6 माह बाद भी नहीं मिला राज्यांश भुगतान,मितानिन प्रशिक्षक हुई परेशान
मितानिन प्रशिक्षकों ने कलेक्टर के समक्ष लिखित आवेदन सौंप की राशि की मांग
रायगढ़/ जिले में मितानिन प्रशिक्षकों के राज्यांश राशि में वृद्धि तो कर दी गई।परन्तु दस्तावेजी अभिलेखों के अभाववश इन प्रशिक्षकों को अप्रैल 2024 से लेकर अगस्त तक 5 माह की राशि का भुगतान आज पर्यंत नहीं किया जा सका है।हालांकि इसके लिए आवेदनकर्ताओं ने जिला चिकित्सा अधिकारी सहित राजधानी के भी चक्कर लगाए।बावजूद इसके कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।जिसे लेकर मितानिन प्रशिक्षकों द्वारा कलेक्टर से आवेदन के माध्यम राशि दिलवाने की मांग रखी गई है।
सी एम एच ओ ने राज्य शासन को लिखा था पत्र
गौरतलब हो कि रायगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत 20 मितानिन प्रशिक्षक कार्यरत है।जिनका कार्य मितानिनों को शान की योजनाओं एवं उसके उचित क्रियान्वयन की जानकारी प्रदान करना है।राज्य शान द्वारा सितंबर वर्ष 2023 से इनके राज्यांश में 35 सौ रुपए की वृद्धि की गई थी।विकासखंड में कार्यरत मितानिनों द्वारा क्षतिपूर्ति भुगतान पत्रक अप्रैल से अगस्त 2024 तक जमा किया गया था।सी एम एच ओ ने राज्य शासन को लिखे अपने पत्र में बताया कि इन प्रशिक्षकों द्वारा त्रुटिवश राज्यांश वृद्धि की राशि का समावेश पत्रक में नहीं किया गया था।जिसकी वजह से इन्हें राशि प्राप्त नहीं हो सकी।बहरहाल चिकित्सा अधिकारी द्वारा पत्र 6 माह पूर्व लिखा गया था।जिसका कोई नतीजा नहीं निकल सका।और आज भी मितानिन प्रशिक्षक अपनी राज्यांश बढ़ोत्तरी की राशि लेने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने मजबूर है।कई बार विभागीय स्तर पर अवगत कराने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हो सका है, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है।
शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की अहम जिम्मेदारी
प्रशिक्षकों का कहना है कि वे लगातार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मेहनताना नहीं मिल पा रहा है।मितानिन प्रशिक्षकों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी जिला चिकित्सा अधिकारी को आवेदन देकर मानदेय भुगतान कराने की मांग की गई थी। प्रशिक्षकों का कहना है कि वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद राज्यांश भुगतान में लगातार देरी होने से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।मितानिन प्रशिक्षकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनके बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।




