और माइंस से प्रतिदिन हजारों भारी वाहनों की आवाजाही होती है। कोयला, राखड़ और औद्योगिक सामग्री ढोने वाले ट्रेलर सड़क किनारे ही खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे कई जगह सड़क संकरी हो जाती है और थोड़ी सी रुकावट भी बड़े जाम में तब्दील हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने सड़क को ही अघोषित पार्किंग बना दिया है। सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे ज्यादा खराब रहती है। भारी वाहनों के आगे निकलने की होड़ और अव्यवस्थित ढंग से खड़े ट्रेलरों के कारण रायगढ़ से घरघोड़ा तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। जाम का असर केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। कई बार मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस घंटों जाम में फंस जाती हैं। रोजाना नौकरी के लिए आने-जाने वाले कर्मचारियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का कहना है कि समय पर गंतव्य तक पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने व्यस्त औद्योगिक मार्ग पर यातायात नियंत्रण और पेट्रोलिंग व्यवस्था लगभग नदारद नजर आती है। क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए पेट्रोलिंग टीम तैनात होने के बावजूद सड़क पर उनकी सक्रियता दिखाई नहीं देती। यही वजह है कि लोगों में प्रशासन और यातायात विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए, औद्योगिक वाहनों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए और नियमित ट्रैफिक मॉनिटरिंग की जाए, ताकि इस महत्वपूर्ण औद्योगिक मार्ग पर आवागमन सुचारु हो सके।बहरहाल इस जाम का झाम लोगो को विभिन्न परेशानी उठाकर जूझना पड़ रहा है।
सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और आगे बढ़ने की होड़ से जाम बनता है नासूर
रायगढ़ से घरघोड़ा और तमनार तक फैले औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिदिन करीब चार से पांच हजार भारी वाहनों की आवाजाही होती है। कोयला खदानों और उद्योगों से निकलने वाले ट्रेलर लगातार सड़क पर दौड़ते रहते हैं। सुबह के समय नो-एंट्री खुलने के बाद भारी वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, जिससे मार्ग पर दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है। कई बार आगे निकलने की होड़ में वाहन सड़क पर तिरछे खड़े हो जाते हैं और कुछ ही मिनटों में कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है।
उद्योगों को वालीयंटर तैनात कर करनी होगी ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कार्य
औद्योगिक क्षेत्र के कई उद्योग परिसरों में सुरक्षा कर्मी और वॉलंटियर तैनात हैं, लेकिन मुख्य सड़क पर ट्रैफिक नियंत्रण की स्थिति बेहद कमजोर नजर आती है। उद्योगों से निकलने वाले भारी वाहनों की वजह से रोज जाम लग रहा है, बावजूद इसके सड़क पर न तो पर्याप्त ट्रैफिक मॉनिटरिंग दिखती है और न ही वाहनों को व्यवस्थित करने की कोई ठोस व्यवस्था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन उद्योगों से हजारों भारी वाहन निकलते हैं, उन्हें सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन में भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उद्योगों को वालियंटर तैनात कर ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कार्य करना चाहिए।
जाम में फंस रही एंबुलेंस, मरीजों की बढ़ रही मुश्किल
रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग पर लगने वाले जाम का सबसे गंभीर असर मरीजों पर पड़ रहा है। कई बार आपातकालीन मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस भी लंबी कतार में फंस जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया तो उसकी जान पर भी बन सकती है। समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। इसके बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नजर नहीं आ रहा।




