शहर में मच्छरों का बढ़ता प्रकोप जनता दिन रात हो रही परेशान, निगम प्रशासन उदासीन
12 फागिंग मशीन में 5 खराब, नियमित दवा का छिड़काव नही होने से निगम के प्रति लोगो मे नाराज़गी
रायगढ़। शहर में इन दिनों पूरे 48 वार्ड में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग दिन और रात दोनों समय मच्छरों से परेशान होकर हलाकान हो रहे हैं। जबकि नगर निगम प्रशासन के पास 7 चालू हालत में फागिंग मशीन यार्ड में हैं और 5 खराब है। वार्ड वासियों के द्वारा सफाई दरोगा को फागिंग से दवा छिड़काव की मांग की जा रही है लेकिन इस दिशा में कोई सुनवाई नही होने से लोगो मे नाराजगी देखने को मिल रहा है।
देखा जाएं तो गर्मी शुरू होते ही मच्छरों का प्रकोप आतंक की तरह बढ़ गया है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और जगह-जगह गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ रहा है। इन्हें खत्म करने के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं हो रहा है। यह इनके प्रकोप को बढ़ाने में काफी मददगार बन रहे है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन की ओर से न तो नियमित फॉगिंग कराई जा रही है और न ही दवा का छिड़काव किया जा रहा है। मानो निगम प्रशासन की यह मशीन निगम दफ्तर वाहन शाखा यार्ड की शोभा बढ़ा रही है।
लोगों का आरोप है कि कई वार्डों में लंबे समय से फॉगिंग मशीन दिखाई नहीं दी है, जिससे मच्छरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द शहर में व्यापक स्तर पर फॉगिंग कराई जाए, नालियों की सफाई की जाए और एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाए, ताकि मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से लोगों को राहत मिल सके।
चालू और खराब मशीन बढ़ा रही है यार्ड की शोभा
मच्छरों से राहत दिलाने के नाम पर नगर निगम द्वारा लाखों रुपए खर्च कर फागिंग मशीन की खरीददारी की गई थी। वर्तमान में नगर निगम प्रशासन के बाद 12 फागिंग मशीन है लेकिन इसमें से केवल सात ही चालू है जबकि पांच खराब पड़े हैं उक्त सभी मशीन मानो नगर निगम वाहन विभाग में खड़ी होकर धूल खा रही है।अपुष्ट जानकारी के मुताबिक मशीन का अंदुरुनी समान खराब हो गया है जिस कारण यह सम्भवतः बनने में नाकाम हो सकता है।
शहरी और ग्रामीण दोनो क्षेत्रों के रहवासी हलाकान
विकास का स्वप्न दिखाकर नगर निगम ने अपने अधीन आठ वार्डो को किया था लेकिन इन ग्रामीण वार्डो के रहवासियों को क्या पता था कि यह महज शिगूफा निकलेगा। नए वार्डो का आलम यह है कि गोरखा,भगवानपुर, छातामुड़ा, सराईभद्दर, समेत अन्य ग्रामीण वार्डो में सफाई कर्मचारियों द्वारा झांकने तक नही जाते है। स्थानीय लोगो के मुताबिक माह में इक्का दुक्का दिन ही साफ सफाई की खानापूर्ति करते है।
मच्छरदानी और कॉइल बना लोगों का सहारा
शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के बाद लोग बचाव के लिए मच्छरदानी और कॉइल का सहारा लेने को मजबूर हैं। शाम होते ही घरों में मच्छरदानी लगाई जा रही है और कॉइल जलाकर किसी तरह रात काटी जा रही है। इसके बावजूद मच्छरों से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है, जिससे लोगों में नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।




